
Delhi: समझना थोड़ा कठिन हो रहा है कि जम्मू-कश्मीर की जनता अधिक परेशान हैं या इलाके के नेता? सूत्रों की खबरों के अनुसार सूबे में सुरक्षा बलों की गतिविधियां और सरहद पार से आतंकी मंसूबों के Input तो यही संकेत दे रहे हैं कि सरकार पाकिस्तान को ही निशाना बनाकर घेरने में लगी है। जम्मू-कश्मीर में जो मोजूदा हालत है, उससे आम जनता का परेशान होना तो संबंध है, लेकिन जनता से ज्यादा तो क्षेत्रीय नेता कुछ अधिक ही परेशान हैं।
जम्मू-कश्मीर के नागरिक तो तब से कठिनाइयों में हैं जब 3 साल पहले 8 जुलाई, 2019 को हिज्बुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहानी वानी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मार दिया गया था। पुलवामा हमला और बालाकोट एयर सट्राइक के बाद भी कश्मीर की लगभग यही स्थिति रही है। अचानक बिना किसी घटना के एडवाइजरी जारी होने के चलते हलचल ऐसी मची कि बाहर से आये सैलानियों के लिए भी मुश्किल खड़ी हो गयी।
मोजूदा स्थिति तो ये है कि हर किसी के मन मे एक ही सवाल पैदा हो रहा है कि कुछ होने वाला है, लेकिन क्या होने वाला है इसकी जानकारी किसी को नही है? सरकारी अफसरो के अतिरिक्त कोई नहीं जान सकता है। सभी अपने अपने तरीके से सिर्फ स्थिति को देखकर आकलन कर रहे हैं। अनुमान लगाने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं।
ये दोनों ही इस स्थिति में राज्यपाल से बातचीत भी कर चुके हैं। उमर अब्दुल्ला का कहना हैं कि उनकी पार्टी संसद में इस बात की सफाई मांगेगी।पाकिस्तान लगातार हाथ नही डलता तो जम्मू कश्मीर में भी समस्या नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से अधिक नहीं होती। ये पाकिस्तान ही है जिसकी ताकत पर कश्मीर के नेता विघ्न डालते रहते हैं। मुख्यधारा की राजनीति करने वाली महबूबा मुफ्ती भी तो पाकिस्तान और इमरान खान की करीबी रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप कश्मीर पर मध्यस्थता की बात को बार बार दोहरा रहे हैं, चीन भी इसी बात पर नजर टिकाये हुए और पाकिस्तान कुलभूषण जाधव केस में कांसुलर एक्सेस को लेकर अपने दांव पेंच खेल रहा है। इस सतही को देखते हुए भारत के लिए कड़े तेवर दिखाना भी बेहद आवश्यक हो गया है। मोदी सरकार के लिए जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराना प्राथमिकता बन गई है।
अमरनाथ यात्रा के रूट में बिछायी गयी बारूदी सुरंगों के पीछे पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत प्राप्त हो जाने के बाद सरकार की गंभीरता को समझने में कोई परेशानी नही है। ऐसे में कश्मीर की जमीन से ही पाकिस्तान को सख्त मैसेज देना महत्वपूर्ण हो गया है। मौजूदा हालात कुछ ऐसी ही गतिविधियां के संकेत दे रही हैं।
मसला सिर्फ इतना ही होता तो बहुत गंभीर होने की आवश्यकता ही नही पड़ती, अगर जैश सरगना के भाई इब्राहिम अजहर को मुजफ्फराबाद की गलियों में घूमते देखे जाने की खुफिया इन्फॉर्मेशन नहीं मिली होती। इब्राहिम अजहर जैश सरगना मसूत अजहर का भाई है और जानकारी मिली है कि वो घाटी में आत्मघाती हमलों को अंजाम देने की फिराक में था।
जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराना ही बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, भाजपानेता इस बार पूरे इलाके में 15 अगस्त को तिरंगा फहराने की प्लाइनिंग कर रहे हैं जिसका सीधा उद्देश्य चौतरफा मैसेज देना है।



