एक बस कंडक्टर की बेटी ऐसे IPS अधिकारी बन गई, पहले लोग ताने देते थे और अब तारीफ करते हैं

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IPS Shalini Agnihotri
IPS Shalini Agnihotri Biography In Hindi. Story of IPS officer Shalini Agnihotri who cracked UPSC exam in first attempt without coaching.

Photo Credits: Twitter

Una: सपना हर कोई देखता है फिर चाहे कोई गरीब व्यक्ति हो या फिर अमीर व्यक्ति हो। नहीं की सफलता अमीरों की गुलाम हो सफल तक तो मेहनत करने वाले लोगों को मिलती है, जो बिना थके बिना रुके अपने लक्ष्य की तरफ अग्रसर रहता है उसे सफलता जरुर प्राप्त होती है।

कुछ घटनाएं लोगों का जीवन बदल कर रख देते हैं। यदि लोग चाहे तो घटनाओं से सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, नहीं तो कुछ लोग इसे नकारात्मक दृष्टि से भी देखते हैं। अक्सर लोगों के जीवन को बदलने के लिए एक घटना का होना बेहद जरूरी है, तब जाकर उन्हें अपने जीवन का मुख्य आधार समझ में आता है।

भारत में आज कितने भी बड़े बड़े ऑफिसर हैं, उनके बड़े-बड़े ऑफिसर बनने का कारण किसी ना किसी मोड़ पर घटी घटना है, जो आज उन्हें इस मुकाम पर ले आई है। आज के दौर में माना जाता है कि हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर होना जरूरी है फिर चाहे बेटा हो या बेटी।

जीवन को चलाने के लिए पैसों की जरूरत ज्यादा होती है, इसीलिए किसी पर निर्भर होने की वजह आत्मनिर्भर बनना अच्छा जीवन जीने के लिए एक बहुत अच्छा रास्ता है। आज हम एक छोटे से गांव से निकलकर आईपीएस तक के सफर को तय करने वाली शालिनी अग्निहोत्री (IPS Shalini Agnihotri) की बात करेंगे।

भारत के सामने मिसाल पेश की शालिनी अग्निहोत्री ने

शालिनी अग्निहोत्री भारत के हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) राज्य के अंतर्गत आने वाला ऊना (Una) एक छोटे से गांव ठठ्ठल की रहने वाली है। उन्होंने इस छोटे से गांव से ही अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की। शालिनी ने एक छोटे से गांव से आईपीएस (Lady IPS Officer) तक का सफर तय किया है। उनके लिए यह सफर काफी मुश्किलों भरा था, परंतु उन्होंने सारी मुश्किल है, हंसते हुए पार की और आज वे भारत की सवा सौ करोड़ आबादी के बीच में एक मिसाल बन गई।

सफर कठिन था परंतु हौसला बुलंद मेहनत और कुछ कर दिखाने की जरूरत उन्हें आईपीएस बना दिया। शालिनी अग्निहोत्री आईपीएस अधिकारी बनने के पीछे बहुत बड़ा कारण था। उनकी मां के साथ एक घटना घटित हुई थी उस घटना ने शालिनी के जीवन को पूरी तरह बदल दिया। उसे घटना से उन्हें एक बड़ा अधिकारी बनने का मोटिवेशन मिला।

शालिनी का जज्बा ही उनकी पहचान है

शालिनी के जीवन में घटी एक घटना से उनका पूरा जीवन बदल गया उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि उन्हें एक बड़ा अधिकारी बनना है। उन्होंने इस क्षेत्र में जमकर मेहनत की और अपना सपना पूरा किया। आज लोगो के सामने उनको ईमानदार निडर और मेहनती अधिकारी होने की छवि बनी हुई है।

आईपीएस अधिकारी के लिए काफी गर्व की बात है। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने अभी तक की नौकरी में कई अपराधियों को सलाखों तक पहुंचाया। तो कई नशा के सौदागर को ताक में रखकर उन्हें गलत काम करने से रोका। हम कह सकते हैं कि शालिनी ने अपने फर्ज का सही इस्तेमाल किया है।

शालिनी बताती है कि उनकी मां के साथ एक घटना घटित हुई थी, जब छोटी थी तब मां के साथ बस में यात्रा कर रही थी। शालिनी की मां ने उन्हें तो ठीक तरह से बैठा दिया, परंतु खुद पूरे रास्ते असहजता महसूस करते रहे।

जाने उस घटना के बारे में

शालिनी बताती है कि उनकी मां ने उन्हें तो ठीक तरह से बिठा दिया था, बस में परंतु खुद पूरे रास्ते परेशान थी। हुआ ऐसा कि जिस सीट में शालिनी की मां बैठी हुई थी उसके पीछे वाली सीट में एक आदमी बैठा हुआ था और आगे की तरफ हाथ किया हुआ था, जिससे शालिनी की मां काफी ज्यादा अनकंफरटेबल महसूस कर रही थी।

उस आदमी को बार-बार शालिनी की मां ने हाथ को किनारे करने के लिए कहा परंतु उस आदमी ने ढिठाई दिखाते हुए हाथ नही हटाया। ऊपर से आखिर में बदतमीजी करते हुए कहता है कि तुम कहीं की अधिकारी हो इसीलिए जिस वजह से हम तुम्हारी बात माने। इस घटना के बाद शालिनी ने निश्चय किया कि वे बड़ी होकर एक बड़ी अधिकारी जरूर बनेंगे, यही वह घटना है जिसके बाद शालिनी का जीवन पूरी तरह बदल गया।

शत प्रतिशत अंक प्राप्त किए अपने स्कूली शिक्षा में

शालिनी ने अपनी स्कूली शिक्षा काफी अच्छे अंको से पास की है। कक्षा दसवीं में उन्होंने 92 फीसदी अंक प्राप्त किए। परंतु कक्षा 12वीं में उन्हें मात्र 77 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए जिस वजह से काफी निराश हो गए। इस स्थिति में शालिनी के माता-पिता ने उन्हें काफी हौसला दिया और अपने सपनों को पूरा करने के लिए फिर से मोटिवेट किया। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश से एग्रीकल्चर सब्जेक्ट से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया।

ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद उन्होंने अपने माता-पिता बिना बताए यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ कर दी। अपने माता-पिता को ना बताने का उद्देश्य केवल इतना था कि असफल होने पर उनके माता-पिता को तकलीफ ना हो इसीलिए उन्होंने नहीं बताया। शालिनी ने बिना कोचिंग के यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) पास कर ली थी। वर्ष 2011 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी और वर्ष 2012 में उन्होंने इंटरव्यू देकर 285 वी रैंक हासिल की।

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