
Photo Credits: Attaware Cutlery On Social Media
जब भी हम किसी समारोह या फिर कही भंडारे में जाते है, तो वहॉं हमें थर्माकोल या फिर प्लास्टिक के बने बर्तनों में खाना दिया जाता है। हम यह बहुत अच्छे से जानते है, कि प्लास्टिक हमारे पर्यावरण को बहुत ही नुकसान पहुँचाता है। फिर भी हम इसका उपयोग करते है, क्योंकि यह बहुत ही सस्ते होने के साथ साथ आसानी से मार्केट में भी मिल जाते है।
क्या आपके मन में कभी यह प्रश्न आया है, कि सब कुछ जानकर भी हम ऐसा क्यों करते है। क्या हम इसकी जगह दूसरा विकल्प चूज नहीं कर सकते। अगर ऐसा है तो आज हम आपके पास एक ऐसे स्टार्टअप की जानकारी लेकर आये है। जिसके बारे में जानने के बाद आप भी बताऐ गये स्टार्टअप के बर्तनों का इस्तेमाल करने लग जाएंगे।
हम बात कर रहे है, आटावेयर कटलरी स्टार्टअप की जिनके द्वारा आटे और गुड़ से बर्तनों को बनाया जाता है। जी हॉ आपने सही पढ़ा है, आटा और गुड़ के बर्तन। ऐसे बर्तन जिनका उपयोग करने के बाद इसे लोगो द्वारा खाया भी जा सकता है। आटावेयर कटलरी स्टार्टअप ऐसे बर्तनों का निर्माण करती है, जोकि आटे और गुड़ की सहायता से बनते है।
यह बर्तन हमारे साथ साथ पृथ्वी पर मौजूद जानवरों के लिए भी सुरक्षित है। इसके साथ ही इन बर्तनों से हमारे पर्यावरण को कोई नुकसान भी नहीं पहुँचता है। यह एक तरह से इको फ्रेंडली बर्तन हैं। किस तरह हुई इस स्टार्टअप की शुरूआत आइये इसके बारे में विस्तार से जानते है।
तैरते हुए थर्माकोल को देखकर आया विचार
इस आटावेयर स्टार्टअप (Attaware Startup) की शुरूआत पुनीत दत्ता ने की है। उन्हें इस स्टार्टअप (Edible Cutlery Startup) की शरूआत का आइडिया तब आया जब वह एक बार राज्य दिल्ली से वृंदावन की ओर जा रहे थे और रास्ते में जाते जाते उन्होंने देखा कि यमुना नदी के पानी में कुछ तैर रहा है।
पुनीत ने यह जानने के लिए कि आखिरकार वह चीज क्या है। गाड़ी रोकी और यमुना नदी के पास चले गये। जब वह यमुना नदी के पास पहुँचे। तो उन्होंने देखा की वह चीज थर्माकोल हे। इसे देख कर पुनीत को काफी दुख हुआ। वह इस बात से परेशान हो गये कि किस तरह से थर्माकोल नदी को प्रदूषित कर रहा है। काफी समय तक उनके मन में यही बात चलती रही।
व्यक्ति को देखकर हुए प्रेरित
सफर तय करके जब पुनीत वृंदावन पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि खाना खाने के लिए वृन्दावन में लोग लंबी लाइन लगाकर खड़े है। वहां पर खाना खाने के लिए बर्तन के लिए कई सारी डिस्पोजेबल प्लेट्स यूज की जा रही थी। यह प्लेट्स थर्माकोल से बनी थी और इसका ही उपयोग वहा अधिक किया जा रहा था। वहा पर पुनीत ने एक व्यक्ति को ऑब्जर्व किया।
पुनीत ने देखा कि एक व्यक्ति को जब प्लेट नहीं मिल पाई, तो व्यक्ति ने एक पूड़ी ली और उसे ही अपनी प्लेट समझ ली और उसमें खाना खाने लगा। उस व्यक्ति ने परोसने वाले को पुड़ी में ही छोले डालने को कहा। यह देखकर पुनीत (Puneet Dutta) को काफी अचंभा हुआ। क्योंकि यह उनके लिए बिल्कुल नई चीज थी।
लेकिन इस घटना को देखपर पुनीत बहुत प्रेरित हुए और इसके बाद ही उन्होंने एक आटावेयर कटलरी की शुरूआत कर दी। जिसमें ऐसे बर्तनों को बनाया जाने लगा जिसे यूज करने के बाद लोगों द्वारा इसे खाया भी जा सके। पुनीत ने कई शोध की और उसके बाद ही उन्होने यह कटलरी बनाई। उनकी कटलरी 15 अगस्त 2019 को रजिस्टर्ड हुई। उनकी कटलरी का पुरा नाम आटा वेयर बायोडिग्रेडेबल प्राइवेट लिमिटेड है।
चाय का कप बनाकर की शुरूआत
पुनीत कहते है, कि इस स्टार्टअप की शुरूआत में उन्होने जो सबसे पहले इनोवेटिव प्रोडक्ट बनाया था, वह चाय का कप एक था। जिसे उपयोग करने के बाद आसानी से खाया भी जा सकता था। पुनीत कहते है, कि जब भी हम चाय या कॉफी पीते है। तो हमारी आदत कुछ ना कुछ खाने की होती है।
इसी बात को ध्यान में रखकर उन्होंने सबसे पहले इसे बनाया। क्योंकि इससे हमारे पीने के साथ साथ खाने की आवश्यकता भी पुरी हो जाती है। पुनीत ने यह खाने योग्य कप गुड़, गेहूं, उसके साथ मक्का, बाजरा, ज्वार इत्यादि अनाजों को मिक्स करके बनाया।
Recently came across the #Attaware cutlery made of wheat flour & jaggery which can make our drinks & food more sustainable. The cutlery is edible hence, obviously biodegradable and does not endanger the wildlife.
