
Bhopal: मातृभाषा को बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह की व्यवस्थाएं हो रही है, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश की मातृभाषा हिंदी का महत्व अधिक बढ़ाने के लिए एमबीबीएस के छात्रों से अपील की कि वह मरीजों के लिए पर्चियां हिंदी में लिखें जिससे वे समझ सके और अन्य लोगों को प्रेरणा मिले। उनका कहना है कि अंग्रेजी की वजह हिंदी में छात्रों की पढ़ाई को कराएं जिससे हमारे देश की भाषा को बढ़ावा मिले।
इसी बात से प्रेरित होकर एक डॉक्टर जिनका नाम सर्वेश सिंह है, उन्होंने हिंदी से पर्ची लिखने (Prescription In Hindi) की शुरुआत की। उनकी शुरुआत ने एक नया ही स्वरूप लिया है, जिसमें लोग बेहद खुश और अपनी मातृभाषा के लिए समर्पित नजर आ रहे हैं। आइए आगे के लेख में जानेंगे कि वह किस तरह हिंदी भाषा के लिए प्रेरित हुए।
कौन है डॉक्टर सर्वेश सिंह
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) राज्य के अंतर्गत आने वाला एक जिला सतना (Satna) का एक गांव कोटर जहां पर डॉक्टर सर्वेश सिंह पोस्टेड है। आपको बता दें डॉक्टर सर्वेश ही कोटर ब्लॉक के नवनिर्मित स्वास्थ्य केंद्र के पहले डॉक्टर बने।
इसके बाद डॉक्टर सर्वेश ने हिंदी से पर्ची लिखने की शुरुआत भी की उन्होंने आरएक्स की जगह श्रीहरि लिखकर दवाइयां लिखी वह हमारे देश की मातृभाषा को लेकर चलना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने इसकी शुरुआत की। वे बताते हैं कि जब उनके पास मरीज आया, तो उन्होंने उसकी जांच की और उसकी समस्या का निदान पर्ची पर हिंदी से लिखा इसके साथ ही दवाइयों के नाम भी हिंदी भाषा में लिखे गए।
आपको बता दें कि बीते दिनों ही हिंदी भाषा का महत्व बढ़ाने के लिए एमबीबीएस के विद्यार्थियों को हिंदी में ही शिक्षा दी जाएगी और गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा मेडिकल की 3 किताबों से स्टूडेंट को मुक्त कराया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा भी डॉक्टरों के लिए यह बात रखी गई थी वह पर्चियों को हिंदी में लिखकर दें यहीं से डॉक्टर सर्वेश अपनी पर्चियों में हिंदी भाषा का उपयोग शुरू किया।
हिंदी में पर्ची लिखने वाले पहले डॉक्टर हैं सर्वेश सिंह
सतना के डॉक्टर सर्वेश सिंह जाने माने और बेहतरीन डॉक्टर हैं बे पिछले कुछ वर्षों से सतना जिले के अंतर्गत आने वाला कोटर पीएचसी में अपनी सेवा दे रहे हैं। बीते दिन कोटर पीएचसी के एक गांव लोलाछ की रहने वाली एक महिला जिसका नाम रश्मि सिंह है, अपना इलाज कराने के लिए डॉक्टर सर्वेश सिंह के पास पहुंची।
उन्होंने ही बताया कि डॉक्टर सर्वेश सिंह ने रश्मि सिंह की जांच करने के बाद उनकी सेहत से जुड़ी तमाम जानकारियां और दवाइया हिंदी में पर्ची में लिखी। पर्ची की शुरुआत में पहले आरएक्स के स्थान पर श्री हरि लिखा और उसके नीचे बीपी शुगर पल्स रेट आदि हिंदी में लिखकर प्रिस्क्रिप्शन के तौर पर दवाइयां लिखीं।
डॉक्टर सिंह इस हिंदी पर्ची लेखन की शुरुआत ना केबल सरकारी अस्पताल में बल्कि अपनी निजी क्लीनिक में भी कर रहे हैं। निजी क्लीनिक में आई एक महिला मरीज जिनका नाम सुरेखा शर्मा है ने भी इस बात की पुष्टि की है।
सीएम शिवराज सिंह चौहान की बात डॉक्टर सिंह को भा गई
इंटरव्यू के दौरान डॉ सर्वेश सिंह (Doctor Sarvesh Singh) ने बताया कि टीवी में शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) का भाषण चल रहा था उस भाषण के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने अपने वचनों के माध्यम से देशवासियों को संदेश दिया कि हम हिंदुओं के लिए हिंदी भाषा कितनी महत्वपूर्ण है।
मेडिकल में हिंदी भाषा में पढ़ाई कराई जाने की शुरुआत में उन्हें और ज्यादा प्रेरित किया वे बताते हैं कि सीएम का कहना था कि आरएक्स (RX) के स्थान पर यदि श्रीहरि (Shrihari) लिखा जाए और उसके बाद अंग्रेजी में दवाइयां लिखने की वजह हिंदी में दवाइयां लिखी जाए, तो उसमें बुराई क्या है।
उनकी यह बात डॉ सर्वेश सिंह को बहुत अच्छी लगी और इस अभियान के तहत उन्होंने अपने इस नेक काम की शुरुआत की। उनके पास आई मरीज रश्मि सिंह एक गर्भवती महिला है, इसलिए उन्होंने पर्ची पर मातृ भाषा का उपयोग कर उन्हें सभी चीजों के बारे में अच्छे से समझाइश दी।
हिंदी मीडियम के छात्रों की हो रही हौसला अफजाई
डॉ सिंह ने हिंदी में पर्ची लेखन के फायदे बताते हुए कहा कि हिंदी में लिखी हुई परची मरीजों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होने वाली है, क्योंकि हिंदी में लिखी हुई परची की रिपोर्ट और दवाइयां मरीज भी पढ़ सकेगा, उसकी जानकारी प्राप्त कर सकेगा।
प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @ChouhanShivraj द्वारा #MP_में_हिंदी_में_MBBS की पढ़ाई कराने की निर्णय के बाद #सतना में एक चिकित्सक ने किया अमल। मरीजों को हिंदी में दवाई लिखना किया शुरू। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोटर में चिकित्सा अधिकारी हैं डॉ सर्वेश सिंह। pic.twitter.com/aX6Ddr1Vrx
— Chetan Tiwari (@Chetantiwaribjp) October 16, 2022
इसके साथ ही हिंदी मीडियम के छात्र जो डॉक्टर बनने की इच्छा रखते हैं, परंतु अंग्रेजी मैं कमजोर होने के कारण अपना लक्ष्य बदल देते हैं या फिर अच्छी तरह पढ़ाई नहीं कर पाते उनके लिए यह मौका बहुत ही फायदेमंद होने वाला है।



