
Gurugram, Haryana: ईश्वर कभी–कभी बहुत कहर बरपा देता है। किसी को काफी सुख तो किसी को काफी दुःख दे देता है। इंसान के जीवन में कभी भी एक जैसा समय नहीं रहता। इंसान को अपने पूरे जीवन काल में हर उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ता है। कभी जीवन में सुख आता है तो कभी दु:ख का भी सामना करना पड़ता है।
जब इंसान के जीवन में दुख आता है, तो ज्यादातर लोग कठिन दौर में टूट जाते हैं, परंतु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो कठिन समय में अपने आपको संभाल लेते हैं। इस मामले में नौकरी लगने से पांच दिन पहले पिता का साया बेटी के सिर से उठ गया था। परिवार में हर कोई पिता की मौत से सहमा था, लेकिन 22 साल की बेटी सोनी ने हिम्मत नहीं हारी।
वह परिवार का सहारा बनकर खड़ी हो गई और हरियाणा रोडवेज के हिसार डिपो में अपनी नौकरी ज्वॉइन की। 22 साल की सोनी अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठा रही हैं और डिपो में मैकेनिकल हेल्पर के पद पर कार्य कर अपने परिवार के लोगों का पेट भर रही है। कुछ समय पहले ही सोनी की नौकरी हरियाणा रोडवेज के हिसार डिपो में लगी थी। हालांकि नौकरी लगने से पांच दिन पहले सोनी के पिता की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद सोनी के ऊपर परिवार का पूरा जम्मा आ गया।
हरियाणा की इस बेटी ने दिखाया गजब का हौंसला
आज हम आपको हरियाणा के हिसार जिले के गांव राजली में रहने वाली एक ऐसी बहादुर लडक़ी की सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने अपने पिता के निधन के बाद ना केवल अपने पूरे परिवार को संभाला, बल्कि हरियाणा रोडवेज की वह नौकरी की, जिसे केवल मर्दों के लिए ही बनाया गया है।
यह कहानी है सोनी की, जिनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया और वह भी ऐसे वक्त में जब परिवार को उनकी बहुत जरूरत थी। परिवार में हर कोई हैरान और परेशान था, किसी को समझ नहीं आ रहा था कि परिवार के मुखिया का सहारा उठने के बाद घर कैसे चलेगा।
सोनी का परिवार काफी बड़ा है और आठ भाइ-बहन है
ऐसे में 22 साल की बेटी सोनी ने ना केवल खुद की हिम्मत को समेटा, बल्कि पूरे परिवार को भरोसा दिलाते हुए हरियाणा रोडवेज में मौकेनिकल हैल्पर की नौकरी (Mechanical Helper Job in Haryana Roadways Bus) ज्वाइंन की। हिसार के गांव राजली की रहने वाली सोनी का परिवार काफी बड़ा है और इनके परिवार में आठ बहन-भाइयों हैं। जिसमें से सोनी तीसरे नंबर की है।
पिता के जाने के बाद अपने भाई-बहनों की सारी जिम्मेदारी सोनी पर आ गई है और सोनी की आय से ही घर के लोगों का गुजारा हो रहा है। हिसार डिपो (Hisar Dipo) में सोनी बसों की मरम्मत का काम करती है। एक लड़की होकर सोनी इस काम को अच्छे से कर रही है।
सोनी के अनुसार उनके पिता नरसी का 27 जनवरी 2019 को बीमारी के चलते निधन हो गया था। इनकी मां घर के कामों को संभालती हैं। ऐसे में सोनी के ऊपर घर खर्च की सारी जिम्मेदारी आ गई। सोनी ने हिसार (Hisar) डिपो में मैकेनिकल हेल्पर (Mechanical Helper) के पद पर 31 जनवरी 2019 को ज्वाइन किया था और बाखूबी से अपना काम कर रही हैं।
नेशनल में लगातार तीन बार जीत चुकीं स्वर्ण पदक
सोनी मार्शल आर्ट के पेंचक सिलाट गेम की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। सोनी को खेल कोटे के तहत हिसार डिपो में मैकेनिकल हेल्पर के पद पर नौकरी (Mechanical Helper Job) मिल गई थी। पेंचक सिलाट मार्शल आर्ट की सबसे सुरक्षित फॉर्म है, क्योंकि इसमें प्रतिभागियों को अपने प्रतिद्वंद्वियों के चेहरे पर हिट करने की अनुमति नहीं होती है।
पिता ने किया था खेलने के लिए प्रेरित
पिता का सपना था कि बेटी खिलाड़ी बनकर देश की झोली में पदक डाले। पिता के कहने पर ही सोनी ने वर्ष 2016 में खेलना शुरू किया था। तीन बार लगातार स्वर्ण पदक (Gold Medal) भी जीते। उसकी खेल कोटे के तहत ग्रुप डी में नौकरी लगी।
पिता का साया उठा नहीं टूटा बेटी का हौसला, रोडवेज बसों की मरम्मत कर चलाती है घर, हरियाणा रोडवेज के हिसार डिपो में अपनी नौकरी ज्वॉइन की, हिसार के गांव राजली की रहने वाली सोनी आज हिसार डिपो में मैकेनिकल हेल्पर के पद पर कार्यरत है । pic.twitter.com/odN5VMWftk
— Balam Singh 🇮🇳 (@singhbalam77) December 16, 2020
सोनी को मार्शल आर्ट (Marshal Art) भी आती है और सोनी ने मार्शल आर्ट की पेंचक सिलाट गेम की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीता था। सोनी के अनुसार उनके पिता का सपना था कि वो खिलाड़ी बनकर देश के लिए पदक जीते। सोनी ने शुरू में अपने गांव राजली में कबड्डी खेलना शुरू किया था।
इस दौरान सोनिया से सोनी की मुलाकात हुई और सोनिया ने सोनी को पेंचक सिलाट गेम ज्वाइन करने को कहा। दोस्त के कहने पर सोनी ने ये खेल सीखा और आज इस खेल की वजह से सोनी को नौकरी मिल पाई है।
सोनी (Soni Mechanical Helper) का कहना है कि उन्होंने पिता के कहने पर ही साल 2016 में खेलना शुरू किया था। खेल कोटे के तहत ही हिसार डिपो में मैकेनिकल हेल्पर के पद पर उन्हें नौकरी मिल गई है। इस नौकरी से उनका परिवार चल रहा है।



