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Delhi: देश की एक बेटी, बहु, प्रोफेसर, दुल्हन, वीर नारी और अब वह इंडियन आर्मी (Indian Army) में ऑफिसर बनने जा रही है। ये सब कुछ करुणा सिंह चौहान ने बीते 21 महीनों में देखा है। नेवी में लेफ्टिनेंट धर्मेंद्र सिंह चौहान से करुणा की शादी 12 अप्रैल 2019 को हुई थी। करुणा चौहान तब आगरा एक कॉलेज में प्रोफेसर थीं।
दुल्हन बने एक महीने ही हुए थे कि 26 अप्रैल को एक किस्मत बदलने वाली खबर आई है कि पति INS विक्रमादित्य (INS Vikramaditya) पर आग बुझाते हुए वीरगति को प्राप्त। ये खबर सुन करुणा का सब कुछ बिखर गया था। उसकी जिंदगी मानो उजाड़ गई हो।
शहीद लेफ्टिनेंट धर्मेंद्र सिंह चौहान का परिवार एमपी के रतलाम में रहता है। वह माता-पिता के इकलौते संतान थे। शादी से कुछ दिन पहले ही शहर में नए भवन का निर्माण करवाया था। जहां अब मां टमा कुंवर रहती हैं। शहीद धर्मेंद्र सिंह चौहान का शव जब घर पहुंचा था, तब मां कहती थी कि बहुत समझदार है मेरा बेटा। वो देश का रियल हीरो था।
धर्मेंद्र की सास ने मां को बेटे के चोटिल होने की खबर दी थी। धर्मेन्द्र भारतीय नौ-सेना में लेफ्टिनेंट कमांडेंट थे और बैंगलुरु के करवार के पास युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात थे। करुणा सिर्फ 40 दिन ही अपने पति के साथ खुशी पल गुजार पाई थी। उसके बाद धर्मेन्द्र अपनी ड्यूटी पर लौट गए लेकिन ड्यूटी जॉइन करते ही अप्रैल में जंगपोत आईएनएस विक्रमादित्य के एक कम्पार्टमेंट में आग लग गई।
उस पर काबू पाने के दौरान लेफ्टिनेंट कमांडेंट धर्मेंद्र सिंह चौहान (Navy Officer Dharmendra Singh Chouhan) वीरगति को प्राप्त हो गए। लेकिन वीरगति को प्राप्त होने से पहले उन्होंने जंगपोत पर तैनात अपने कई साथियों की जान बचा ली थी। यह खबर सुनकर उन्हें होश ही नहीं रहा था, लेकिन अब उन्होंने वह सब हासिल कर लिया है, जो एक महिला को चाहिए।
वीरगति को प्राप्त धर्मेंद्र को लोगो ने नारे के साथ सम्मान दिया
वीरगति को प्राप्त भाइयों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे कुर्बान होने वालों का बाकी यही निशां होगा। देश के वीर भाइयो को नमन।खून से खेलेंगे होली अगर वतन मुश्किल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। अपनी आज़ादी को हम हरगिज भुला सकते नहीं, सर झुका सकते नहीं। देश के वीर को नमन।
सैकड़ो परिंदे आसमान पर आज नज़र आने लगे, वीरगति ने दिखाई है राह उन्हें आजादी से उड़ने की। देश के वीर जवान को नमन। वतन की मोहब्बत में खुद को तपाये बैठे है, प्राण न्योछावर वतन के लिए अपने से शर्त लगाये बैठे हैं। देश के वीर जवानों को नमन।
आईएनएस विक्रमादित्य पर लगी आग रोकने के दौरान शहीद हुए |धर्मेंद्र सिंह चौहान जी को
आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया |
ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणो में स्थान व परिजनो को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे। pic.twitter.com/cs37L9hSXx— Dr. Vijayalaxmi Sadho (@Drvijyalakshmi) April 28, 2019
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक करुणा (Karuna Singh Chouhan) ने बताया कि शादी के 40 दिन बाद पति के वीरगति होने की खबर ने पूरी तरह तोड़ दिया था। एक समय ऐसा लगा कि सबकुछ उजड़ गया हो है। जिस वक्त यह घटना हुई, उस समय मैं अपने ससुराल रतलाम में थी।
लेकिन सास टीना कुंवर चौहान और मां कृष्णा सिंह के शब्दों ने मेरी भावना को फिर से जगा दिया, मेरे होसलो को तुड़ने नही दिया और मेने फिर एक बार अपने होसलो को मजबूत बना लिया और तैयारियों में जुट गई। करुणा ने कहा कि ग्रुप कैप्टन इरफान खान ने मुझे सेना में सम्मलित होने के लिए सबसे पहले प्रेरित किया।
वह रतलाम में जिला सैनिक कल्याण संगठन के प्रमुख हैं। उनसे प्रेरित होकर इंदौर में करीबी पारिवारिक मित्र रिटायर्ड कर्नल निखिल दीवान के पास गई, जिनके मार्गदर्शन में SSB इंटरव्यू के लिए तैयारी स्टार्ट कर दी। वीरगति को प्राप्त धर्मेंद्र सिंह की मां टीना कुंवर चौहान रतलाम में ही रहती हैं।
VIDEO : आईएनएस विक्रमादित्य में लगी आग को बुझाने में शहीद लेफ्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान का पार्थिव शरीर पहुंचा #रतलाम #INSVikramaditya pic.twitter.com/UYQwcCyzRZ
— News18 MadhyaPradesh (@News18MP) April 27, 2019
बहू करुणा के भारतीय सेना में ऑफिसर बनने की खबर मिलने के बाद टीना कुंवर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनका कहना है कि बेटे के बाद अब बहू देश की सेवा करने जा रही है, उन्हें गर्व और खुशी है कि अब उनके एक बेटा नही बल्कि 2 बेटे है जो देश की सेवा में है।
करुणा ने बताया कि “मुझे अपने पति की शहादत पर फक्र है। मैं फौजी वर्दी पहनकर अनुभव करना चाहती हूं कि इस वर्दी में आखिर ऐसा क्या है जो मेरे पति जैसे सैनिकों में देश के लिए जान तक कुर्बान करने का जज्बा जगा देता है?” खाद्य विषय में एम टेक की डिग्री हासिल करने वाली 30 वर्षीय महिला ने बताया कि उन्होंने आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में सहायक प्रोफेसर की नौकरी से शनिवार को त्यागपत्र दे दिया है और अब वह बतौर सैन्य अधिकारी अपनी अगली पारी के लिए एकदम तैयार हैं।



