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Pali: 10वी तथा 12वी की परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद टॉपर्स की बाते हर जगह की जाती है। अच्छे अंक लाना हर स्टूडेण्ड चाहता है। जिसके लिए वह प्रतिदिन मेहनत करता है। जब रिजल्ट आता है, तो टॉपर्स बच्चे अपने अंक शेयर करते हुए बहुत ही गौरवान्वित महसूश करते है।
अच्छे अंक लाकर बच्चे अपना और परिवार का नाम रौशन करते है, इसमें कोई शक नहीं है। पर यह बात हम बहुत अच्छे से जानते है, कि सिर्फ अच्छे अंक ला लेने से यह साबित नहीं होता कि हम अपने जीवन में कितनी सक्सेस हासिल करेंगे।
कभी कभी अंक सिर्फ हमारी मार्कशीट तक ही सीमित रह जाते है। 10वी और 12वी में अच्छे अंक लाने वाले बच्चों कि चर्चायें तो हर जगह होती है। लेकिन वह बच्चे जो पीछे रह जाते है, उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। जिस वजह से उनमें आत्मविश्वास की कमी होने लगती है। पीछे रह जाने वाले बच्चे अपने आप को हर जगह कम ऑंकने लगते है।
लेकिन आज हम जिस व्यक्ति की कहानी लेकर आये है, वह उन बच्चों में से थे जो स्कूल में पीछे रह जाते है। वह अपने जीवन में दी गई परीक्षाओं में 19 बार असफल हुए। लेकिन अपने घर वालों के सहयोग और मॉटिवेशन से वह आरएएस की परीक्षा में 55वी रैंक हासिल कर पाये। हम जिनकी बात कर रहे है उनका नाम दलपत सिंह (Dalpat Singh) है। दलपत सिंह राजस्थान के जिले पाली में एक छोटे से गॉंव गुड़ाकेसरसिंह के रहने वाले है।
दलपत सिंह जिन्होंने पास की आरएएस परीक्षा
दलपत सिंह 10वी की परीक्षा से लेकर ग्रेजुएशन की परीक्षा तक और कॉम्पटीटिव एक्जाम में कई बार फेल हुए। लेकिन कभी भी वह इस बात को लेकर इतने निराश नहीं हुए कि प्रयास करना ही बंद कर दे वह मेहनत करते रहे।
उनके घर वालों ने उनका हौसला बढ़ाया, जिसकी बदौलत वह आज आरएएस दलपत सिंह (RAS Dalpat Singh) कहलाने लगे है। दलपत सिंह जी अभी मोहनलाल संखाडि़या यूनिवर्सिटी में एक वित्त अधिकारी के पद पर कार्यरत है। उन्होंने यह पद आरएएस की परीक्षा में 55वी रैंक हासिल करके प्राप्त किया है।
घर वालों ने बढ़ाया हौसला
19 बार फेल होने के बाद अगर कोई और होता तो शायद हार मान कर कोशिश करना छोड़ देता। घर वालें भी जब हमें सपोर्ट नहीं करते तो हम भी प्रयत्न करना छोड़ देते है। लेकिन दलपत सिंह जी की मॉं सुमन और पिता जी मोहन सिंह ने कभी भी उनका हौंसला कम नहीं होने दिया। उन्होंने अपने बच्चे को उठ कर आगे बढ़ने की सीख दी। आज दलपत सिंह जी और उनके परिवार के धैर्य की वजह से दलपत जी इस मुकाम पर है, जहॉं हर एक टॉपर पहुँचने के सपने देखता है।
19 बार हुए असफल
दलपत सिंह जी को दसवी की परीक्षा में बहुत कम नंबर मिले थे। उन्हें औसत अंक ही प्राप्त हुए थे। उसके बाद जब वह बारहवी की परीक्षा में सामिल हुए तब वह 2 बार असफल रहे। फिर मेहनत करके वह तीसरी बार ग्रेस से परीक्षा पास करने में सफल हो पाये।
दलपत सिंह जी ने अपने जीवन में कई कॉम्पटीटिव परीक्षा (Govt Job Exam) दिये, लेकिन उसमें भी सफल नहीं हो पाये। हर एक आम युवा कॉलेज से निकल कर यही सपना देखता है, कि वह सरकारी नौकरी की तैयारी करके एक अच्छी नौकरी हासिल जरूर करेगा। वही कार्य दलपत सिंह ने भी किया, लेकिन उन्हें कई बार असफलता मिली वह पीएमटी, पीईटी, कृषि विभाग, बीएसटीसी, और एसटीई जैसी कई परीक्षाओं में फेल हुए।
एक उम्मीद ने बदल दी जिंदगी
दलपत सिंह की जगह कोई और होता तो प्रयास करना छोड़ देता। लेकिन कभी कभी ऐसा होता है कि हमें जीवन में एक ऐसी उम्मीद मिल जाती है, जिसके सहारे हम जीवन में सफलता प्राप्त कर लेते है। यही हुआ दलपत सिंह जी के साथ में।
उनके दोस्त जब आईएएस बनकर उनके सामने आये तो उन्हें देख कर दलपत सिंह के मन में भी आईएएस बनने का विचार आया। दलपत सिंह ने यह सोचा कि अगर उनका दोस्त इस परीक्षा में सफल हो सकता है, तो वह क्यूँ नहीं।
अपनें दृढ निश्चय से पहुँचे इस मुकाम तक
फिर क्या था दलपत सिंह जी ने खुद को आईएएस (IAS Officer) बनने के लिए पूरी तरह झोंक दिया। उन्होंने दिन रात आईएएस बनने के लिए मेहनत की। इस परीक्षा की उन्होंने बहुत तैयारी की। उनकी मेहनत रंग लाई और वह 2008 को आयोजित की गई आरएएस की परीक्षा में सफल हो गये।
उन्होंने पूरे राजस्थान में 55वी रैंक हासिल कर ली। दलपत सिंह जी की सफलता से साबित होता है, कि आपके मार्कशीट के अंक यह साबित नहीं करते कि आप अपने जीवन में किस हद तक सफल हो पाएंगे।
कभी कभी अंक सिर्फ मार्कशीट के पन्नों तक ही सीमित रहे जाते है। जीवन में सफलता सिर्फ हमारे हौंसले और दृढ निश्चय से ही हासिल की जा सकती है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की हम कितनी बार असफल हुए है।



