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Delhi: भारत का अपने पड़ोसी देश के साथ हमेशा से ही विवाद चलता आया है। चीन हो या फिर पाकिस्तान दोनों ही देशों के साथ सीमा पर संघर्ष चलता रहता है। अभी के समय में हर देश अपनी शक्तियों को बढ़ाने में लगा है। क्योंकि बिना रक्षा क्षमताओ को बढ़ाये इस दुनिया में टिके रहना बहुत ही मुश्किल है। रूस और यूक्रेन का युद्ध अभी तक खत्म नहीं हुआ है। यह युद्ध हमें यह सिखाता है, कि अगर हमारे पास रक्षा क्षमताऍं अधिक हो तो किसी भी महाशक्ति के आगे खड़ा रहा जा सकता है।
ब्रम्होस एयरोस्पेस अब बनाएगी हाइपसोनिक मिसाइल
भारत भी अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में लगा है। ब्रम्होस एयरोस्पेस (BrahMos Aerospace) भारत और रूस की ज्वाइंट वेंचर है। अभी हाल ही में इस डिफैंस ज्वाइंट वेंचर ने यह दावा किया है, कि अब वह हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) बना पाने में सक्षम हो चुका है।
ब्रम्होस एयरोस्पेस के इस दावे से यह साफ होता है, कि अब भारत के पास भी आज से लगभग 5 साल के बाद में खुद की हाइपरसोनिक मिसाइल रहेगी। जिससे हमारे देश की रक्षा क्षमता में और भी बढ़ोत्तरी होगी।
ब्रम्होस एयरोस्पेस के एमडी अतुल राणे ने दी जानकारी
हमारा देश भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के आज 75 साल बीत चुके है। इन 75 सालों के पूरे होने पर भारत रूस ज्वाइंट वेंचर एयरोस्पेस बम्होस ने 2022-23 के लिए सिल्वर जुबली ईयर को प्रारंभ किया है।
इस सिल्वर जुबली ईयर के समारोह पर ज्वाईट वेंचर बम्होस के एमडी और सीईओ मिस्टर अतुल राणे (Atul Rane) ने जानकारी देते हुए बताया, कि ब्रम्होस एयरोस्पेस अब हारपरसोनिक मिसाइल को बनाने में पूरी तरह केपेबल हो चुका है।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि आज से लगभग 5 साल के बाद में हम अपने देश भारत की खुद की हाइपरसोनिक मिसाइल तैयार कर लेंगे। उन्होंने बताया कि ब्रम्होस प्रोजेक्ट अभी बहुत ही अच्छा चल रहा है। उसने अभी दुनिया के बेहतरीन शक्तिशाली तथा तेज चलने वाले आधुनिक हथि-यार ब्रम्होस का प्रोडक्शन किया है। जिसकी पहचान पूरे दुनिया में है।
हर साल 80 से 100 ब्रम्होस सिस्टक का होगा प्रोडक्शन
देश की आजादी के सिल्वर जुबली वर्ष का फंक्शन 2023 में 12 फरवरी को ब्रम्होस दिवस के दिन खत्म होगा। इस पर्व के अंतर्गत कई बैठके, राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न आयोजन और प्रमुख कार्यक्रम होंगे। इसी मिशन के अंतर्गत ब्रम्होस एयरोस्पेस को राज्य यूपी में नए मैन्यूफेक्चरिंग सेंटर को स्थापित करने के लिए 80 हेक्टेयर की भूमि प्रदान की गई है। जो कि उन्हें 300 करोड़ के प्रारंभिक निवेश पर मिली है।
इस सेंटर के शुरू हो जाने के बाद में यह यूनिट 80 से लेकर 100 ब्रम्होस सिस्टम का प्रोडक्शन हर वर्ष करेगी। इस यूनिट की योजना है, कि 2024 तक नई सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सभी मेन्यूफेक्चरिंग से संबंधित कार्य को पूरा करें।
हाइपरसोनिक मिसाइल की खासियत
हाइपरसोनिक मिसाइल की बात की जाये तो यह बहुत ही तेजी से उड़ान भरता है। हापरसोनिक मिसाइल सामान्य हथियार की श्रेणी में नहीं आते है। हापरसोनिक मिसाइल की उड़ान 5 मैक से भी ज्यादा की होती है। अगर सामान्य तौर पर कहे तो हाइपरसोनिक मिसाइल साउंड की स्पीड से भी 5 गुना ज्यादा तेज गति से दुश्मनों पर हमला करने में सक्षम होता है। ध्वनि की स्पीड वायु में 332 मीटर पर सेकेंड होती है।
India will have its first hypersonic missile in five-six years: BrahMos Aerospace CEO
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— ANI Digital (@ani_digital) June 13, 2022
अभी की बात की जाये तो बम्होस मिसाइल चीन, रूस और अमेरिका जैसे विकसित देश के पास में काफी उन्नत चरण पर है। अगर बात की जाये भारत, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रलिया और फ्रांस देश की तो अभी यह देश इसे विकसित कर रहे है। इसके हमारी सेना मे शामिल हो जाने से हमारी शक्ति कई गुना बढ़ेगी, इसमें कोई शक नहीं है। हमारे पास भी खुद का हारपरसोनिक मिसाइल हो यह देश के हर एक भारतीय के लिए गर्व की बात है।



