इस राज्य में अख़बार बेचने वाले की बेटी ऑफिसर बनी, बिना कोचिंग के एक बार में सफलता पा गई

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Shivjeet bharti HSC
26 year old Shivjeet Bharti, daughter of newspaper vendor cracked Haryana Civil Services exam in her first attempt and became officer.

Panchkula: दोस्तों शिक्षा वह हथियार है, जो समाज ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपना वर्चस्व बनाने के लिए लोगों को तैयार करता है। शिक्षा ही वह हथियार है, जिससे एक विकसित समाज का निर्माण होता है। हर व्यक्ति जानता है कि शिक्षा का उनके जीवन में क्या महत्व है, व्यक्ति जब शिक्षित हो जाता है, तो उसे किसी भी क्षेत्र की कठिनाइयां सरल हो जाती हैं।

दोस्तों शिक्षा ही लोगों में अच्छी मानसिकता पैदा करती है और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करती है। आज हम इस लेख के माध्यम से अखबार बेचने वाली बेटी की बात करेंगे, जो आईएएस ऑफिसर (IAS Officer) बन कर समाज का निर्माण कर कर रहे हैं। जी हां दोस्तों यह वही बेटी है जिसने बिना कोचिंग के यह मुकाम हासिल किया है। लोगो का मानना है कि यूपीएससी की परीक्षा भारतवर्ष में सबसे कठिन परीक्षा है।

UPSC HQ
Union Public Service Commission

इस परीक्षा (UPSC Exam) में मुख्य रूप से तीन चरण शामिल है, जिसमें पहला चरण प्रारंभिक परीक्षा दूसरा चरण मुख्य परीक्षाओं तीसरा साक्षात्कार यदि उम्मीदवार इन तीनों चरण में से किसी एक चरण में भी फेल हो गया, तो उसे दोबारा से इस परीक्षा की तैयारी शुरू से करनी होती है। लोगों का कहना है कि यह भारत में आयोजित होने वाली सभी परीक्षा में से सबसे कठिन है।

आईएएस ऑफिसर शिवजीत भारती

हर वर्ष यूपीएससी की परीक्षा में लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। भारत में 80 फीसदी युवा ऐसा है जो यूपीएससी का सपना देखता है। इन्हीं में शामिल है शिवजीत भारती (Shivjeet Bharti) जिन्होंने यूपीएससी का सपना देखा ही नहीं बल्कि उस सपने को जिया है। इस परीक्षा में सपना उन्हीं का पूरा होता है, जो त्याग और समर्पण के लिए तैयार होते हैं। कुछ ही लोग होते हैं, जो अपने यूपीएससी परीक्षा में सफल होने के सपने को पूरा कर पाते हैं।

हम बात कर रहे हैं, हरियाणा (Haryana) राज्य के अंतर्गत आने वाला पंचकूला (Panchkula) की रहने वाली शिवजीत भारती की जिनके पिता ने अखबार बैठकर अपने परिवार को संभाला आज उसी परिवार का नाम रोशन कर रही है शिवजीत भारती।

किसी महान व्यक्ति ने कहा है कि यदि आप गरीब पैदा हुए हैं, तो इसमें आपकी गलती नहीं है परंतु यदि आप गरीब ही रह जाते हैं, तो इसमें आपकी गलती है ईश्वर ने सबको दो हाथ दो पैर और सुविकसित मस्तिष्क दिया है। जिसका उपयोग करके व्यक्ति खुद को सफल बना सकता है। शिवजीत का परिवार भी आर्थिक दृष्टि से काफी कमजोर था। परंतु शिवजीत इन परिस्थितियों से कभी हार नहीं माना बल्कि डटकर मुकाबला किया और इन परिस्थितियों को हरा दिया।

गांव की सरकारी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की

शिवजीत भारती ने इस सफलता को बड़ी मुश्किलों और संघर्ष के साथ सफल किया है। बताया जा रहा है कि शिवाजीत की प्रारंभिक और उच्च शिक्षा उनके ही गांव के एक सरकारी स्कूल से पूरी हुई। उन्होंने अपना ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद पूरी तरह से यूपीएससी की परीक्षा तरफ ध्यान केंद्रित कर लिया।

यूपीएससी परीक्षा के संघर्ष के दौर में एक दौर ऐसा भी आया, जब उनके सामने संघर्षों की लड़ी लगी हुई थी। परंतु वे संघर्षों से डरकर कभी पीछे नहीं हटी उनके लिए यह संघर्ष उनकी चुनौतियां थी, जिसे डट कर उन्हें सामना करना था। जानकारी के अनुसार उन्होंने वर्ष 2015 में पंजाब यूनिवर्सिटी से उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया।

तैयारियों के बीच चली शादी की बात

एक लड़की के जीवन में शादी बहुत बड़ी समस्या बन जाती है। जैसे ही शादी की उम्र होती है घर परिवार और रिश्तेदार लड़कियों के पीछे पड़ जाती हैं कि उनकी शादी करनी है। मजबूरन कुछ लड़कियां घर वालों के दबाव में आकर अपने सपने को पीछे छोड़ कर शादी कर लेती हैं, परंतु कुछ लड़कियां अडिग होती हैं।

शिव जीत भारती भी अपने लक्ष्य के प्रति काफी गंभीर थी। उनके रिश्तेदारों ने शादी की चर्चाएं की तो उन्होंने शादी करने से साफ इनकार कर दिया। शिवजीत के इस फैसले में उनके माता-पिता ने पूरा साथ दिया उन्हें भी अपनी बेटी की पढ़ाई के प्रति लगन दिखाई दे रही थी, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए शादी की चर्चाएं बंद कर दी।

एचएससी परीक्षा को भी पहली बार में किया कर

शिव जीत ने कभी अपने माता-पिता के विश्वास को डिगने नहीं दिया। जब उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की तो इसी बीच उन्हें एचएससी परीक्षा (HSC Exam) देने का मौका भी मिला, तब उन्होंने इस परीक्षा को पहली बार में क्रैक करके अपने माता-पिता का मान बढ़ाया। उन्होंने इस पद पर जॉब करते हुए यूपीएससी परीक्षा दी और उस परीक्षा में सफलता भी हासिल की। उनके माता-पिता का कहना है कि उन्हें उनकी बेटी पर शुरू से ही भरोसा था जिस पर वह खरी उतरी।

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