
Delhi: कहते है अगर आपकी जिंदगी में कोई मकसद हो तो जिंदगी कि तस्वीर एक दिन बदल ही जाती है। क्योंकि मकसद ही हमें जीवन जीने का रास्ता दिखाता है। लेकिन मकसद ना हो तो अपनी किस्मत को कोसते कोसते ही लोगो कि जिंदगी कट जाती है। कुछ ऐसा ही मकसद था इरा सिंघल का। जिसने उनको जीवन जीना सिखा दिया।
उनका मकसद इतना बड़ा था कि जब वह पूरा हुआ तो लोग उनके कायल हो गये। इरा सिंघल (Ira Singhal) ने वह मुकाम प्राप्त किया। जो शारिरिक रूप से पूरे स्वस्थ होने के बावजूद भी कुछ लोग हासिल नही कर पाते है। इरा सिंघल बचपन से ही शारिरिक रूप से दिव्यांग है। इस दिव्यांगता (Disability) के बाद भी ईरा ने एक सपना देखा और उसे पूरा भी किया।
लोगो से सुनी डीएम कि ताकत और देखा आईएएस आफीसर बनने का सपना
ईरा सिंघल आज आईएएस ऑफीसर है। इरा ने 2014 में आयोजित यूपीएससी परीक्षा को पास करके पूरे भारत में प्रथम स्थान हासिल किया। उत्तरप्रदेश के शहर मेरठ में निवास करने वाली ईरा सिंघल पूरे देश में अब आईएएस ऑफीसर के तौर पर जानी जा रही है।
DEPwD has appointed Ms. Ira Singhal (IAS Rank 1, 2014) as the Brand Ambassador of the Department. Shri @TCGEHLOT pic.twitter.com/BA3nMw6czi
— Disability Affairs (@socialpwds) March 14, 2016
हालांकि आसानी से वह इस मुकाम पर नहीं पहुंची उन्होंने काफी मेहनत कि जिसकी बदौलत वह इस पद तक पहुंच पाई। ईरा के बचपन कि बात करें तो उन्होने मेरठ में रहकर ही अपना बचपन बिताया है। मेरठ में अक्सर ही कर्फ्यू लगता था।
लोगों को बात करते हुए एक बार इरा ने सुना कि कर्फ्यू को डीएम के आदेश देने पर लगाया जाता है। इरा को पता लगा कि और भी अनेक कानूनी ताकत डीएम के पास में होती है। यह सब पता लगते ही इरा ने आईएएस ऑफिसर बनने का निश्चय कर लिया। तथा उसकी वह तेयारी में लग गई।
लोगों ने कि आलोचना लेकिन नही टूटने दिया मनोबल
जब इरा ने यह सपना देखा तो लोगों कि आलोचना ने कई बार उनका मनोबल गिराया। लोगों ने यह तक कहा कि वह जो स्वयं को नहीं संभाल सकती वह इस समाज को कैसे संभाल पाएगी। बचपन से ही इरा की शारिरिक दिव्यांगता थी।
उन्हें सही तरीके से चलने में तक दिक्कत हुआ करती थी। ऐसे में उनके सपने का लोग बहुत बार मजाक भी बनाया करते थे। लेकिन इरा ने कभी इन तानों को मन से नही लगाया। वह अपने लक्ष्य के प्रति इतनी अडिग थी कि सब सुनते हुये वह अपने सपनो को पूरा करने के लिये मेहनत किया करती थी।
जॉब के साथ साथ कि तैयारी
इरा ने अपनी स्कूलिंग मेरठ से ही कि। उसके बाद उन्होंने आगे कि पढ़ाई के लिये दिल्ली के कॉलेज नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एडमिशन लिया। यहॉं से उन्होंने बीटेक किया तथा एमबीए भी यही से पूरा किया।
अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद इरा ने जॉब भी किया। इरा ने कोका कोला, केडबरी इन पेय पदार्थ वाली कंपनियों में काम किया। लेकिन इसी दौरान उनका मन आईएएस ऑफीसर (IAS Officer) बनने का हुआ। फिर क्या वह जॉब के साथ साथ यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) कि तेयारी भी करने लगी।
परीक्षा पास करने पर भी दिव्यांगता के कारण नहीं मिली पोस्ट
इरा सिंघल ने 2010 में पहली बार यूपीएससी कि परीक्षा दी। इसे उन्होंने पास भी कर लिया। लेकिन उनकी दिव्यांगता के कारण वह कोई भी पद को प्राप्त करने में असफल रही। लेकिन ईरा ने अपना मनोबल गिरने नही दिया।
#IAS इरा सिंघल के संघर्ष-जोश और जुनून की कहानी:शारीरिक कमी, समाज की हिकारत भरी नजरें और लोगों की इग्नोरेंस को पीछे छोड़ शीर्ष प्रशासनिक पद संभालने वाली"पहली दिव्यांग" महिला।आज भारत सरकार के Department of Disability, Ministry of Social Justice and Empowerment की ब्रांड एंबेसडर है। pic.twitter.com/DRBUJ3L2o8
— भारत की बेटी (@_bharatkibeti_) December 5, 2021
पद ना मिलने पर उन्होंने सेंट्रल एडमिनस्ट्रिेशन ट्रिब्यूनल पर एक अर्जी लगा दी। जोकि उन्हें पोस्टिंग ना मिलने के खिलाफ थी। 4 साल तक इरा का कैस लगा रहा। 4 साल बाद सीएटी ने इरा के पक्ष में डिसिजन दिया। लड़ाई जीतने के बाद ईरा को हैरदाबाद में सरकारी पद दिया गया। लेकिन इरा कुछ और भी करना चाहती थी।
2014 में ऑल इंडिया पाई फर्स्ट रैंक खुद को किया साबित
भले ही इरा ने केस जीत लिया हो। लेकिन इसी बीच उन्होंने 2014 में ही होने वाली यूपीएससी एग्जाम को फिर से दिया। इस बार इरा ने जनरल कैटेगरी से पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इरा कि यह उपलब्धि देखकर इरा के माता पिता बहुत ही गर्वित हुये।
IAS-2014 में अपने माता पिता की इकलोती बेटी "इरा सिंघल" ने टॉप कर बेटियों का गौरव बढाया। #OurDaughtersOurPride pic.twitter.com/7BQXh2E1R8
— Girish Kumar Verma😊 (@girish_kverma) July 23, 2015
इरा ने इस उपलब्धि से अपने माता पिता का नाम पूरे संसार में बढ़ाया है। अपनी मेहनत लगन निष्ठा से इरा (IAS Ira Singhal) ने साबित किया कि वह इस पद के लिये पूरी तरह फिट है और इसकी हकदार भी है। इरा के पूरे करियर कि बात करे, तो ईरा पूरे 3 बार इस परीक्षा को पास करने में सफल हुई है।



