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Delhi: इस वक़्त देश की सरकार पूरे देश में हर क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के अपने मिशन को पूरा करने के रथ पर सवार है। देश के ही अंदर हर तरह की इंडस्ट्री स्थापित की जा रही है। अब जो उपकरण देश के बाहर विदेशों से खरीदे जाते थे और उनका रखरखाव भी महंगा पढता था, अब वही उपकरण भारत में ही बनने लगे हैं।
एमईआईएल (MEIL) ने अभी जिस रिग (Rig) का निर्माण किया है, वह ONGC के आंध्र प्रदेश स्थित राजमुंदरी असेट के लिए है। MEIL का कहना है कि यह 2000-HP Rig है, जो 3,000-HP पारंपरिक रिग के बराबर सर्विस दे सकता है। यह रिग जमीन में 6,000 मीटर (6 KM) की गहराई तक ड्रिल करने में सक्षम है।
रिपोर्ट्स बताती है की MEIL को प्रतिस्पर्धी बोली में ONGC से 47 रिगों का ऑर्डर मिला है। इनमें से 20 वर्कओवर रिग हैं और 27 भूमि ड्रिलिंग रिग (Drilling Rig) बताई गई हैं। अब भारत को समुन्दर में भी ड्रिलिंग के लिए विदेशी उपकरणों की मदत नहीं लेनी होगी।
एमईआईएल भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में जोरहाट के पास सिबसागर, आंध्र प्रदेश में राजमुंदरी, गुजरात में अहमदाबाद, अंकलेश्वर, मेहसाणा और खंभात, त्रिपुरा में अगरतला और तमिलनाडु के कराइकल में ओएनजीसी के असेट के लिए सभी रिगों का निर्माण और आपूर्ति करेगा।
Since inception on 14 August 1956, #ONGC has transformed India’s limited Oil & Gas sector into a large industry in 6 decades, with significant discoveries since 1974, putting India on world oil map. See ONGC’s (and India’s) first offshore rig Sagar Samrat. #65ONGCFoundationDay pic.twitter.com/BptIESwkV4
— Oil and Natural Gas Corporation Limited (ONGC) (@ONGC_) August 14, 2020
इसने निर्माण में कुछ खास बांतों का ध्यान रखा गया है। सिक्योरिटी और रखरखाव के चलते डाउन टाइम को कम करने के लिए इन रिगों को पूर्ण स्वचालन के साथ बनाया गया है। ये रिग ओएनजीसी ड्रिलिंग के काम में शामिल होने वाली ऐसी पहली रिग हैं। कहा बताया जा रहा है कि ये रिग आने वाले दिनों में कुओं की ड्रिलिंग तकनीक में भी बहुत योगदान देगी।
#Blowout #preventers are used to handle unpredictable pressure while #drilling #oil wells and prevent blowouts. The MEIL installed #C4R1 #rig in Rajahmundry Asset of #ONGC, which can control pressure up to 5,000 PSI, and it's used first time in #India. pic.twitter.com/5o8MyfjUHn
— Megha Engineering and Infrastructures Ltd (@MEIL_Group) March 10, 2022
एक मीडिया रिपोर्ट में एमईआईएल में रिग्स प्रोजेक्ट के टेक्निकल हेड सत्य नारायण के हवाले से बताया गया की इस रिग को स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। इसके अलावा इसे यहीं अपने संसाधनों से ही बनाया गया है। यह रिग एक कम्प्यूटरीकृत स्वचालित ड्रिलर के केबिन से लैस है। यह रिग की रखरखाव लागत को काफी कम कर देने वाला है।
An oil rig that became a permanent feature for Mossel Bay is on its final journey to the world's largest ship graveyard in Alang, India after being reportedly sold for scrap. It was part of #PetroSA's failed gas exploration – Project Ikhwezi in 2012 – which led to a R14.5b loss pic.twitter.com/tt40KR1VhA
— Sphiwe Hobasi (@MrCow_man) February 16, 2022
एमईआईएल असम में जोरहाट के पास सिबसागर, आंध्र प्रदेश में राजमुंदरी, गुजरात में अहमदाबाद, अंकलेश्वर, मेहसाणा और खंभात, त्रिपुरा में अगरतला और तमिलनाडु के कराइकल में ONGC के असेट के लिए सभी रिगों का निर्माण और आपूर्ति करेगा। इससे ड्रिलिंग भी आसान होगी और विदेशी उपकरणों का खर्चा भी बचेगा।



