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Kishanganj: भारत हो या कोई दूसरा देश, सभी जगह के लोग चाय जरूर पीते हैं। कई बड़े काम और डिसिशन चाय की चुस्की लेते हुए लिए जाते हैं। अगर किसी दिन चाय ना मिले, तो जीवन ही अधूरा सा लगने लगता है। ऐसे में चाय की खेती (Tea Production) और व्यापार पूरी दुनिया में किया जाता है। वैसे तो चाय की खेती पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे असम और मेघालय में बहुत की जाती है। परन्तु अब इस क्षेत्र में बिहार अपने पैर जमा लिया है।
बिहार के किशनगंज ने चाय उत्पादक राज्यों की श्रेणी में अपना नाम जमाते हुए बिहार का मान बढ़ाया है। इतना ही नहीं हजारों लोगों को टी-गार्डेन (Kishanganj Tea Ganden) से रोजगार का अवसर भी मिल रहा है। किशनगंज में साल 1990 के वक़्त चाय की खेती बड़े पैमाने होना शुरू हो गई थी। इसी को देखते हुए उस वक़त भी सीएम नीतीश कुमार ने किशनगंज की टी-सिटी (Tea City) बनाने की घोषणा की थी।
उस वक़्त यह घोषणा केवल नाम मात्र की ही रह गई। रिपोर्ट्स बताती है की किशनगंज को टी-सिटी का दर्जा देकर यही काम होता, तो यहां के चाय उत्पादक किसानों की माली हालत बेहतर होती और साथ ही अन्य किसानों का रुझान भी चाय की खेती की ओर बढ़ता। जिससे किशनगंज की एक अलग पहचान होती। कभी किशनगंज का हिस्सा रहा सोनापुर आज पश्चिम बंगाल राज्य का हिस्सा है और यहाँ चाय और अनानास उत्पादन में बहुत अच्छा काम होता है।
यहाँ की मिट्टी और मौसम चाय के उत्पादन के लिए अनुकूल
बिहार का किशनगंज चाय की खेती (Tea Farming) के उत्तम स्थान है। यहाँ की मिट्टी और मौसम चाय के उत्पादन के लिए बहुत सही है। किशनगंज में बिहार के अन्य जिलों की तुलना में अधिक बारिश होती है, जो चाय की खेती के लिए अति उत्तम मानी जाती है। इसकी वजह से जिले के ठाकुरगंज, पोठिया और किशनगंज प्रखंड में लगभग 40 हजार एकड़ में चाय की खेती हो रही है।
सबसे खास बात यह है कि चाय की खेती के कारण यहां के हजारों मजदूरों को चाय बगानों से रोजगार भी मिल रहा है। किशनगंज में बनी चाय दार्जलिंग जिले की चाय से ज़बरदस्त ठक्कर ले रही है। निजी टी प्रोसेसिंग प्लांट में बनी चाय बिहार के अन्य जिले सहित दूसरे प्रदेशों में भी खूब बिक रही है। इस चाय की भारी डिमांड बही रहती है। राजबाड़ी ब्रांड के नाम से बिक रही किशनगंज की चाय लोगों को पसंद आती है।
किशनगंज की चाय की बहुत मांग है
बंगाल की चाय बेल्ट से सटे किशनगंज में 50 से 60 हजार एकड़ में चाय का उत्पादन (Tea Production) होता है। चाय बनाने की यहाँ कई फैक्ट्रियां भी हैं। किशनगंज की चाय की राष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान है। अब भारत सरकार और बिहार सरकार ने साथ मिलकर किशनगंज की चाय उत्पादन को बढ़ाने में मदत की है और इनके लिए योजनाओ को आगे बढ़ाया जा रहा है।
kishanganj tea garden in Bihar pic.twitter.com/siyhraincD
— sanatanpath (@sanatanpath) December 17, 2021
साल 1990 में यहाँ 10 एकड़ में चाय की खेती शुरू की गई थी। अब यह चाय की खेती 25000 एकड़ में फ़ैल चुकी है। अब अधिक लोगो को योजगार मिल रहा है और बिहार का नाम असम और मेघालय से पहले लिया जाने लगा है। पहले यहाँ 3000 किलो चाय का उत्पादन हो रहा था और अब 75 लाख किलो चाय का उत्पादन होने से बिहार का दबदबा बन गया है। ऐसे में बिहार कुछ समय में आगे निकल सकता है।
आपको बता दें की बंगाल में हर साल 125 लाख किलो चाय का उत्पादन होता है। अभी सरकार चाय की खेती को बढ़ावा दे रही है और कुछ प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की भी बात चल रही है। अगर यह काम हो गया तो बिहार हर राज्य से आगे निकल जायेगा। इस बात की पूरी संभावना है।



