रिक्शेवाले का बेटा बना IAS अधिकारी, माता-पिता का नाम रोशन करने वाले लाल की सफलता की कहानी

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Govind Jaiswal IAS
A Rickshaw Puller's Son Govind Jaiswal cracked UPSC exam and became IAS officer. Govind Jaiswal, son of rickshaw wala who aced in UPSC exam

Delhi: सपना हर कोई देखता है फिर चाहे कोई गरीब व्यक्ति हो या फिर अमीर व्यक्ति हो। सफलता अमीरों की गुलाम नही होती बल्कि सफल तो मेहनत करने वाले लोगों को मिलती है, जो बिना थके बिना रुके अपने लक्ष्य की तरफ अग्रसर रहता है। उसे सफलता जरुर प्राप्त होती है। कुछ घटनाएं लोगों का जीवन बदल कर रख देते हैं।

यदि लोग चाहे तो घटनाओं से सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, नहीं तो कुछ लोग इसे नकारात्मक दृष्टि से भी देखते हैं। अक्सर लोगों के जीवन को बदलने के लिए एक घटना का होना बेहद जरूरी है, तब जाकर उन्हें अपने जीवन का मुख्य आधार समझ में आता है। भारत में आज कितने भी बड़े बड़े ऑफिसर हैं उनके बड़े बड़े ऑफिसर बनने का कारण किसी ना किसी मोड़ पर घटी घटना है, जो आज उन्हें इस मुकाम पर ले आई है।

आज के दौर में माना जाता है कि हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर होना जरूरी है, फिर चाहे बेटा हो या बेटी। जीवन को चलाने के लिए पैसों की जरूरत ज्यादा होती है, इसीलिए किसी पर निर्भर होने की वजह आत्मनिर्भर बनना अच्छा जीवन जीने के लिए एक बहुत अच्छा रास्ता है।

रिक्शा चालक के बेटे की कहानी

दोस्तों आज हम इस लेख के माध्यम से एक रिक्शा चालक के बेटे (Rickshaw Puller’s Son) की बात करेंगे जिसने आईएएस बनकर अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है। यह आईएएस अधिकारी उन लोगो में शामिल है जिन्होंने अपने जीवन का ज्यादा से ज्यादा समय संघर्षों में व्यतीत किया है।

UPSC HQ
Union Public Service Commission

हम बात कर रहे हैं आईएएस अधिकारी गोविंद जयसवाल (IAS Officer Govind Jaiswal) की जो उत्तर प्रदेश राज्य के अंतर्गत आने वाला वाराणसी जिले के रहने वाले हैं। आईएएस गोविंद इस वक्त स्वास्थ्य एवं कल्याण विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत। गोविंद ने बचपन से ही काफी संघर्ष किया।

आज वे इस मुकाम पर अपने पिता और बहन की वजह से हैं, जिन्होंने उनके पग पग पर साथ दिया। बताया जा रहा है कि आईएएस अधिकारी गोविंद जयसवाल के पिता एक रिक्शा चालक है जो रिक्शा चला कर अपने परिवार को पालते हैं और अपने बेटे को पढ़ाते रहे।

त्याग और बलिदान से मिली है सफलता

आईएएस अधिकारी गोविंद जयसवाल बताते हैं कि वर्ष 2005 में उनकी मां का ब्रेन हेमरेज से देहांत हो गया। आगे भी बताते हैं उनकी मां के इलाज के लिए काफी ज्यादा पैसा खर्च हुआ। पहले उनके पिता एक रिक्शा कंपनी के मालिक हुआ करते थे, परंतु परिस्थितियों ने उन्हें एक रिक्शा चालक बना दिया। पहले 35 रिक्शे किराए पर चला करते थे, परंतु आज वे रिक्शा किराए पर लेकर चलाते हैं और अपना परिवार पालते हैं।

गोविंद बताते हैं कि उनके पिता ने सभी रिक्शा को बेचकर पैसे उनकी मां के इलाज में लगा दिए। परंतु आखिर में भी अपनी मां को नहीं बचा सके। गोविंद कक्षा सातवीं में थे। गोविंद के पिता पर तीन बेटियों के साथ एक बेटे की जिम्मेदारी भी आ गई थी। वे बताते हैं कि उन्होंने काफी समय तो ऐसा भी व्यतीत किया है कि उन्हें सूखी रोटी खाकर गुजारा करना पड़ा।

आईएएस बनने का सफर आसान नहीं था

आईएएस अधिकारी गोविंद जयसवाल बताते हैं कि उनके लिए आईएएस बनने का सफर आसान नहीं था। सबसे पहले उन्होंने अपनी मां को खोया उसके बाद उनके पिता मालिक से रिक्शा चालक बन गए।

इसके बाद उनके पिता ने अपनी बेटियों को अच्छे से पढ़ाया लिखाया ग्रेजुएशन कराकर उनकी शादी करती तीनों बहन की शादी करने में उन्होंने बाकी के बचे रिक्शा को भी बेच दिया, घर बार बेच कर वे काशी के अलईपुरा में 10 बाई 12 की एक कोठरी में रहने लगे। सही परीक्षा का दौर तो तब शुरू हुआ जब गोविंद का सही पढ़ाई का दौर शुरू हुआ।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उस्मानपुरा के सरकारी स्कूल से की। इसके बाद हरिश्चंद्र यूनिवर्सिटी ऑफ वाराणसी से गणित में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद वे यूपीएससी की तैयारी करना चाहते थे जिसके लिए वे दिल्ली जाना चाहते थे। वर्ष 2006 में वे दिल्ली जाकर यूपीएससी की तैयारी करने लगे इस दौरान गोविंद के पिता पैर में घाव होने के बावजूद रिक्शा चला कर पैसे इकट्ठे करके अपने बेटे की पढ़ाई के लिए भेजा करते थे।

वर्ष 2007 में 48 वी रैंक हासिल कर बने आईएएस अधिकारी

पिता और बेटी की मेहनत वर्ष 2007 में पूरी हुई जब भी पहले प्रयास में आईएएस बन गए। दोनों के लिए यह 1 साल आसान नहीं था। गोविंद के पिता के पैर में घाव होने के बावजूद भी उन्होंने रिक्शा चलाया और पैसे बचाने के लिए उन्होंने इलाज भी नहीं कराया।

वहीं दूसरी तरफ गोविंद भी दिल्ली जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे उन्होंने कोचिंग नहीं की पैसे बचाने के चक्कर में वे एक वक्त का टिफिन और चाय नहीं लेते थे। परंतु वर्ष 2007 में पिता और बेटी का संघर्ष सफल हुआ और वे आईएएस बन गए।

बताया जा रहा है कि गोविंद ने एक आईपीएस ऑफिसर से शादी की है जिनका नाम चंदना है। लोगों ने अफवाह उड़ाई कि उन्होंने लव मैरिज की है बल्कि गोविंद और चंदना की अरेंज मैरिज है यह रिश्ता गोविंद के

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