भारत की इस जगह 5000 साल पुरानी सभ्यता मिली, पुरातत्व विभाग ने इसे बड़ी खोज बनाया, अति महत्वपूर्ण

0
1568
Rakhigarhi Haryana Latest
5000-year-old jewellery manufacturing factory found in Rakhigarhi Haryana Old Planned Harappan City and Old Jewellery Making Factory found.

Photo Credits: Twitter

Hisar: सिंधू घाटी सभ्‍यता जिसे भारत कि सबसे प्राचीन सभ्‍यता माना जाता है। यह लगभग पॉंच हजार साल पुरानी सभ्‍यता है। इस सभ्‍यता में कांस्‍य का प्रयोग ज्‍यादा किया जाता था, इसलिए इस सभ्‍यता को कांस्‍युगीन सभ्‍यता भी कहा जाता है।

इस सभ्‍यता के प्रमुख केन्‍द्र मे से एक राखीगढ़ी है। जो कि सरस्‍वती नदी के किनारे बसा है, जिसे वर्तमान में घघ्‍घर नदी के नाम से जाना जाता है। इस सभ्‍यता के प्रमुख केन्‍द्र हड़प्‍पा, मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीर और राखीगढ़ी है।

सिंधू घाटी सभ्‍यता (Indus Valley Civilisation)

सन् 1861 में एलेक्‍जेण्‍डर कनिंघम के निर्देशन में भारतीय पुरातत्‍व विभाग की स्‍थापना हुई। उसके बाद 1902 में लार्ड कर्जन और जॉन मार्शल के द्वारा भारतीय पुरातात्‍विक विभाग कि स्‍थापना की गई। तब से इस सभ्‍यता के बारे में जानने के लिए प्रयास किये जाते रहे है।

इस सभ्‍यता के समय लोगों का जीवन किस तरह का होता था। किस तरह लोग अपना जीवन यापन करते थे। यह जानने के लिए हमारे पुरातत्‍व विभाग के द्वारा काफी समय से खोज की जा रही है। काफी हद तक इसमें सफलता भी प्राप्‍त हुई है।

हड़प्‍पा सभ्‍यता जिसे हम सिंधू घाटी सभ्‍यता भी कहते है। इसमें हड़प्‍पा और मोहनजोदड़ों काफी प्रसिद्ध है। हड़प्‍पा रावी नदी के किनारे है, वहीं मोहनजोदड़ो सिंधू नदी के किनारे है। हडप्‍पा सभ्‍यता (Harappan civilisation) कि खोज 1921 में दयाराम साहनी के द्वारा कि गई थी। वही मोहनजोदड़ो कि खोज 1922 रखालदास बैनर्जी के द्वारा कि गई।

राखीगढ़ी (Rakhigarhi) प्राचीन सभ्‍यता

राखीगढ़ी हरियाणा (Rakhigarhi Haryana) के हिसार (Hisar) जिले में स्‍थित है। राखीगढ़ी सिंधु घाटी सभ्‍यता का भारतीय क्षेत्रों में सबसे विशालतम ऐतिहासिक नगर है। इसकी प्रमुख नदी घग्घर है। पुरातात्विक विभाग ने हरियाणा स्थित राखीगढ़ी की खोज 1963 ई. में की थी। राखीगढ़ी की खुदाई व्यापक पैमाने पर 1997-1999 ई. के दौरान अमरेन्द्र नाथ द्वारा कि गई है। यहाँ से मातृदेवी अंकित एक लघु मुद्रा प्राप्त हुई थी।

राखीगढ़ी से महत्त्वपूर्ण चीजें प्राप्त हुए हैं। जिनमें अन्नागार, स्तम्भयुक्त वीथिका या मण्डप, जिसके पार्श्व में कोठरियाँ भी बनी हुई हैं, ऊँचे चबूतरे पर बनाई गई अग्नि वेदिकाएँ आदि मुख्य हैं। राखीगढ़ी गांव 11 टीलों के नीचे दफ्न है। फिलहाल उनमें से 3 टीलों की पुरातात्विक खुदाई से पता चला है, कि राखीगढ़ी सबसे बड़े शहर के तौर पर कभी हुआ करता था।

