चिनाब ब्रिज भारतीय इंजीनियरिंग की मिसाल, रेलवे ने इस तरह एफिल टावर से भी ऊंचा पुल बना दिया

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Chenab Rail Bridge
Chenab Rail Bridge is a steel and concrete arch bridge between Bakkal and Kauri and just 42 km in Jammu Kashmir likely to be ready soon.

Jammu: आज की खबर जहां एक ओर भारतीय इंजीनियरिंग कोई मिसाल कायम कर रहा वहीं दूसरी ओर हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि इंडियन रेलवे ने एफिल टावर जिसकी ऊंचाई लगभग 330 मीटर है उससे भी कहीं ऊंचे 359 मीटर वाले चिनाब ब्रिज (Chenab Rail Bridge) का निर्माण लगभग पूर्ण कर लिया है, इसे आर्क ब्रिज भी कहा जाता है और यह लगभग 1.35 किलोमीटर लंबा है।

एक समय था दोस्तों जब किसी भी अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डिंग या पुल की बात की जाती थी सड़कों की बात की जाती थी, तो सिर्फ विदेशों के ही उदाहरण दिए जाते थे, जबकि आज भारत में ही एक से बढ़कर एक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं, जिस वजह से आने वाले समय में दुनिया भारत का एग्जांपल देगी। आज हम इसी के विषय में आपको जानकारी देने वाले हैं, आखरी तक इस खबर को जरूर पढ़ें बहुत ही रोचक और आपको भारतीय होने पे गर्व होगा।

जम्मू को भारत देश के समस्त रेलवे नेटवर्क से जोड़ देगा यह चिनाब ब्रिज

जैसा कि हम सब जानते हैं पूरे भारत देश में रेलवे का एक जबरदस्त जाल फैला है परंतु श्रीनगर एक ऐसा राज्य है जहां बड़ी-बड़ी पहाड़ियां और वादियों के बीच से रेलवे ट्रैक बनाना किसी अजूबे या चैलेंज से कम नहीं था, परंतु रेलवे ने भी कमर कस ली और यह ठान लिया कि अब रेलवे को वहां तक पहुंचाना है, इसलिए श्रीनगर को भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ने के लिए यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया जो कि उधमपुर बारामुला एवं श्रीनगर लिंक के तहत तैयार किया जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ा चैलेंज था, वह दो पहाड़ियों के बीच का अंतर जो लगभग 1.3 किलोमीटर के करीब है और यहीं पर प्लान किया गया चिनाब ब्रिज का जोकि आज एक मिसाल बन गया है, यह ब्रिज उधमपुर कटरा एवं काजीगुंड को जम्मू से जुड़ेगा।

आइए जानते हैं 28000 करोड़ के ब्रिज की कुछ खास बातें

जानकारी के अनुसार जब इस ब्रिज का ब्लू प्रिंट तैयार किया गया तो सबसे ज्यादा चैलेंज थे, वहां के खतरनाक मौसम एवं प्राकृतिक आपदा के क्योंकि पहाड़ों से घिरा यह क्षेत्र आधे समय तो बर्फ से ढका रहता है, जिस वजह से ब्रिज की मजबूती का सही होना बहुत आवश्यक है, तो आपको बताना चाहेंगे दोस्तों इस ब्रिज के लिए एक खास स्टील का उपयोग किया गया है, वह -10 डिग्री से माइनस 40 डिग्री तक के टेंपरेचर में भी मजबूती से टिका रहेगा।

इसके साथ ही लगभग 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आने वाला तूफान भी इसे हिला नहीं सकेगा। साथ ही इसका वजन करीब 11000 टन है। इसे ऐसा बनाया गया है कि इसमें ट्रेन लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी आसानी से गुजर सकेगी। यह भूकंप के झटकों को भी आसानी से झेल सकता है। इंजीनियरिंग कमेटी के अनुसार इस ब्रिज की सर्विस उम्र की बात की जाए तो करीब 120 साल तक यह लगातार सेवा देता रहेगा।

ब्रिज के दोनों सिरों को मध्य से जुड़ने में मिली सफलता सभी कर्मचारी खुशी से झूमे

जब कोई Long-Distance ब्रिज बनाया जाता है, तो ब्रिज बनाने का काम दोनों सिरे से शुरू किया जाता है और मध्य में लाकर इसे जोड़ा जाता है, सुनने में कितना आसान लग रहा है, दोस्तों हकीकत में बहुत ही कठिन काम है, क्योंकि ब्रिज को 1 सीध के साथ दोनों साइड से लेकर आना और एक ही सेंटर पॉइंट पर मिलाना निश्चय ही टेढ़ी खीर है।

इसीलिए जब यह जॉइंट सटीक एंगल में बैठ जाता है, तो इंजीनियर इसे गोल्डन जॉइंट कहते हैं । इस 1 किलोमीटर लंबे चिनाब ब्रिज का गोल्डन जॉइंट का समय आया तो एकदम परफेक्ट एंगल में यह जोड़ लिया गया इस सफलता से सारा इंजीनियर ग्रुप बेहद खुश है इस रेल लिंक में करीब 97 टनल भी बनाई जानी है जिनमें से 80 चैनल का काम पूरा हो चुका है।

अब भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर भी दुनिया में मिसाल कायम कर रहा

चिनाब ब्रिज देखने में बादलों से भी ऊंचा है, अगर आप एक बार इस के नजारे देख लेंगे, तो आपको लगेगा शायद यही स्वर्ग है जिस दिन भी आप इसे देखेंगे, आपकी सांसे थम जाएंगी। इसलिए आज हम दावे के साथ कह सकते हैं कि भारत अब बहुत जल्द एक पूर्ण विकसित देश होगा यह ब्रिज इस बात का जीता जागता प्रमाण है जय हिंद।

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