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Delhi: आज हम आपके दोस्ती की बात कर आ रहे हैं। आपके सबसे अच्छे दोस्त स्कूल-कॉलेज में ही बने होंगे। उसके बाद तो केवल काम की दोस्ती ही होती है। आपने साथ काम करने वाला आदमी आपका दोस्त कम और कॉम्पिटिटर या कलीग होता है। इसे दोस्ती नहीं कहते।
दोस्ती एक एहसास है, जो सालों साल दो दोस्तों के के दिल में भीतर होती है। आगे चलकर उस दोस्तों के बीच भला ही कितनी दूरी आ जाए और सरहदे खींच दी जाएँ। फिर भी वे कभी एक दूसरे से जुदा नहीं होते है, क्योंकि दोस्ती मन में जीवित रहती है।
हाल ही में एक ऐसी घटना घटी की आने वाले समय में वह मिसाल बन जाएगी। ऐसा ही कुछ करतारपुर के गुरुद्वारा दरबार साहिब (Gurudwara Darbar Sahib Kartarpur) में हुआ, जब में 74 साल पहले बिछड़े दोस्तों (Old Friends reunite at kartarpur) की मुलाकात हो गई। वह नज़ारा देखने लायक रहा।
जब हमारा देश अंग्रेजों की जुलाई से आजाद हो रहा था, तब 1947 में भारत के बटवारें के दौरान सरदार गोपाल सिंह (Sardar Gopal Singh) और उनके दोस्त मुहम्मद बशीर (Muhammad Bashir) एक दूसरे से अलग हो गए। उसकी सरहदे अलग अलग करके उन्हें अलग अलग देश का नागरिक बना दिया गया।
सरहदों के बनने के बाद भी उनकी बच्चपन की सच्ची दोस्ती में तनिक भी कमी नहीं आई। 74 साल बाद जब 94 साल के सरदार गोपाल सिंह और 91 साल के मुहम्मद बशीर की मुलाक़ात हुई, तो दोनों एक दूसरे को देखकर पहचान गए और फूट-फूटकर आंसू बहाने लगे।
Religion and pilgrimage aside for a moment… this is a heart-warming story from Kartarpur Sahib ❤️❤️
The Kartarpur Corridor reunited two nonagenarians friends, Sardar Gopal Singh (94) from India and Muhammad Bashir (91) from Pakistan. They had got separated in 1947. pic.twitter.com/VnKoxhKxLb
— Harjinder Singh Kukreja 🇺🇦 (@SinghLions) November 22, 2021
अब उनकी मिलान की तस्वीर सोशल मीडिया वायरल हो रही है और लोग दोनों की दोस्ती पर चर्चा कर रहे है। हाल ही में भारत से जब गोपाल सिंह करतारपुर साहिब (Kartarpur Sahib) का दर्शन करने पाकिस्तान पहुंचे। तो वहां उनकी मुलाकात अपने पुराने बिछड़े हुए दोस्त बशीर से हुई।
बटवारे के बाद से बशीर पाकिस्तान के नरोवाल शहर में रहते हैं। पाकिस्तान के न्यूज प्लेटफार्म डॉन के मुताबिक़ दोनों जब छोटे थे, तो साथ में करतारपुर साहिब दर्शन (Kartarpur Sahib Darshan) करने जाते थे और चाय-नाश्ता किया करते थे। फिर इस सिलसिले का एन्ड विभाजन के चलते हो गया।
India's Sardar Gopal Singh at age 94 and Muhammad Bashir age 91 from Pakistan reunited for the first time after Partition at Kartarpur 🥺🤍 pic.twitter.com/GGGrd9iWvw
— 𝘼𝙝𝙢𝙖𝙙 (@AhmadAadeez) November 23, 2021
ट्विटर पर दोनों की तस्वीर बहुत पसंद की जा रही है। धर्म और तीर्थ यात्रा से अलग दिल को छू लेने वाली ये कहानी करतारपुर साहिब की है। करतारपुर गलियारा हाल ही में फिर से ओपन किया गया था। उससे पहले करतारपुर साहिब गुरुद्वारे की तीर्थयात्रा पिछले साल मार्च में महामारी के कारन रूक दी गई थी।
Kartarpur Corridor reunited two Sardar Gopal Singh (94) from India and Muhammad Bashir (91) from Pakistan.
They bumped into each other and were reunited, accidentally. 7 decades after getting separated during the Partition in 1947.
— Saral Patel (@SaralPatel) November 24, 2021
सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की जयंती पर दोनों देशों के बीच 3 दिन के लिए करतारपुर गलियारा खोला गया था। इसके लिए वीजा की जरूरत नहीं पढ़ती है। करतारपुर गलियारा, पाकिस्तान में गुरुद्वारा दरबार साहिब को गुरदासपुर जिला स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोड़ता है। सिख धर्म में इस स्थान की बहुत अहमियत है और इसी धार्मिक भावनाओं के चलते Kartarpur Corridor को शुरू किया गया था।



