
Chennai: हर इंसान की कहानी संघर्ष (Struggle Story) के अलग-अलग पायदान को बयां कर प्रेरित करती है। कामयाब हुए हर अभ्यर्थियों का तजुर्बा कुछ न कुछ नया सिखाता है। बहुत से अभ्यर्थी अपना सपना पूरा करने के लिए सालों तैयारी करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो पहले ही प्रयास में और बेहद कम आयु में यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं। इन्हीं होनहारों में से जय गणेश एक हैं।
एक छोटे से होटल में जय गणेश (Jai Ganesh) कस्टमर्स को खाना परोसने का काम करते थे। वेटर से IAS बनने वाले जय गणेश की कहानी (Jai Ganesh IAS Story) काफी प्रेरणा से भरी है। जय गणेश बचपन से ही प्रतिभावान थे। उन्होंने 8वीं तक अपने गांव के ही स्कूल में पढ़ाई की और 10वीं करने के बाद, एक पॉलिटेक्निक कॉलेज में एडमिशन लिया।
आसमान में सुराख क्यों नहीं हो सकता। एक पत्थर तो तबियत से ऊपर उछालो दोस्तो। दुष्यंत कुमार की लिखी इन लाइनों को आपने बहुत बार सुना होगा। लेकिन आज हम एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बात। जिसने इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिया।
कौन है जयगणेश
जयगणेश (Jayaganesh) का जन्म तमिलनाडु (Tamilnadu) के उत्तरीय अम्बर के पास एक गांव के एक गरीब परिवार में हुआ। उनके पिताजी एक फैक्ट्री में कार्य करके किसी परिवार का गुज़ारा चलाते थे। तमिलनाडु के रहने वाले के जय गणेश (Jai Ganesh From Tamilnadu) उन्होंने छह बार सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) दी और फेल भी हुए, लेकिन कभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी।
उनकी सातवीं परीक्षा ही उनकी एक ओर आखिरी उम्मीद थी। परन्तु इस बार किस्मत के सिक्के ने काम किया। वह 156वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण हुए और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए सेलेक्ट हुए। जयगणेश का जन्म तमिलनाडु के उत्तरीय अम्बर के पास एक छोटे से गांव के एक गरीब परिवार में हुआ था।
उनके पिता एक फैक्ट्री में कार्य करके किसी तरह परिवार का गुज़ारा चलाते थे। जय गणेश हमेशा ही अपने गांव के लोगों की दयनीय स्थिति के बारे में बात करते रहते थे। उनके गाँव के लोग बहुत गरीब थे और वह अपने गाँव के लोगों की मदद करना चाहते थे।
2500 रुपये मिली पहली सैलरी
जय गणेश (IAS Jayaganesh) बचपन से ही बहुत प्रतिभावान थे। उन्होंने 8वीं तक अपने गांव के स्कूल में पढ़ाई की। 10वीं करने के बाद, एक पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला लिया। वहां उन्हें बताया गया था कि जैसे ही वे पास होंगे उनके हाथ में एक नौकरी लग जाएगी।
वहां उन्होंने 91 फीसदी अंकों के साथ परीक्षा पास किया थे। इसके बाद उन्होंने तांथी पेरियार इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की। पढ़ाई पूरी होने के बाद एक कंपनी में नौकरी भी आराम से लग गई, जहां उन्हें 2500 रुपये महीने वेतन मिलता था।
जय गणेश को यह एहसास हुआ कि इस वेतन में अपना परिवार चला पाना मुश्किल है। वहीं दूसरी ओर उनके मन में आईएएस बनने का सपना भी था इसलिए उन्होंने 2500 रुपये की नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की पढ़ाई शुरू कर दी।
असफलता से नही हारे
जय गणेश ने यह रास्ता चुन तो लिया था। इस सफर को तय कर पाना बहुत मुश्किल था। वह छह बार यूपीएससी की परीक्षा में असफल हुए। साथ ही, उनके सामने एक आर्थिक संकट भी एकदम से खड़ा हो गया था। जय गणेश ने कभी भी हार नहीं मानी।
उन्होंने एक होटल में वेटर (Waiter in Hotel) का काम शुरू कर दिया। काम से लौटने के बाद जितना भी समय मिलता, उसमें वह केवल अपनी पढ़ाई करते थे। जय गणेश यूपीएससी की परीक्षा में तो सफल नहीं हुए थे, लेकिन इसी बीच उनका चयन इंटेलीजेंस ब्यूरो की परीक्षा (IB Exam) में हो गया था।
उनके लिए यह तय कर पाना बहुत मुश्किल था कि वह अपने संघर्ष को विराम देकर नौकरी को चुने या फिर सातवीं बार यूपीएससी की परीक्षा (7th Time UPSC Exam) दें। आखिरकार उन्होंने यूपीएससी को चुना और इस बार उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने इस परीक्षा में 156वीं रैंक हासिल की। खुद पर विश्वास और निरंतर मेहनत ही उनकी सफलता (Success) का कारण बना।



