टाट पर बैठकर पढ़ाई, माता-पिता के अपमान ने बना दिया IPS, संस्कृत भाषा से UPSC क्रैक की गुप्तेश्वर पांडेय ने

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Gupteshwar Pandey Bihar Police
Gupteshwar Pandey, the twice unlucky Bihar super cop story. Ex Bihar Police Chief GDP Gupteshwar Pandey Full Story and how he turns to religious. Gupteshwar Pandey Bihar DGP Biography in Hindi.

File Photo

Patna: लोग कहते हैं खुली आँखों से सपने नहीं देखना चाहिए, लेकिन अगर खुली आँखों से सपने देखने के साथ-साथ उसे पूरा करने में रात दिन जुट जाएँ, तो सपने साकार भी हो जाते हैं। आज की कहानी भी एक ऐसे ही व्यक्ति की है, जिसने बहुत सी मुस्किले झेली पर वो टुटा नहीं और एक नयी सीख दी की अगर आपके हाथ में कोई अच्छा हुनर हो जो आपको और लोगो से अलग बनाये तो आप कही भी रहते हुए भी किसी भी परस्तिथी में सफलता हासिल कर सकते है।

अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर ट्रेड बन चुके पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय इन दिनों प्रशासनिक सेवा से हटके आस्था में लीन होते दिख रहे थे। सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थी। बता दें गुप्तेश्वर पांडेय (Gupteshwar Pandey) का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है, क्योंकि वो अक्सर लाइमलाइट में रहे हैं और अपने कामकाज के सख्त तरीके हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। इन दिनों अपने नए अवतार को लेकर सुर्खियों में छाए हुए थे।

कौन है गुप्तेश्वर पांडे(Who Is Gupteshwar Pandey)

गुप्तेश्वर पांडे का जन्म 1961 में बक्सर जिले के गेरूबांध गांव में हुआ था। उनका गांव बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से दूर था। इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। वह पहले संस्कृत भाषा में यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) के लिए उपस्थित हुए थे और उन्हें भारतीय राजस्व सेवा आयकर आवंटित किया गया था, जिसके बाद वे यूपीएससी के लिए फिर से उपस्थित हुए और 1987 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए और उन्हें बिहार कैडर आवंटित किया गया।

गुप्तेश्वर पांडे एक सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं। उन्होंने बिहार के पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्य किया। मार्च, 2009 को गुप्तेश्वर पांडे (Gupteshwar Pandey) ने पुलिस सेवा से रिटायरमेंट लेकर सभी को हैरान कर दिया था। हालांकि ठीक 9 महीने बाद वह पुलिस सेवा में फिर से शामिल हो गए थे। उन्होंने अपना सेवा कार्यकाल (28 फरवरी 2021) पूरा होने से पांच महीने पहले 22 सितंबर 2020 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है।

भारतीय पुलिस सेवा में कार्य

उन्होंने बिहार के कई प्रमुख जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में कार्य किया। तिरहुत संभाग मुजफ्फरपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने अप-राध पर अंकुश लगाने और पुलिस को लोगों के अनुकूल बनाने के लिए कई पहल शुरू कीं। नवंबर 2015 में बिहार सरकार (Bihar Government) ने श-राब पर प्रतिबंध लगा दिया था। गुप्तेश्वर पांडे ने पूरे बिहार का दौरा किया और श-राबबंदी के लिए अभियान चलाया। महिलाओं ने इस अभियान का काफी हद तक समर्थन किया।

राजनीतिक सफर

पांडे ने पहले 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले वीआरएस के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें बक्सर निर्वाचन क्षेत्र से टिकट नहीं दिया गया था, बाद में उन्होंने अपना वीआरएस आवेदन वापस ले लिया। पांडे 27 सितंबर 2020 को पटना में पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हुए।

जूट की टाट पर बैठकर पढ़ाई की

1961 में जन्में डीजीपी पांडेय ने शुरुआती शिक्षा अपने गांव से ही हासिल की है। उस वक्त वहां आम जरूरतों को पूरा करने की सुविधाएं भी नाममात्र थीं। गांव में शिक्षा के संसाधनों की कमी थी। पर्याप्त मात्रा में शिक्षा के संसाधन नही थे। पढ़ाई करने के लिए स्टूडेंट्स को दूसरे गांव जाना पड़ता था।

