युवा किसान पिता के साथ गांव के खेतो में काम करता था, इस जूनून ने उसे IAS अधिकारी बना दिया

0
2083
IAS Ravi Kumar Sihag
Ravi Kumar Sihag was a Hindi medium candidate and got 18th rank in UPSC CSE 2021. UPSC Success story of IAS Ravi Kumar Sihag.

Sri Ganganagar: भारत में जहां हर बच्चे का उद्देश होता है कि पढ़ लिख कर डॉक्टर या इंजीनियर बने, वहीं कुछ ऐसे भी बच्चे होते हैं जिनका उद्देश्य होता है, प्रशासनिक अधिकारी जैसे आईएएस या आईपीएस अधिकारी बने। यूपीएससी एग्जाम (UPSC Exam) भारत की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है।

आप देखेंगे कि दिल्ली जैसे महानगर में लाखों विद्यार्थी हैं, जो 10-10 साल लगातार प्रयास करने के बावजूद भी यूपीएससी परीक्षा क्रैक नहीं कर पाते। परंतु आज हम आपको एक ऐसे शख्स से मिलाने वाले हैं, जो कहने को एक किसान परिवार से आते हैं और अपने पिताजी के साथ खेती किया करते थे।

इन्होंने न सिर्फ तीन अटेम्प्ट में यूपीएससी का एग्जाम क्वालीफाई किया, बल्कि ऑल इंडिया 18वी रैंक (All India Rank 18) के साथ। आज ये देश के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो ऐसा मानते हैं कि यूपीएससी जैसे एग्जाम को क्वालीफाई करने के लिए शहर का होना जरूरी है। आइए जानते हैं इन की पूरी कहानी।

राजस्थान के इस गांव के रहने वाले हैं रवि सिहाग

दोस्तों हम बात कर रहे हैं हाल ही में 18 वीं रैंक के साथ आईएएस अधिकारी बने रवि सिहाग (IAS Ravi Kumar Sihag) की। इनके पिताजी का नाम श्री राम कुमार सिहाग है और माता का नाम विमला देवी है। परिवार में रवि के अलावा इनके तीन और भाई-बहन भी हैं जिनमें यह सबसे छोटे हैं। सिहाग परिवार राजस्थान के श्रीगंगानगर (Sri Ganganagar) गांव के रहने वाले हैं।

IAS Ravi Sihag
IAS Ravi Sihag File Photo

जानकारी के अनुसार रवि के पिता श्री राम कुमार खेती बाड़ी का काम करते हैं और रवि भी उनके साथ खेती के कामों में हाथ बताया करते थे b.a. की पढ़ाई तक, तो रवि फुल टाइम पिताजी के साथ खेतों में ही नजर आया करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी इसलिए उन्होंने हमेशा पिताजी का काम में हाथ बटाया है।

पिताजी के साथ कभी जाया करते थे कलेक्टर ऑफिस जहां से मिली प्रेरणा

दोस्तों रवि सिहाग से बातचीत के दौरान जानकारी मिली कि जब वह पिताजी के साथ खेती का काम किया करते थे तो अक्सर खेती में आने वाली समस्या जैसे सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था या बिजली की समस्या के चलते कलेक्टर ऑफिस आया जाया करते थे। जहां इन्होंने देखा कि कलेक्टर एक ऐसी पोस्ट है, जिसका सब सम्मान करते हैं और उनके पास हर समस्या के समाधान करने के लिए बड़ी अथॉरिटी भी है।

बस यहीं से रवि के मन में कलेक्टर बनने का सपना पनपने लगा और उन्होंने ठान लिया कि मैं भी एक दिन पढ़ लिखकर कलेक्टर बनूंगा और गांव में आमजन को होने वाली तरह-तरह की समस्याओं का समाधान करूंगा।

शुरुआती पढ़ाई हुई गांव में फिर तैयारी के लिए रुख किया दिल्ली

दोस्तों रवि सिहाग चार भाई बहन थे और आर्थिक तौर पर वह सिर्फ किसानी पर आश्रित थे। जिस वजह से इन्हें अपनी शुरुआती एजुकेशन सरकारी स्कूल से ही पूरी करनी पड़ी। वही स्थानीय कॉलेज से 2015 में बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री के साथ उन्होंने अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट किया।

रवि ने घर से ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। परंतु हर कोई जानता था कि इतना बड़ा एग्जाम गांव में रहकर क्वालीफाई नहीं किया जा सकता। तब इनकी लगन को देखते हुए पिताजी ने कुछ पैसों का बंदोबस्त किया और रवि ने यूपीएससी की तैयारी के लिए 2016 में दिल्ली की एक बड़ी कोचिंग संस्थान में प्रवेश ले लिया। जहां रवि ने जी तोड़ मेहनत करते हुए आज यह मुकाम हासिल किया।

सिर्फ 2 साल की मेहनत में ही क्वालीफाई कर लिया था फर्स्ट टाइम यूपीएससी एग्जाम

आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ 2 साल की तैयारी में ही रवि ने यूपीएससी 2018 का एग्जाम 337वीं रैंक से क्वालीफाई कर लिया था परंतु, उन्हें रेलवे डिपार्टमेंट दिया गया। इसलिए तैयारी आगे बढ़ते हुए 2019 में यूपीएससी एग्जाम 317वीं रैंक के साथ क्वालीफाई किया।

कलेक्टर बनना ही रवि का एकमात्र उद्देश्य था जिस वजह से अपनी मेहनत को उन्होंने दिन रात जारी रखते हुए यूपीएससी 2021 एग्जाम को ऑल इंडिया 18वीं रैंक से क्वालीफाई कर लिया। रवि ने यह मुकाम मात्र 26 वर्ष की उम्र में ही हासिल कर लिया। जिस वजह से आज यह देश के हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here