
Chikhli, Maharashtra: इस दुनिया के बदलते रहन सहन यदि शुद्ध सीधी बात में कहुँ तो तौर तरीके बदलते देख खुशी भी होती है, कि लोग नए तरीके से ज़िन्दगी जीते है। कोई हर्ज़ नहीं है नयी ढंग से ज़िन्दगी जीने में, पर दुःख होता है जब इस नए तरीके कि ज़िन्दगी में लोग माँ बाप को भूल जाते है, अलग कर देते है।
उन सभी बुढे माँ बाप पूछ रहे है कि उनका कसूर क्या है, जो कि इस बुढ़ापे में उनको अलग कर दिया गया है, क्या उनका कसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने बच्चों को पाल पॉश के बड़ा किया उनको बचपन में हर चीज़ दी हर सुख दिय। किसी चीज़ कि कोई कमी न हो इसलिए खुद कि मेहनत के पैसे बचा के रखा ताकि बच्चों को भविष्ये में कोई कमी न हो।
माता-पिता अपने कई बच्चों को एक साथ रखते हैं और उनका पालन-पोषण करते हैं, लेकिन कई बच्चे अपने माता-पिता को रखने में असमर्थ होते हैं। पांच कलियुगी बेटों ने अपनी बुजुर्ग मां और 86 वर्षीय पिता को शहर के चखली चौक पर एक झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर किया।
उनके माता-पिता पिछले 15 सालों से एक झोपड़ी में रह रहे थे। पिता का नाम हीरालाल साहू है और उन्होंने बताया कि खरीदी गई जमीन पर उनके पांचों पुत्रों सुमन लाल, हुकुम साहू, प्रमोद साहू, उमाशंकर और कीर्तन साहू ने मिलकर एक मकान बनाया और विकलांग माता और बुजुर्ग पिता को बेटों ने किया घर से बेदखल, इस मामले में केवल हीरालाल साहू ने ऐसा कदम उठाया जो हर माता-पिता और बच्चों के लिए एक सबक है।
विकलांग माँ और बुजुर्ग बाप को बेटों ने किया घर से बेदखल
86 साल के हीरालाल पिछले 15 सालों से अपनी पत्नी के साथ झोपड़ी में रह रहे हैं। वह अक्सर अपने बेटों से उस घर में रखने की विनती करता था, लेकिन अब वह उन्हें बेटों के रूप में नहीं मानता था। विश्वास करना तो दूर, कोई बेटा बात करने को भी तैयार नहीं था और जैसे ही हीरालाल ने हिम्मत जुटाई, उसके सभी पांच बेटों के साथ चिखली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करवाया।
चिखली पुलिस ने वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2007 की धारा 24 के तहत सभी पांच बेटों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और कार्यवाही शुरू कर दी है। हीरालाल पहले सरकारी प्रेस के एक कर्मचारी थे और नौकरी के दौरान, उन्होंने यह सोचकर अपने नाम पर जमीन खरीदी कि वह भविष्य में बेटों और पोतों के साथ फिर से जीवन बिताएंगे।
इस जमीन पर, बेटों ने असहमति से घर का निर्माण किया और परिवार के बुजुर्ग माता-पिता को घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। कार्यवाही के बाद, हीरालाल अब अपनी जमीन पर बने घर में रह सकेंगे, जबकि पिछले 15 वर्षों से वह बेटों के कारण एक झोपड़ी में रह रहे थे।
बेटों को किए अरेस्ट
पुलिस की शिकायत के बाद उनके चारों बेटों को गिरफ्तार कर लिया गया है। हीरालाल का एक बेटा भोपाल में रहता है, जिसके कारण पुलिस नहीं पहुंच सकी, लेकिन बाकी बेटों को गिरफ्तार कर लिया गया और इस सब में महत्वपूर्ण बात यह है कि बेटों को भी अब जमानत मिल गई है। जमानत के बाद चारों बेटे अपनी मां को घर ले जाने के लिए तैयार हो गए।
हीरालाल ने बाढ़ पीड़ितों को दान दिया था
15 साल से झोपड़ी में रह रहे हीरालाल ने कई अच्छे काम भी किए हैं लेकिन उनका सबसे बड़ा दान कार्य तब हुआ जब उन्होंने केरल के बाढ़ पीड़ितों को 70 हजार रुपये दान किए। जिला प्रशासन के माध्यम से, उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान जुटाए गए धन को बाढ़ पीड़ितों को दान कर दिया।
माता-पिता इंसान की सबसे बड़ी संपत्ति हैं और उन्हें किसी भी परिस्थिति में खुश रखना चाहिए। इस, मामले पर प्रशासन ने कहा है कि बुजुर्गों को उनका कानूनी हक मिलेगा अधिकारियों ने ऐसी घटनाओं पर चिंता जताई है। साथ ही नौजवानों को नसीहत दी है कि माता-पिता हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हैं, इनका सम्मान करें।
आज के नौजवानो को सीख
इस खबर में, आज के युवाओं को कुछ सीखना चाहिए और इसके अलावा, ऐसे बुजुर्गों को सामने आने की अपील करते हुए, उन दंपत्ति को ये नसीहत दी गई कि अगर आप भी अपने बच्चों के सताए हुए हैं, तो उन्हें कानून के मुताबकि हक मिलेगा।



