लद्दाख सांसद ने अक्साई चीन को दिया नया नाम, जिससे चीन को मिर्ची लग जानी है, जानें इतिहास

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Image Credits: Twitter(@MPLadakh)

Laddakh: देश में लद्दाख (Ladakh) लोकसभा सीट से भाजपा सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल (Jamyang Tsering Namgyal) ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में बताया कि सीमा पर चीनी हरकत के बाद लद्दाख समेत देशभर में चीन के खिलाफ रोष है। उन्होंने कहा कि सरकार चीन के खिलाफ जो भी निर्णय लेगी लद्दाख के लोग केंद्र सरकार के साथ हैं।

सांसद जमयांग ने कहा कि अक्साई चिन भारत का अभिन्न हिस्सा है और अब इसे चीनी अवैध कब्जे से वापस लेने का वक़्त आ गया है। भाजपा सांसद नामग्याल ने कहा कि अभी का भारत अब 1962 का भारत नहीं है। उन्होंने चीन को आड़े हांथो लिया है। सांसद नामग्याल के मुताबिक़ चीन ने सोची समझी रणनीति के साथ भारत के साथ धोखा किया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि देश के सैनिओं की शहादत व्यर्थ नहीं जाने देंगे। हमें प्रधानमंत्री पर पूरा विश्वास है कि वह चीन के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे। सांसद जमयांग ने बताया कि चीन अब बातों से मानने वाला नहीं है। इस पर तो इन्होने एक ट्वीट भी किया, ‘लातों के भूत बातों से नहीं मानते।’ इस ट्वीट का सीधा सन्देश है की सकती ही बरतनी होगी। असल में गलवान घाटी से अक्साई चीन बहुत ही नजदीक है और यहाँ से सियाचिन भी काफी पास है।

https://twitter.com/chankil_stark/status/1273214651451404288

An User Found 4 Structures in 100km stretch along gallowan valley These are connected through roads with Aksai Chin. The Ladakh MP also asserted that the region should be referred to as Aksai India instead of Aksai Chin.

चीनी सामान के बायकाट की भी बात चल रही है और बीएसएनएल ने भी अपग्रेडेशन के लिए चीनी कंपनी हुवावे को इग्नोर करने का मन बना लिया है। दूसरी ओर भारतीय आकाशवाणी ने तिब्बत से जुड़ी खबरें और मौसम का हाल प्रसारित करना आरम्भ कर दिया है। अब लद्दाख से भाजपा संसद जामयांग शेरिंग नामग्याल ने यह स्पष्ट कह दिया है कि चीन के कब्ज़े में स्थित लद्दाख क्षेत्र को अक्साई चिन के नाम से नहीं, बल्कि चीन के कब्ज़े वाले लद्दाख यानि ‘China Occupied Ladakh’ के नाम से संबोधित किया जाये। अब लोगो का कहना है की अक्साई चिन को अक्साई इंडिया (Aksai India) या अक्साई लद्दाख (Aksai Laddakh) कहा जाना चहिये।

जामयांग के मुताबिक साल 1962 के वक़्त से चीन ने भारत के साथ एक बार नहीं, बल्कि कई बार धोखा किया है। 1962 की जंग में उसने हमसे हमारी 37244 स्क्वेयर किलोमीटर की भूमि छीन ली थी, जिसे वे अक्साई चिन के नाम से संबोधित करते हैं। ये अकसाई चिन नहीं, चीन के कब्ज़े में हमारी भूमि है। उन्होंने बताया की ये चीन के कब्ज़े में हमारा लद्दाख है। हमारा इस पार दावा बना हुआ है। अब समय आ गया कि अपनी भूमि हम वापिस ले।

अब सवाल यह उठता है की ये अक्साई चिन नाम कैसे और क्यों रखा गया। असल में अक्साई चिन का मतलब है ‘चीन के सफ़ेद पत्थरों का रेगिस्तान’, जो की चीनी दावे को मजबूत करने के लिए रखा गया है। अक्साई चिन चीन द्वारा अवैध कब्ज़े वाला क्षेत्र है, जो उसके शिंजियांग क्षेत्र में आता है। परंतु शिंजियांग स्वयं चीनी क्षेत्र नहीं है।

https://twitter.com/TIinExile/status/1273264757131231233

आपको बता दे की शिंजियांग पर भी चीन का अवैध कब्ज़ा है। ठीक वैसे ही जैसे तिब्बत पर चीन ने कब्जा कर किया था। भारत की उस वक़्त की सरकार ने तिब्बत पर चीनी हमले का कभी विरोध नहीं किया और ना ही शिंजियांग पर चीन ने दावे पर कोई आपत्ति उठाई।

चीन का दिया हुआ नया नाम अक्साई चिन (Aksai Chin) है। इसका क्षेत्र का असल नाम पूर्ण रूप से भारतीय और संस्कृत नाम है, जो की ‘गोस्थान’ (Gosthana) अर्थात गाय का निवास स्थान है। प्राचीन वक़्त में यहाँ संस्कृत और प्राकृत भाषाएँ बोली जाती थी। लद्दाखी और तिब्बती लोग आज भी इस स्थान को गोस्थान के नाम से पुकारते है।

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