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Rewa: ऐसा तो कही नहीं लिखा की कामयाबी अमीरों के नसीब में बस होती है, जबकि कामयाबी तो गरीबो का हक़ होता है। अगर अपने सपनों के पीछे जी जान लगाकर पीछे पड़ जाये, तो मंजिल एक दिन आपके कदमों के नीचे होते हैं।
जब तक कोई भी व्यक्ति के जीवन में किसी भी तरह का आभाव नहीं होगा, तो उसे कामयाबी, लक्ष्य के बारे में कुछ पता नहीं होता। आज इस पोस्ट में हम बात करेंगे मध्यप्रदेश के रीवा जिले के एक छोटे से गांव की एक ऐसी बेटी की, जिसने आज अपने माँ बाप के साथ साथ मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) का, रीवा जिला और उसके गांव का नाम रोशन कर दिया।
रीवा के एक गांव लौरी नंबर-3 की निवासी रामकली कुशवाहा (Ramkali Kushwaha) एक मजदूर मां-बाप की बेटी है। इन्होंने देश के सबसे कठिन एग्जाम में से एक GATE (Graduate Aptitude Test in Engineering) की परीक्षा में सफलता हासिल की है। ना जाने कितने युवाओं का सपना होता है ये एग्जाम।
हर वर्ष लाखो युवा एक लक्ष्य और विश्वास के साथ अपने सपने की तरफ बढ़ते है। यही सपना रामकली ने भी देखा और उसके सपने और मजबूत इरादों को उसके गरीब मां-बाप के संघर्षों ने पंख दिए। रामकली के माता पिता दोनों ही मेहनत-मजदूरी करके अपनी बेटी को आगे बढ़ा रहे हैं।
एक इंटरव्यू में रामकली ने बताया की उनके पिता चंद्रिका कुशवाहा और माता प्रेमवती कुशवाहा ने एक कच्चे मकान में अपना पूरा जीवन निकाल दिया परंतु, उसे और उसके भाई-बहन को पढ़ाने में कभी कोई कमी नहीं होने दी। रामकली अब आगे IIT मुंबई से एम-टेक (M Tech) की पढ़ाई करना चाहती है। आइये विस्तार से जानते है रामकली के बारे।
घर की सबसे बड़ी बेटी है रामकली
रामकली अपने चार भाई बहन में सबसे बड़ी हैं। उनसे छोटा एक भाई है जो 12वीं कक्षा का विद्यार्थी है। उसके बाद एक छोटी बहन है, जो अभी कक्षा 9 की छात्रा है और सबसे छोटा एक और भाई है, जो अभी सिर्फ 5 साल का है।
रामकली घर की बड़ी बेटी है इस लिए उनकी कई सारी जिम्मेदारी भी होती है। रामकली बताती है कि उन्होंने 12वी तक की पढ़ाई गांव में रह कर अलग-अलग स्कूलों में की। भौतिक शास्त्र के शिक्षक समीर वर्मा ने उन्हें बीटेक करने का सजेशन दिया। तो रामकली ने कृष्णा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग मनगवां में दाखिला ले लिया। परंतु कॉलेज रामकली के गांव से 30 किलोमीटर दूर था, जिससे उन्हें रोज बस से सफर करके जाना पड़ता था।
एक साल के बाद कॉलेज बंद हो गया। जिससे उन्हें रीवा के जवाहरलाल नेहरू कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी में ट्रांसफर लेना पड़ा यह कॉलेज उनके गांव 60 से किलोमीटर दूर था। फिर भी रोज अप-डाउन किया। बस में एक तरफ का किराया 50 रुपए था। दिन का 100 रुपये लगता था। समय बीतता गया। ऐसे ही बीटेक सिविल इंजीनियरिंग के दो साल निकल गए फिर वह घर से पढ़ाई करती रही।
समय बचा बचा कर GATE परीक्षा की तैयारी करती रही
आपदा में घर पर खाली समय का बेहतरीन तरीके से उपयोग किया। मन में सिर्फ एक ही लक्ष्य था, GATE एग्जाम में सफलता पाने का। रामकली के पिता ने उन्हें लैपटॉप दिलाया। जिस वक्त रामकली को उनके पिता ने लैपटॉप दिलाया था। उस वक्त उनके पास काम भी नहीं था। मोबाइल और लैपटॉप का भी सही इस्तेमाल किया। यूट्यूब की मदद से तैयारी की। दो साल तक दिन-रात कड़ी मेहनत की।