ऐसे में अच्छे स्कूल, अस्पतालों के बारे में सोचना सबसे परे था, लेकिन फिर भी गुप्तेश्वर पांडेय ने सारी मुश्किलों को पार कर दूसरे गांव के विद्यालय में पढ़कर शिक्षा ग्रहण की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्कूल के शिक्षक जहां चारपाई पर बैठते थे, वहीं शिष्य बोरा या जूट की टाट पर बैठकर पढ़ाई करते थे। पढ़ने का माध्यम भी ठेठ भोजपुरी था।

स्कूल में हो चुके फेल

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो ग्यारहवीं कक्षा में फेल हो गए थे, इसके बावजूद भी वो अधिकारी बने। वो कहते हैं कि पढ़ाई के दौरान उनकी गिनती औसत से भी कमजोर छात्रों की श्रेणी में होती थी। डीजीपी पांडेय के अनुसार फिजिक्स, केमेस्ट्री जैसे कठिन विषयों में वो कमजोर थे। साथ ही, उन्होंने ये भी बताया कि छठी कक्षा तक उन्हें अंग्रेजी के अक्षरों का भी ज्ञान नहीं था। फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर UPSC जैसी कठिन परीक्षा को पास किया।

सुर्खियों से खास नाता

खासकर उनके बयान अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं। 1987 बैच के IPS अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय इससे पहले मुजफ्फरपुर के जोनल आईजी (IG) भी रहे हैं। उन्होंने 31 वर्षों तक पुलिस विभाग को अपनी सेवाएँ दीं है। एसपी, रेंज डीआईजी, एडीजी मुख्यालय और डीजी बीएमपी सहित कई पदों पर उन्होंने अपनी सेवाएँ दी हैं। हालांकि, 2019 में उन्हें बिहार के डीजीपी का कार्यभार सौंपा गया था।

उन्होंने एएसपी, एसपी, एसएसपी, आईजी, आईजी और एडीजी के तौर पर बिहार के 26 जिलों में अपनी सेवाएं दी हैं। गुप्तेश्वर पांडेय ने 2009 में बक्सर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस लिया, लेकिन टिकट मिला नहीं तो वापस सेवा में आने की अर्जी दी। इसे 9 महीने बाद नीतीश सरकार ने मंजूर कर लिया था। इसके बाद 2020 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने दोबारा वीआरएस ली लेकिन इस बार भी उनके हाथ निराशा लगी।

भागवत गीता का प्रसारण कर बटोरी सुर्खियां

बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (Bihar Former DGP Gupteshwar Pandey) एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। इस बार वह अपने कथावाचक अवतार को लेकर खबरों में हैं। दरअसल बिहार की सड़कों पर एक बैनर लगाया गया है। इस बैनर के माध्यम से गुप्तेश्वर पांडेय श्रीमद भागवत वचन अमृत (Shree Madbhagwat katha) की जानकारी दे रहे हैं। बैनर में एक तरफ राधा-कृष्ण की फोटो तो वहीं दूसरी तरफ गुप्तेश्वर पांडेय की फोटो लगी हुई है।

कथा का प्रसारण ऑनलाइन तरीके से किया गया था। बैनर में जूम आईडी और पासवर्ड भी छापा गया था। कथा सुनने के इच्छुक लोग आईडी और पासवर्ड से Login करके कथा का आनंद लिया था। गुप्तेश्वर पांडेय सुशांत सिंह राजपूत केस (Sushant Singh Case) से सुर्खियों में आए थे। उससे पहले भी उन्होंने अपनी नौकरी से वीआरएस (VRS) ले लिया था। 27 सितंबर 2020 को उन्होंने जेडीयू (JDU) का दामन थाम कर सभी के चौका दिया था। हालांकि उन्हें जेडीयू ने चुनाव का टिकट नहीं दिया था। अब वह कथावाचक बन कर आगे बढ़ रहे है।

सख्त ऑफिसर के रूप में होती है, पहचान

2015 में शराबबंदी के फैसले के बाद चले कैंपेन के दौरान गुप्तेश्वर पांडेय जगह-जगह मुआयना करने गए थे। कई नक्सल इलाकों में पोस्टिंग के दौरान किए गए कार्यों को लेकर आज भी गुप्तेश्वर पांडे को वहां याद किया जाता है। अलग-अलग जिलों में हालातों को सुधारने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना हर कोई करता है। किसी भी तनाव की परिस्थिति को संभालने में भी इनका कोई जवाब नहीं है।

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