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Mumbai: रोजाना इंटरनेट पर तरह तरह की मजेदार चीजें लोग शेयर करते है और वो वाइरल हो जाती है। इंटरनेट पर हर प्रकार का ज्ञान मिलता है। ऐसे में महिंद्रा ग्रुप्स के मालिक आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने कुछ दिन पहले अपने ट्विटर पर एक मजेदार ट्वीट किया।
आनंद महिन्द्रा ने ट्विटर पर एक फोटो ट्वीट की है, जिसमें एक बाइक पर एक व्यक्ति करीब 37 कुर्सियां, ढेर सारे मैट के साथ अपनी पत्नी को बैठा कर कही ले जाता दिख रहा है। उनकी यह फोटो शेयर की गई थी, वह खूब वायरल हो रही है। लोग इस ट्वीट के जमकर मजे ले रहे है और उस पर ढेरो प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
Now you know why India makes the most two-wheelers in the world. We know how to carry the highest volume of cargo per square inch of wheel…We are like that only… #Sunday pic.twitter.com/3A0tHk6IoM
— anand mahindra (@anandmahindra) April 3, 2022
महेन्द्रा इस फोटो के साथ लिखते है “अब आपको समझ आया होगा की आखिर भारत देश में दुनिया में सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन क्यों बनाए जाते है और सबसे ज्यादा ख़रीदे भी जाते है। क्योंकि हम भारत के व्हील के प्रति वर्ग इंच का उपयोग अच्छी तरह से करना जानते हैं, इसलिए तो हम भारतीय है।” यह बात लोगो को बहुत पसंद आ रही है।
काफी मजेदार ट्वीट करते हैं महिंद्रा
आनंद महिंद्रा इंटरेस्टिंग ट्वीट करने के लिए चर्चा में रहते है। उन्हें ट्विटर पर लगभग 90 लाख लोग फॉलो करते हैं और वह मात्र 272 लोग को फॉलो करते हैं। आनंद महिंद्रा ने ट्विटर पर एक बार मछली पकड़ने का भी वीडियो शेयर किया था, जो लोगो को सफल होने का मंत्र सिखने में मदद करता है।
मछली पकड़ने वाले इस वीडियो में एक बच्चा नदी के किनारे पतंग उड़ाने वाली चरखी से मछली पकड़ता नजर आ रहा है, वो बच्चा काफी देर से मछली को फसाने की कोशिश करता है। इस पोस्ट के कैप्शन में आनंद महिंद्र लिखते है कि ये वीडियो मेरे इनबॉक्स में बिना नाम पते का आया है।
ऐसी दुनिया जहां प्रतिदिन के काम से एक मिनट का समय नहीं होता, जिंदगी इस तरह उलझी होती है। उस स्थिति में इस वीडियो को देखने से एक राहत की अनुभूति होती है। ये महज एक छोटी सी कहानी है, जो सिखाती है कि प्रतिभा, प्रतिबद्धता और धैर्य से जिंदगी में सफलता जरूर हासिल होती है।
शेयर की एक ‘साइक्लिस्ट’ का वीडियो
महिन्द्रा हर परिस्थितियों में खुद को मोटिवेट रखते है और हर चीज़ उन्हें एक नई चीज सिखाती है। हाल ही में आनंद महिन्द्रा ने सिर पर एक गठरी को रखे हाथ छोड़कर साइकिल चलाने वाले एक शख्स का वीडियो शेयर किया था। ऐसे इंस्टेंट और उसके साइकिल पर बैलेंस बनाने की कला की उन्होंने खूब तारीफ की।
आनंद महिन्द्रा ट्विटर पर लिखते हुए कहते है कि यह आदमी एक मानव सेगवे है, जिसके शरीर में जाइरोस्कोप लगा है। इसके अंदर संतुलन बनाने का बहुत अच्छा सेंस। परंतु एक बात है, जो मुझे दुखी करती है की हमारे भारत देश में इस कलाकार के जैसे और भी कई कलाकार है, जो जिमनास्ट या खिलाड़ी है। परंतु ऐसे लोग या तो हमारी नजर से दूर है या फिर उन्हें सही सलाह और प्रशिक्षण का आभाव है।
आनंद महिंद्रा एक मोटिवेशनल स्पीकर
आनंद महिंद्रा भारतीय कारोबारी जगत के अरबपति के साथ साथ पूरी दुनिया की दृष्टि में एक सम्मानित व्यक्ति है। महिंद्रा अक्सर ट्विटर पर अपने सामाजिक कल्याण के प्रति ट्वीट करते है और सभी की प्रतिभाओं को सम्मान देते है। महिंद्रा के अंदर एक हिडन टेलेंट है, वह लोगो में उनका टेलेंट ढूंढ लेते है।
आनंद महिंद्रा, महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन के साथ साथ एक मोटिवेशनल स्पीकर भी है, जो सोशल मीडिया पर हमेशा ऐसी चीजे शेयर करते है, जिससे लोग काफी मोटीवेट होते है और सफल होने के लिए मेहनत में लग जाते है। इनकी बातों से लोगो को काफी प्रेरणा मिलती है।
कंपनी की बनाई अलग पहचान
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, आनंद महिंद्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी। जब उन्हें 1991 में एमएंडएम की कांदिवली फैक्ट्री का काम का जिम्मा दिया गया था। उस वक्त कर्मचारी हड़ताल पर थे और सबने उनके ऑफिस को घेर लिया। जिसके बाद उन सबको लगा कि आनंद महिंद्रा ने उनकी मांग पूरी करने का विचार बना लिया है।
पर आनंद महिंद्रा ने कोई और ही तरकीब निकाल लिया और कहा कि अगर कर्मचारी काम पर नहीं लौटे, तो उन्हें दिवाली बोनस काट लिटा जाएगा। इसको सुनते ही हड़ताल रुक गई। किसने सोचा होगा कि इस तरह हड़ताल को रोका जा सकता है, पर बाद में उनके नेतृत्व में कंपनी की प्रडक्टिविटी 50 प्रतिशत से बढ़ोतरी करते हुऐ 150 प्रतिशत हो गई।
इसके बाद एक बार महिंद्रा ग्रुप ने एकदम स्क्रैच से कार बनाने की जिद सी बना ली, लेकिन उनके पास उस काम का अनुभव नही था। इसलिए उन्होंने फोर्ड के साथ एक संयुक्त प्रोजेक्ट पर काम लिया। लेकिन बाजार में कार लॉन्च होने पर ज्यादा सफलता नहीं मिली। पर आनंद महिंद्रा ने हार नहीं मानी।
अपने मजबूत इरादों को कम नही होने दिया। उन्होंने रिस्क लिया और बिना किसी के सहयोग के अकेले ही कार बनाने का फैसला लिया। सबने उनकी बात सुनकर कहा कि वह बर्बाद हो जाएंगे। पर यह उनका सबसे कामयाब प्रोजेक्ट में से एक रहा।
इस कार का नाम है स्कॉर्पियो और उन्होंने इस प्रोजेक्ट को अन्य कंपनियों के मुकाबले बहुत कम खर्च में पूरा किया। यही से उनकी सफलता की कहानी शुरू होगी। 2009 तक, Mahindra and Mahindra भारतीय घरों में मशहूर हो गई थी और एक अरब डॉलर के करीब कारोबार भी। उन्होंने साबित कर दिखाया था कि भारतीय किसी से पीछे नहीं हैं।