रीवा के श्रमिक पिता की होनहार बेटी रामकली कुशवाहा ने #GATE2022 की परीक्षा में अभूतपूर्व सफलता हासिल कर क्षेत्र और अपने परिवार का नाम रोशन किया है।
इस उपलब्धि के लिए बेटी रामकली को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं। pic.twitter.com/09bk8IeGCW
— VD Sharma (@vdsharmabjp) March 24, 2022
रामकली के पिता चंद्रिका कुशवाहा कहते है कि उनकी बिटिया बचपन से खूब होसियार है। उसने कक्षा 1 से 4 तक पढ़ाई सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल गढ़ से की। फिर 8वी तक की पढ़ाई आदर्श स्वामी विवेकानंद माध्यमिक विद्यालय लौरी नंबर 2 से की। इसके बाद कक्षा 12 की पढ़ाई गांधी ग्रामोदय हायर सेकेंडरी स्कूल गढ़ से कंपलीट की।
बिना रूपरेखा के कोई भी काम सफल नही होता
जो भी विद्यार्थी GATE की तैयारी कर रहे उन्हें रामकली सफलता पाने के लिए टिप्स देती है। रामकली कहती है कि प्रतिदिन का एक टारगेट और टाइम टेबल बनाना बहुत जरुरी होता है। टारगेट और टाइम टेबल की मदद से समय का सदुपयोग और कब क्या पढ़ना है, उसका हिसाब किताब रहता है।
बिना प्लानिंग के पढ़ना अपने आप को धोखा देना है। पहले अपना बेसिक कॉन्सेप्ट मजबूत करें फिर न्यूमेरिकल का अभ्यास करें। साथ ही मॉक टेस्ट लगाए इससे कॉन्फिडेंस बढ़ता है। हर दिन दो से तीन सब्जेक्ट की पढ़ाई करें।
अगर आप एक सब्जेक्ट पढ़ते है, तो आप बोरियत महसूस करने लगेंगे और फिर पढ़ने में मन भी नहीं लगेगा। एक सब्जेक्ट पूरा होने के बाद उसका रिवीजन जरूर करले। इससे पढ़ी हुई चीज़ आपकी डीप मेमोरी में चली जाती है और आप उसे भूलते नहीं है।
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रामकली कहती है कि 17 मार्च का वो दिन उन्हें आज भी याद है, जब GATE का रिजल्ट आया था। जिसमें उन्होंने इस परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक में 3290 और एनवायरमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग में 435वीं रैंक में अपना नाम दर्ज किया।
मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बधाई दी।
रामकली की सफलता पर हर तरफ से उन्हे बधाईयां मिल रही है। आम जनता से लेकर राज्य के सीएम भी रामकली को बधाई दे रहे है। रिजल्ट आने के ठीक 7 दिन बाद 23 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (MP CM Shivraj Singh Chouhan) ने स्वयं रामकली से बात की।
सी एम चौहान ने रामकली से कहा कि आगे की पढ़ाई और एम-टेक की पढ़ाई में राज्य सरकार से आपको पूरा योगदान मिलेगा। मुख्यमंत्री से बात करने के दौरान रामकली ने एम टेक के बाद पीएचडी की पढ़ाई कर शिक्षा के क्षेत्र में जाने की बात रखी है।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा बेटी तुम आगे बढ़ती रहो तुम्हारी राह में आने वाली रूकावट को तुम्हारा मामा दूर करेगा। ऐसे ही अपने लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत करती रहो और अपने सपनों को साकार करो तुम्हारे खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं और आशीर्वाद।



