
Fatehpur: वैसे तो भारत में कई प्रकार के त्यौहार मनाया जाते हैं होली, दिवाली, रक्षाबंधन और ना जाने कौन-कौन से। भारत में हर दिन ऐसा लगता है मानो त्योहार हो। त्योहारों में अक्सर अपने घर से दूर रह रहे लोग फिर चाहे वह विद्यार्थी हो या फिर किसी नौकरी के कारण बाहर रह रहे हैं।
वह सभी छुट्टियों में अपने घर आते हैं, परंतु आर्मी के जवानों (Army Jawans) को साल के 12 महीने में से मुश्किल से साल में 1 महीने घर में रहने मिलता हैं, बाकी पूरे समय एक जवान सीमा में तैनात होकर इस देश को आने वाले खतरे से सुरक्षित रखता है। आर्मी मैन अपनी जान न्योछावर कर देता है, परंतु देश को आंच नहीं आने देता।
कश्मीर की जमा देने वाली ठंड में गिरती बर्फ में 24 घंटे बॉर्डर पर तैनात हो कर अपनी ड्यूटी निभाते हैं। देश के जवान बॉर्डर पर तैनात होते हैं, तब जाकर भारत में शांति और अमन का माहौल बना रहता है। देश के हर नागरिक के लिए त्यौहार होता है, परंतु आर्मी के जवानों के लिए उनकी ड्यूटी और धरती माता की रक्षा करना उनका कर्तव्य होता है।
भाई की प्रतिमा के साथ मनाती है रक्षाबंधन
रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) जैसे पवित्र त्योहार को मनाने के लिए एक बहन 800 किलोमीटर की यात्रा तय करके अपने शहीद भाई की कलाई पर राखी बांधने राजस्थान फतेहपुर (Fatehpur) से आती है। 17 वर्ष पहले शहीद धर्मवीर सिंह देश के लिए शहीद हो गए थे।
तब से आज तक शहीद धर्मवीर सिंह की बहन उषा प्रतिवर्ष अपने भाई की प्रतिमा को राखी बांधने के लिए 800 किलोमीटर की यात्रा करती हैं। एक बहन का अपने भाई के प्रति अटूट प्यार उन्हें इस कार्य को करने के लिए खींच लाता है।
उषा बताती है कि वह अपने भाई से बेहद प्रेम करती हैं आगे वह कहती है कि भले उनका भाई इस दुनिया से चला गया है, परंतु वह आज भी उनके दिलों में जिंदा है इसीलिए वह कभी भी अपने भाई की प्रतिमा को राखी बांधना नहीं भूलती।
अहमदाबाद से राजस्थान के दीनवा लाडखानी गांव तक की यात्रा तय करती हैं
जानकारी के अनुसार उषा कावर (Usha Kawar) अहमदाबाद में रहती है और उनका भाई धर्मवीर सिंह शेखावत राजस्थान राज्य के अंतर्गत आने वाला फतेहपुर जिले का दीनवा लड़खानी गांव में जन्मे थे। जिस वजह से उनकी प्रतिमा इसी गांव में स्थापित की गई है।
17 वर्ष पहले धर्मवीर सिंह भारत माता की सेवा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान कर गए थे। वह हमारे देश की शान हैं इसीलिए वह सभी के दिलों में जीवित हैं। उषा कंवर यही कहती है कि उनका भाई आज भी उनके दिलों में जिंदा है, इसीलिए वह जब तक जिंदा है, तब तक वह वहां जाकर अपने भाई की प्रतिमा को राखी बांध देंगे।
राखी बांधते हुए रो पड़ी उषा
बीते हुए रक्षाबंधन के त्यौहार में उषा अपने भाई की प्रतिमा को राखी बांधने गई थी, तब वहां राखी बांधते हुए रोने लग गई। वह कहती हैं कि भले ही दुनिया वालों के लिए उनका भाई अब इस दुनिया में नहीं है, परंतु वह आज भी उनके हृदय में जिंदा है और उन्हें मार्गदर्शन करता है। भावुक मन से वह कहती हैं कि उन्हें उनके भाई की बेहद याद आती है।
2005 में शहीद हुए थे धर्मवीर सिंह शेखावत
जानकारी के अनुसार शहीद धर्मवीर सिंह शेखावत (Dharamveer Singh Shekhawat) कश्मीर (Kashmir) के लाल चौक बॉर्डर पर अपनी सेवा दे रहे थे, उसी दौरान आतंकी हमला हुआ, जिसमें वह शहीद हो गए यह घटना वर्ष 2005 की है। दिनवा गांव ही नहीं बल्कि पूरे शेखावटी के जवानों का खून गर्म है।
इस दर्द की कल्पना भी नही की जा सकती 😢
कुछ ऐसा ही भावुक नजारा देखने को मिलता है सीकर #झुझुनूं बार्डर पर #फतेहपुर तहसील में स्थित गांव #दीनवा_लाडखानी में। रक्षाबंधन पर शहीद #धर्मवीर_सिंह_शेखावत की बहन #उषा_कंवर हर वर्ष #गुजरात से भाई की प्रतिमा को राखी बांधने के लिए आती है pic.twitter.com/j6EBXBzL7h
— Prajeet Sewda (@PrajeetSewda) August 11, 2019
उस इलाके के काफी सारे युवा देश की सेवा करते करते शहीद हुए हैं, आज भी उन युवाओं का स्टेच्यू उस गांव में बना हुआ है और प्रतिवर्ष उनकी बहने उस स्टेच्यू में राखी बांधती है और अपने भाई को हृदय में जीवित मानती हैं।
शहीद भाई को राखी बांधने हर साल 800 किमी दूर से आती है बहन, दिल छू लेगी कहानी#ATDigital #RakshaBandhan #Martyr pic.twitter.com/zUQg8TrLAB
— AajTak (@aajtak) August 12, 2022
इसी प्रकार देश की लाखों बहने अपने सीमा पर तैनात भाइयों के लिए डाक से राखियां भेजती हैं और उनकी सलामती की दुआ करती है। दिनवा लाडवानी गांव में शहीदों की तीन प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, उन प्रतिमा को देखकर आज के युवाओं का खून गर्म हो उठता है।



