वैदिक विलेज के नाम से प्रसिद्ध इस शहर में बिना इंटरनेट और बिजली के बेहतरीन जीवन जीते हैं लोग

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Kurmagram Vedic village
Aandhra Pradesh Vedic village Kurmagram where people lives the vedic way of life. All about Kurmagram Vedic village of India.

Kurmagram: वर्तमान समय में बिना बिजली इंटरनेट और मनोरंजन के साधनों के जीवन अधूरा है। विज्ञान ने मानव को पूरी तरह अपने हाथों में ले लिया है आज के समय का व्यक्ति हर काम वैज्ञानिको के द्वारा निर्मित उपकरण के सहारे करता है।

आजकल सभी घरों में काम बिजली और बिजली के द्वारा चलने वाले उपकरणों के द्वारा हो रहा है जैसे टीवी, मोबाइल, फ्रिज, कूलर, हीटर और ना जाने कौन-कौन से उपकरण है, जो व्यक्ति को दैनिक जीवन में उपयोग के लिए लगते हैं और सबसे बड़ा मनोरंजन का साधन और मानव की दैनिक जरूरत बन गया है मोबाइल और इंटरनेट।

बूढ़े व्यक्ति से लेकर एक बच्चा भी बिना इंटरनेट के नहीं रह सकता। परंतु आज हम एक ऐसे गांव की बात करेंगे जहां पर लोग बिना इंटरनेट और बिना बिजली के अपना जीवन यापन कर रहे हैं आइए जाने वह कौन सा शहर है।

आंध्र प्रदेश का वैदिक गांव

हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh) के एक ऐसे गांव की जहां 56 व्यक्ति वैदिक काल के समय की तरह आज का जीवन व्यतीत कर रहे हैं। यहां के व्यक्ति स्वयं चूल्हे में खाना पकाते हैं और सारे कार्य बिना किसी मदद के स्वयं करते हैं। ऐसा नहीं है कि वह किसी मजबूरी के कारण ऐसा कर रहे हैं वह तो अपनी खुशी से और स्वयं की इच्छा से ऐसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

आंध्र प्रदेश के इस अद्वितीय गांव का नाम कुरमा ग्राम (Kurmagram village) है, जो आईटी हब के श्रीकाकुलम जिले के अंतर्गत आता है। इस गांव में करीब 14 परिवार होंगे जो आध्यात्मिक और वैदिक जीवन जी रहे हैं, वह अपने द्वारा फल और सब्जियों को उगाते हैं और उसी से अपना जीवन जी रहे हैं।

खुद के बनाए कपड़ों को ही पहनते हैं

जानकारी से पता चला है कि इस गांव के सभी लोग कृष्ण भक्त (Krishna Bhakts) है। वे उनकी आराधना करते हुए यह जीवन बिताना चाहते हैं। वे श्री कृष्ण की तरह ही अपना जीवन जी रहे हैं, सांसारिक मोह माया से दूर सादा जीवन जीना उन्हें पसंद आ गया है, केवल एक ही मोह है वह है श्री कृष्ण का मोह।

वे श्रीकृष्ण की तरह ही गोपालन करते हैं स्वयं कपड़े सिलते हैं स्वयं खाना बनाते हैं और उनकी सेवा में 24 घंटे लगे रहते हैं। इस गांव के लोगों को आज के आधुनिक जीवन से कोई लेना देना नहीं है वे सारे डिजिटल उपकरणों जैसे मोबाइल, गैस चूल्हा, फ्रिज, कूलर, टीवी जैसी चीजों से कोई भी वास्ता नहीं है।

वैदिक ज्ञान की प्राप्ति होती है इस गांव में

ऐसा बताया जा रहा है कि इस गांव में लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते सिर्फ एक लैंडलाइन फोन है जो आपातकालीन स्थिति में इस क्षेत्र के लोगों की मदद के लिए लगाया गया है। जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में एक गुरुकुल (Gurukul) है जहां बच्चों को वेद और शास्त्रों का ज्ञान दिया जाता है। यहां के शिष्यों के पास केवल तीन विषय होते हैं भक्ति वृक्ष, भक्ति शास्त्री और भक्ति वैभव।

इतनी शिक्षा ग्रहण करने के लिए एक छात्र को लगभग 10 वर्षों का समय लगता है इसके बाद यदि विद्यार्थी चाहे तो उच्च शिक्षा के लिए बाहर जा सकता है या फिर जॉब भी कर सकता है। इस गांव के बच्चे गणित, विज्ञान, संस्कृत, तेलुगु, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, कला और नैतिक शिक्षा आदि विषयों पर काफी पक्के होते हैं।

पर्यटक स्थलों में है शामिल यह गांव

इस गांव (Kurmagram Vedic village) के नियम बहुत ही अलग है। जानकारी के अनुसार पता चला है कि इस गांव के लोगों की दिनचर्या सुबह 3:30 बजे शुरू हो जाती है और रात्रि शाम के 7:30 बजे। इतना ही नहीं इस गांव में स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर भी काफी ज्यादा अवेयरनेस है। इस क्षेत्र में लोग स्वस्थ रहने के लिए तैराकी कबड्डी साथ पत्थर जैसे खेल खेलते हैं।

एक रिपोर्ट से पता चला है कि यह गांव अब एक बेहतरीन पर्यटक क्षेत्र बन गया है, यहां पर देश-विदेश से लोग आते हैं और अपना समय बिता कर चले जाते हैं। इस गांव के लोग अपने मेहमानों को प्रसादम खिलाकर विदा करते हैं।

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