हरियाणा के हिसार जिले में स्थित राखीगढ़ी का सम्बन्ध सिंधु घाटी सभ्यता से माना जाता है। ये गाँव एक पुरातात्विक स्थल है। इसके साथ ही प्राचीन काल में घर बनाने की उत्कृष्ट कला भी दिखी है। इस समय भी लोंगो के पक्‍के मकान हूआ करते थे। पानी कि निकासी के लिए पक्‍की नालियॉं होती थी।

5000 वर्ष पहले लोगों के पास इस तरह के घर होना और उसमें एक पूरा का पूरा किचन परिसर का बनाया जाना। विशेषज्ञों को भी अचंभे में डाल रहा है। यहाँ ज्वेलरी फैक्ट्री का मिलना बताता है, कि हजारों वर्ष पूर्व ये जगह व्यापार और कारोबार का एक महत्वपूर्ण स्थल रहा होगा। ताम्र और सोने से बने कई ऐसे आभूषण भी मिले हैं, जो हजारों वर्षों से अब तक छिपे हुए थे।

ये वैसा ही है, जैसे उत्तर प्रदेश के सिनौली में कांस्य युग की चक्कियाँ मिले थे। साथ ही वहाँ एक रथ भी खोजा गया था, जो प्राचीन योद्धाओं की एक संस्कृति को दर्शाता है। इसमें हजारों मिट्टी के घड़ों के अलावा रॉयल सील्स और बच्चों के खिलौने भी शामिल हैं।

इतना ही नहीं, उन घरों में पानी की निकासी की अच्छी व्यवस्था होती थी। सड़कों से मिलती हुई गालियाँ बनाई जाती थीं। सड़कों और गलियों में मोड़ पर कच्ची मिट्टी को जला कर ईंट का रूप दिया जाता था और निर्माण को नुकसान न पहुँचे, इसकी व्यवस्था की जाती थी। यहाँ कई मुहर, मृदभांड, हाथी दाँत, और मानव की हाड़ियों की वस्तुएँ भी मिली हैं। फ़िलहाल अभी यहाँ खुदाई जारी रहेगी।

सोने के आभूषणों के मिले है अवशेष

आपको जानकर हैरानी होगी कि राखीगढ़ी में खुदाई के दौरान सोने के आभूषणो का पता चला है। जिससे यह साबित होता है, कि उस समय भी सोने के आभूषणों का चलन था। खुदाई के दौरान राखीगढ़ी में सोने की फेक्‍ट्री मिली है।

विभाग को सील सोना मिट्टी की चूडि़यां और अन्‍य महत्‍वपूर्ण सामान भी पहले मिल चुके है। यहॉं पर पुराने दफ्न कंकालों के अवशेष मिले है। जिसके पास चूडियाँ टूटे बर्तन मिले है। जिससे यह अंदाजा लगाया जाता है, कि शायद मरने वालों को यह चीजें पसंद होगी, इसलिए यह चीजें उनके साथ दफनाई गई है। यहां पर 5000 साल पुरानी ईंटे नालियां नालियों के ऊपर रखे मिट्टी के घड़े इत्‍यादि खोज के दौरान देखने को मिले है।

लिपि को पढ़ने का प्रयास जारी है

भारतीय पुरातत्‍व विभाग के प्रमुख संजय कुमार मंजुल ने बताया है कि खुदाई के दौरान सील और कुछ बर्तन मिले है। जिसमें लिपि अंकित है, जिसे पढ़ने कि कोशिश कि जा रही है। जल्‍द ही इसमें सफलता प्राप्‍त होगी और हमें इस पुरानी सभ्‍यता से जुड़ी नई जानकारी प्राप्‍त होंगी।

खुदाई के दौरान जितनी भी चींजे मिली है। उन्‍हें म्‍यूजियम में रखा गया है। यह खुदाई अभी भी जारी है, सितंबर 2022 से इसकी फिर से खुदाई कि जायेगी। हमें आशा है, कि आगे भी हमें बहुत से ऐसे अवशेष मिलेंगे, जिससे हमें इस 5000 साल पुरानी सभ्‍यता के बारे में जानने में सहायता मिलेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here