
Bahraich: हर इंसान बचपन से बड़े होने तक एक ऐसे कैरियर की तलाश में होता है, जिससे उसके परिवार की जरूरत तो पूरी हो ही सके बल्कि, भविष्य भी सुरक्षित हो, समाज में अच्छा रुतबा भी रहे। इसके लिए पेरेंट्स बच्चों पर जोर देते हैं कि अगर आप अच्छे से पढ़ाई करोगे, तो निश्चय ही एक मजबूत कैरियर पा सकेंगे। इसलिए हर बच्चा बड़े होकर डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहता है।
कुछ ऐसे खास बच्चे भी हैं, जो पढ़ाई में बचपन से बहुत प्रतिभावान होते हैं और वह बड़े होकर किसी ऐसे सरकारी पद पर जाना चाहते हैं, जो प्रशासनिक सेवा से जुड़ा हो। इस कड़ी में आईएएस और आईपीएस दो ऐसे पद हैं, जिनका सामाजिक रुतबा दमदार है। परंतु इन दोनों एग्जाम को पास करना बहुत ही टेढ़ी खीर है। हर साल लाखों की संख्या में स्टूडेंट्स तैयारी करते हैं, परंतु महज कुछ सैकड़ा लोग ही इन पदों पर पहुंच पाते हैं।
कहते हैं ना कि, सही मेहनत और लगन इंसान की तकदीर बदलने की क्षमता रखती है। इसलिए देश में आए दिन उन गरीब परिवार के बच्चे भी आइएएस जैसे पदों पर पहुंच रहे हैं, जिनके यहां खाने के लिए दो वक्त का भोजन भी उपलब्ध नहीं है। ऐसी एक साधारण परिवार की हम आज कहानी लेकर आए हैं, जिसमें पिताजी तो डीएम की गाड़ी चलाते हैं अर्थात ड्राइवर (Driver) है। लेकिन उनके बेटे ने अपनी मेहनत के दम पर एसडीएम जैसे रैंक को हासिल किया।
बिहार के बहुत ही छोटे गांव से रखते हैं ताल्लुक
हम आज जिनकी बात कर रहे हैं, उनका नाम कल्याण सिंह (SDM Kalyan Singh) है। ये प्रतिभा के धनी बिहार राज्य के फकरपुर विकास खंड के अंतर्गत आने वाले करतारपुरवा लखवा के रहने वाले हैं।
आपको बता दें कल्याण सिंह के पिता श्री जवाहरलाल मौर्या बहराइच डीएम (Bahraich DM) के ड्राइवर पद पर कार्यरत हैं। जैसे ही डीएम के ड्राइवर जवाहरलाल मौर्या के पुत्र का रिजल्ट घोषित हुआ और उनके एसडीएम बनने की जानकारी उनके डिपार्टमेंट पहुंची, चारों ओर से उन्हें बधाइयां मिलनी शुरू हो गई।
यूपी. के बहराइच शहर के जिलाधिकारी के ड्राइवर के बेटे कल्याण सिंह जो बहराइच जिला के पखरपुर गांव के निवासी हैं इन्होंने (UPSC) P.C.S की परीक्षा में लाई 40वीं रैंक बने SDM 🇮🇳👍💐💐💐💐💐 pic.twitter.com/WgLvy6nviD
— दंडाधिकारी ⚖️👩⚖️⚖️🇫🇴🇱🇱🇴🇼🇧🇦🇨🇰 (@AdvPallaviMaur1) October 22, 2022
एक पिता के लिए ये पल बहुत भावुक कर देने वाला होता है। जब उसका पुत्र उससे भी अधिक सफलता प्राप्त करें। पूरे मौर्य परिवार में खुशी की लहर फैल गई। छोटे से गांव से एसडीएम बनने तक के कल्याण सिंह के सफर ने कई युवाओं को प्रेरणा देने का काम किया है।
पिता ने बताया उनके पुत्र कल्याण बचपन से ही प्रतिभावान थे
बातचीत के दौरान कल्याण सिंह के पिता जवाहर लाल जी ने बताया की उनका पुत्र कल्याण बचपन से ही पढ़ाई में बहुत ही प्रतिभावान रहा है। अपनी शुरुआती 12वीं तक की सारी एजुकेशन बहराइच के नानापुर क्षेत्र से पूरी की। आगे चलकर इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी की, तत्पश्चात आईआईटी दिल्ली में एडमिशन प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्होंने वहां से भी एमएससी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया।
एनटीपीसी में नौकरी के साथ-साथ की प्रशासन एग्जाम की तैयारी
कल्याण सिंह बचपन से ही होनहार थे, इसलिए उन्होंने सारी डिग्री देश के सर्वोत्तम विश्वविद्यालयों से प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने एनटीपीसी का एग्जाम क्रैक कर लिया और एनटीपीसी के महाराष्ट्र सोलापुर स्थित प्लांट में नौकरी ज्वाइन कर ली। परंतु उनका शुरू से ही प्रशासनिक सेवा की तरफ झुकाव रहा है, इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी के साथ ही एसडीएम की तैयारी जारी रखी।
जब स्वयं डी एम ने खिलाई मिठाई, भावुक कर देने वाला पल था
कल्याण सिंह का एक साधारण परिवार से एसडीएम पहुंचने तक का सफर बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा। 5 वर्ष पूर्व ही माता का स्वर्गवास हो गया, जिससे ये काफी दुखी हुए, परंतु अपने सपनों के प्रति लगन का पीछा करते हुए एसडीएम बन अपनी मां को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।
पिता DM के ड्राइवर, बेटा बना SDM,
बधाई 💐
यूपीएससी में पांच नंबर कम पड़ने के कारण कल्याण सिंह का आईएएस बनने का सपना पूरा नहीं हो सका था। pic.twitter.com/WdXJ3A5Ow7— ग्राम स्वराज (@GramSwaraj3) October 23, 2022
इस दौरान स्वयं बहराइच डीएम डॉक्टर दिनेश चंद्र एवं एसपी केशव चौधरी ने कल्याण के पिता जवाहरलाल को मिठाई खिलाई, ये पल बहुत ही भावुक कर देने वाला था। आपको बता दें कल्याण सिंह ने यूपीएससी का एग्जाम ऑल ओवर इंडिया ओबीसी 40वीं रैंक के साथ क्वालीफाई किया।



