
Jabalpur/Madhya Pradesh: लॉकडाउन के कारण देशभर के परिवहन और उद्योग बंद हैं। ऐसे अनेकों कारखाने बंद है, जो गन्दगी को नदियों में प्रवाहित कर दिया करते है। अब लॉक ओन की वजह से यह सब बंद हो गए है। इसका असर पर्यावरण पर दिखाई देने लगा है। गंगा, यमुना और नर्मदा सहित कई नदियों का पानी एकदम स्वच्छ होने लगा है।
आपको बता दे की लॉक डाउन के पहले अनेक हिस्सों में नर्मदा नदी का पानी धुंधला और मटमैला देखे दिया करता था। इन दिनों वही पानी मिनरल वॉटर सामान दिखाई दे रहा है। नर्मदा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है नर्मदा नदी जल (Narmada River Water) का मानक मिनरल वॉटर जैसा हो गया है। विभाग द्वारा इसकी जांच भी की गई है।
आपको ता दें की जानकार लोग कहते है की आज से 25 साल पहले नर्मदा का जल ऐसा ही शुद्ध था। जो आज लॉक डाउन के समय देखे देने लगा है। नर्मदा जल (Narmada Water) का TDS पहले 126 मिलीग्राम प्रति लीटर नापा गया, जो घटकर 100 से भी कम हो गया है। आपको ज्ञात हो की मिनरल वॉटर (Mineral Water) का TDS 55 से 60 मिलीग्राम प्रति लीटर मेंटेन करना होता है।
आपको बता दे की नर्मदा नदी के पानी में कई प्रकार की जड़ी-बूटियां भी समाहित होती हैं। इसे पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। नर्मदा नदी के शुद्ध प्राकृतिक पानी पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जो कोरोना जैसे संक्रमण से शरीर की रक्षा करती है और कुछ हद तक जंग की शक्ति देती है। नर्मदा नहीं के चारों तरफ घने जंगल है, यहाँ से पानी बेहटा होता आता है और अपने साथ अनेक जड़ी-बूटियां लेता होता आगे बढ़ता हैं। इसे में नर्मदा का जल अपने आप में कई मेडिकल प्रॉपर्टी भी समाये लता है।
लॉक डाउन का असर। नर्मदा नदी का जल मिनरल वाटर जैसा साफ और शुद्ध हुआ। यह तस्वीर जबलपुर मध्यप्रदेश के नर्मदा घाट की है।
हर हर नर्मदे। pic.twitter.com/JCNMAv55g4— Nitin Uploader (@NitinUploader) April 26, 2020
Narmada River Water is pure like mineral water during Corona lockdown. Narmada River consists many medical properties because of forest herbal plaints. Narmada River Water can give energy to human body.
इससे पहले भी खबर आई थी की अब आप यह तो समझ ही गए होंगे की मौसम इतना ज्यादा नेचुरल कैसे हुआ। इसमें देशव्यापी लॉकडाउन का इसमें अधिक योगदान है। पूरे देश से लोग सोशल मीडिया पर अपने शहर के साफ आसमान की तस्वीरें साँझा कर रहे हैं। अब कुछ तस्वीरें जालंधर से आई थी, जहां से हिमालय पर्वत की धौलाधार रेंज (हिमाचल प्रदेश) के बर्फीले सफ़ेद पहाड़ दिखाई दे रहे थे।
भारत में हर तरह के प्रदूषण में खासी कमी आई है। 91 शहरों की हवा की गुणवत्ता अच्छी और संतोषजनक श्रेणी में आ चुकी है। अब से 4 महीने पहले ही उत्तर भारत के जो शहर दूषित हवा से साये में थे, वह अब शुद्ध हवा में सांस ले रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के कारण पावन गंगा नदी का जल भी फिर से निर्मल होने लगा है। इन दिनों उसका प्रदूषण कम हो रहा है।
लॉकडाउन की वजह से नदी में औद्योगिक कचरे की डंपिंग में कमी आई है। गंगा का पानी ज्यादातर मॉनिटरिंग सेंटरों में नहाने के लिए उपयुक्त पाया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक़ कोरोना वायरस के लिए लागू यातायात संबंधी कामकाज बंद किए जाने से देश में प्रदूषण के स्तर में खासी कमी आई है। लॉकडाउन से गंगा काफी स्वस्थ्य होती जा रही है, क्योंकि इन दिनों औद्योगिक कचरा नहीं आ रहा है। रियल टाइम वॉटर मॉनिटरिंग में गंगा नदी का पानी 36 मॉनिटरिंग सेंटरों में से 27 में नहाने के लिए उपयुक्त पाया गया है।
हाल ही में एक और खबर आई थी की पूरी दुनिया में लॉक डाउन होने और लोगो के अपने अपने घरो में रहने के चलते अब ओज़ोन लेयर का छेद भी भरने लगा है। इसका मतलब यह है की हमारी इस प्रकृति और पृथ्वी के दूषित और विषाक्त होने के पीछे का कारण हम और हमारी गाड़िया और प्रदुषण रहा है। आज कुछ दिन का लॉक डाउन क्या हुआ, हमारी यह प्रकृति फिर से आबाद होने लगी।



