
Delhi: पुराना वक्त जब याद करो तो काफी चीजें आज के समय में बदली हुई नजर आती है। एक समय था कि लोग कई चीजों को अपने हाथों से ही बनाते थे और उसका इस्तेमाल करते थे, परंतु आज का दौर ऐसा है कि पुराने समय में मिलने वाली चीज है देखने भी नहीं मिलती। हम कह सकते हैं कि पुराने समय को आज के आधुनिक समय आने पाश्चात्य सभ्यता ने अपनी चादर ओढ़ा दी है।
आज से कुछ वर्षों पहले घरों में चूल्हे में खाना बनाया जाता था चूल्हे का बना भोजन काफी स्वादिष्ट और पोषक तत्व से भरा हुआ होता था। लोगों ने कहा कि चूल्हे में लकड़ियों के जलने से वातावरण में प्रदूषण होता है, इसीलिए चूल्हे का स्थान एलपीजी गैस ने ले लिया।
धीरे-धीरे समय बदला एलपीजी गैस के साथ-साथ अब लोग खाना बनाने के लिए हीटर इंडक्शन जैसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं। यह चीजें इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस है, इसीलिए इन उपकरणों में बना भोजन इतना स्वादिष्ट नहीं होता जितना चूल्हे में पककर होता था।
याद आता है पुराना वक्त
पहले के समय में जब चूल्हे में खाना बनता था, तो परिवार के सभी सदस्य एक साथ चटाई बिछा कर जमीन पर बैठे थे और भोजन ग्रहण करते थे। उस वक्त इंसान जमीन से जुड़ा हुआ होता था। आज के दौर में खाना बनने के बाद डाइनिंग टेबल पर बैठ कर भोजन ग्रहण किया जाता है। समय के साथ बहुत सी चीजों में बदलाव आ गया है लोगों को तो यहाँ तक कहते सुना है कि उन्हें पुराना समय बहुत याद आता है।

पहले के समय में चूल्हे का इस्तेमाल लोग घरों में खाना बनाने के लिए करते थे और उससे निकलने वाली राख का इस्तेमाल बर्तनों को साफ करने में किया जाता। उस समय आज के समय की डिश वॉश बार या लिक्विड नहीं चलता था, इसीलिए लोग चूल्हे से निकली हुई राख (Stove Ash) से बर्तनों को चमचम आकर साफ कर देते थे। आज भी उस राख की मांग बाजार में बहुत ज्यादा है।
बाजार हाट का स्थान लिया ऑनलाइन शॉपिंग ने
जैसे जैसे समय बदल रहा है वैसे-वैसे खरीदी का तरीका भी बदलते जा रहा है। पहले के समय में लोग बाजार हाट जाकर अपने उपयोग में आने वाली वस्तुओं को खरीदते थे और घरों में इस्तेमाल करते थे, परंतु आज के समय में लोग घर बैठे-बैठे मोबाइल के माध्यम से ई-कॉमर्स कंपनियों के माध्यम से अपने उपयोगी सामान को खरीद कर इस्तेमाल करते हैं।
ग्राहकों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि बाजार में चीजें सस्ती मिल रही है या ऑनलाइन। ग्राहकों को केवल अपने उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध होनी चाहिए। ऑनलाइन शॉपिंग के कारण लोकल शॉपिंग का कल्चर कुछ समय पश्चात खत्म होता नजर आने वाला है। ग्राहकों को यह बात समझना होगा कि मार्केट में मिलने वाली वस्तु और ऑनलाइन मिलने वाली वस्तु दोनों का मूल्य में फर्क काफी ज्यादा होता है।
ई-कॉमर्स कंपनिया वरदान है लोगों के लिए
ई-कॉमर्स (E-commerce) कंपनियां जैसे ऐमेज़ॉन फ्लिपकार्ट मिंत्रा मीशो आदि। यह ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म या हम इन्हें एप्लीकेशन भी कह सकते। इन प्लेटफार्म में वे सभी चीज उपलब्ध है, जो आज के समय में देखने भी नहीं मिलती। जैसा कि आप जानते हैं कि दादी नानी के समय में चूल्हे में भोजन पकाया जाता था और उससे निकलने वाली राख से बर्तन साफ किया जाता था।
हमारे बचपन के दिनों में हमारी दादी चूल्हे की राख से बर्तन मांजती थीं। अब अमैजोन इस राख को ₹499/- की 900 ग्राम के हिसाब से बेच यहा है। pic.twitter.com/JjEkcZscPJ
— 🇮🇳 khanna248 🇮🇳 (@khanna248) January 10, 2021
आज भी इस राख की मांग बाजार में देखने को मिलती है। परंतु काफी सारे उत्पाद ऐसे हैं जो लोकल बाजार में नहीं मिलती इसीलिए अब लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लेते हैं, इन चीजों को खरीदने के लिए। दोस्तों आपको बता दें दादी नानी के समय में मुफ्त में बैठने वाली चूल्हे से निकली राख आज ऐमेज़ॉन में 1800 रुपया किलोग्राम के हिसाब से बेची जा रही है। Ash Powdar के नाम से बेचा जा रहा चूल्हे की राख (Choolhe Kee Raakh) के ढाई सौ ग्राम के पैकेट का मूल्य 450 RS है।
अन्य सामान भी उपलब्ध है अमेजॉन पर
ऐमेज़ॉन (Amazon) एक बहुत बड़ा ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म है, जहां दुनिया की हर चीजें उपलब्ध है। जैसा कि सनातन धर्म में मान्यता है कि गाय के गोबर के बने उपले, पूजन सामग्री में उपयोग होने वाली आम की लकड़ियां, दातुन जैसी चीजें भी ऑनलाइन बुलाई जा सकती।
जिस चूल्हे की राख से हमारे पूर्वज बर्तन मांजते थे, पहले उनको अवैज्ञानिक कहकर उसका मजाक बनाया गया.
केमिकल वाले डिशवाश के प्रयोग की आदत डाली, जो कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बना।
आज वही चूल्हे की राख अमेज़न जैसी कंपनी 1800 रुपये किलो बेच रही है। pic.twitter.com/ucU6iQSm7g— स्वामी रामदेव (@yogrishiramdev) February 13, 2023
आपको बता दें आज से कुछ वर्ष पहले इन चीजों के लिए कोई मूल्य नहीं देना होता था परंतु आज के समय में इन चीजों को खरीदने के लिए 4 से 5 गुना कीमत देनी होती है। ऐमेज़ॉन में एक उपले की कीमत 100 RA होती है, जबकि लोकल में 4 से 5 RS में एक उपले आराम से मिल जाता था। पूजा में उपयोग होने वाली लकड़ियां और दातुन पहले दादा नाना चलते फिरते कहीं से भी तो लाते थे परंतु इनके लिए भी लोगों को 100 से 200 RS देने होते हैं। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और बदलता समय इसका उदाहरण है।



