12वीं में फेल हुये, फिर पूरे राजस्थान में दूसरी रैंक प्राप्त कर लेक्चरर बने, एक मजदूर की कहानी

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Aashu Singh
Aashu Singh had failed in 12th exam and then he worked hard or cleared rajasthan public service commission. Now he is Assistant Professor.

Barmer: जरूरी नहीं होता कि व्यक्ति एक बार असफल हो जाए तो उसे आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता। कुछ लोग असफलता से निराश होकर अपनी राह बदल देते हैं, तो कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो असफलता को अपनी ताकत बनाकर आगे जी तोड़ मेहनत कर वह मुकाम हासिल कर लेते हैं जिसके वे हकदार होते हैं।

दुनिया में ढेरों ऐसे लोग हैं जो अपने स्कूली शिक्षा के दौरान या फिर कॉलेज की पढ़ाई के दौरान कम फीस दी अंक लगभग द्वितीय श्रेणी या तृतीय श्रेणी में पास हुए हैं, परंतु आज देश विदेश में अच्छे पद पर कार्यरत है। देश में कई ऐसे युवा है, जो कक्षा दसवीं में या 12वीं में फेल होने के बाद दोबारा परीक्षा देकर पास होने के बाद वह मुकाम हासिल किया जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।

समाज में देखा गया है कि यदि किसी गरीब घर का बेटा फेल हुआ है, तो वह मजदूरी करने लगता है या कहीं दुकान डालकर व्यापार शुरू कर देता है और यदि बेटी फेल हुई है तो उसका विवाह करके उसे गृहस्थ जीवन में व्यस्त कर दिया जाता है। परंतु इन्हीं युवाओं में एक वह भी होता है, जो असफल होने के बाद भी सफलता के लिए मेहनत करता है और एक दिन सफल होता भी।

12वीं में फेल युवक ने रचा इतिहास

आज इस लेख के माध्यम से हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे जिसने कक्षा 12वीं में असफलता प्राप्त कर दोबारा मेहनत कर आज एक इतिहास कायम किया है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के बाड़मेर (Barmer) जिले के अंतर्गत आने वाला गांव खारा के रहने वाले आशु सिंह (Aashu Singh) की। कक्षा बारहवीं में फेल हो गए थे और इस फेल से सीख लेकर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी दौड़ लगाई कि आज भी हिंदी साहित्य के कॉलेज लेक्चरर के पद पर कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने न केवल इस पद में अपना स्थान बनाया बल्कि पूरे राजस्थान (Rajasthan) में दूसरे स्थान प्राप्त किया है। निराशा और असफलता उनकी परछाई की तरह उनके साथ साथ चल रही थी, परंतु वह हमेशा आशावादी रहे और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहें आज उनकी सफलता पूरे राज्य में उनका नाम रोशन कर रही।

ढेरों मुसीबत के बाद भी अपना हौसला नहीं हारा

जानकारी के अनुसार आशु सिंह के पिता दिव्यांग के और उनका भाई भी मानसिक स्थिति से ग्रसित है। परंतु यह स्थिति उनके लिए कमजोरी नहीं बल्कि उनकी ताकत बनी। उन्होंने परिस्थितियों से लड़ते हुए यह नाम और शोहरत हासिल किया है।

उन्होंने हमेशा अपनी असफलताओं से सीखा और अपनी कमजोरी को दूर करते हुए एक दिन अपने सपने को पूरा किया। आशु एक स्कूल शिक्षक थे उसके बाद उन्होंने मेहनत कर कॉलेज के हिंदी असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) के पद के लिए चुने गए।

RAS में हुए 4 बार असफल

उनकी चुनौती कक्षा 12वीं की असफलता के बाद ही प्रारंभ हो गई थी। कक्षा 12वीं में असफल होने के पश्चात उन्होंने मजदूरी करना प्रारंभ कर दिया, परंतु शिक्षा से कभी मुंह नहीं मोड़ा। वे हमेशा पढ़ाई करते रहे और धीरे से उन्होंने कक्षा 12वीं की परीक्षा भी पास कर ली और आगे की शिक्षा भी जारी रखी।

उनके घर में ढेरों परेशानियां थी। पिता दिव्यांग और एक भाई मानसिक दिव्यांग था। उन्हें समझ में आया कि यदि उन्होंने कुछ बड़ा नहीं किया तो वह आगे कुछ नहीं कर पाएंगे। इसलिए उन्होंने छोटे बच्चों को पढ़ाना प्रारंभ किया साथ में राजस्थान लोक सेवा परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी।

आशु बताते हैं कि इस परीक्षा में विचार बार असफल रहे तब पांचवीं बार में उन्हें सफलता प्राप्त हुई परंतु उन्होंने हर असफलता से कुछ ना कुछ सीखा है, वह हमेशा अपनी कमजोरियों पर काम करते रहे और उन्होंने यह मुकाम हासिल कर लिया।

अपने लक्ष्य के लिए हमेशा रहे अग्रसर

आशु बताते हैं कि उन्होंने अपने लक्ष्य को पाने से पहले कई सारे पदों के लिए चुने गए जैसे वर्ष 2012 में उन्हें वरिष्ठ अध्यापक के लिए चुना गया इसके बाद वर्ष 2013 में उप निरीक्षक और वर्ष 2015 में स्कूल व्याख्याता के लिए चुने।

उनकी सफलता देश के सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है। जो व्यक्ति एक बार असफल होने के बाद दोबारा प्रयास नहीं करता उनके लिए आशु सिंह एक जीता जागता उदाहरण है कि उन्होंने कक्षा 12वीं में विज्ञान विषय में फेल होने के बाद मजदूरी की मजदूरी करते हुए पढ़ाई की और आज भी इतने सफल व्यक्ति बन पाए हैं। आशु का कहना है कि एकाग्र चित्त होकर अपने लक्ष्य की तरफ ध्यान केंद्रित करके ही व्यक्ति सफलता पा सकता है।

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