Good alternative to #singleuseplastic plastic.#PlasticPollution pic.twitter.com/TILHmPCixN
— Green Dream Foundation (@TheGreenDream) August 28, 2021
पुनीत कहते है, वेसे तो लोग स्नैक्स को खाना हेल्दी नहीं मानते। वह कहते है कि हमारा यह एडियेबल कप आपकी हेल्थ के लिए भी बहुत ही अच्छा है। क्योंकि इस कप में कैल्शियम, प्रोटीन के साथ साथ खनिजों की भी अच्छी मात्रा मौजूद है। आपको बता दे कि पुनीत केवल कप ही नहीं बनाते, बल्कि उनके कटलरी में कप के साथ-साथ प्लेट, चम्मच इत्यादि खाने योग्य प्रोडक्ट का भी निर्माण किया जाता है।
आपदा और लॉकडाउन के समय दिक्क्तों का करना पड़ा था सामना
पुनीत बताते है कि प्रारंभ में वह अपने सभी उत्पादों की खुदरा बिक्री किया करते थे। इससे ही वह बहुत फैमस हो गये थे। वह बताते है, कि उनके कुछ उत्पाद तो काफी अच्छे से बिक जाते थे। लेकिन वही कुछ प्रोडक्ट बिल्कुल नहीं बिक पाते थे।
आपदा और लॉकडाउन के समय जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन था। उस समय समारोह या पार्टी करने की अनुमति नहीं थी। उस समय पुनीत के प्रोडक्ट की मांग में बहुत अधिक गिरावट आई थी। उनके पुराने थोक ऑर्डर्स भी कैंसिल हो गये थे। जिसके बाद से पुनीत ने सिर्फ एडिबल कप बनाना शुरू कर दिया था।
नये एक्सपेरिमेंट भी किये
पुनीत बताते है कि अपने प्रोडक्ट के निर्माण में धीरे धीरे उन्होंने बहुत सी चीजें एड करनी शुरू कर दी। जिससे उनके प्रोडक्ट की लाइफ से 6 से लेकर 12 महीने तक बढ़ गई। वह बताते है कि उन्होंने बर्तनों के निर्माण में सिर्फ गेहूं की जगह दूसरे विभिन्न अनाज और गुड़ का प्रयोग करना प्रारंभी कर दिया। इससे उनके उत्पाद की लाइफ और भी बढ़ गई। पुनीत बताते है, कि उनके कप सोशल मीडिया में आटावेयर नाम के प्लेटफॉर्म में केवल 10 से लेकर 12 रूपये में उपलब्ध है।
लाखों कमाते है पुनीत
आज पुनीत हर हफ्ते लगभग 950000 रूपये के कप बेचते है। वह केवल यही नहीं बल्कि कई दूसरे आइडियाज को लेकर भी काम कर रहे है। उनकी आटावेयर कटलरी ने 2021 में 9 नये फ्लेवर के कप को बनाया।
इन फ्लेवर्स में अदरक, केरामल, इलायची, सन्तरा, सौंफ तुलसी, स्ट्रॉबेरी, कॉफी और साथ ही वनिला फ्लेवर भी शामिल हैं। पुनीत बताते है, कि वह दुकानदार जो अपने कस्टमर की पसंद का ख्याल रखते है। यह कप उन्होंने उनके लिए बनाया है। जिससे उनका काम आसान हो जाता है।
Sustainable Story #10: Puneet Dutta's edible cutlery startup – Attaware makes cups that's made of jaggery, wheat, bajra & other grains.
These cups come in more than 10 flavors & currently, they sell 9 lakh cups/week!#SustainableStory #EdibleCutlery #zerowaste #plasticfree pic.twitter.com/9vTvXV9uHo— Bambrew (@Bambrew_in) February 5, 2022
पुनीत ने अपने इस नये स्टार्टअप की सहायता से लगभग 35,00,000 लीटर से अधिक पानी की बचत की है। इसके साथ ही उन्होने अपने इस स्टार्टअप के जरिए 50 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार भी दिया है। पुनीत कहते हैं कि यह अभी उनकी शुरूआत है। आगे भी वह इस पर और भी बेहतर काम करना चाहते है और अपने इस आटावेयर को पूरे विश्व में पहचान दिलाना चाहते है।
पुनीत की यह अनोखी सोच तारीफ के काबिल है। यह कप वाकई में इको फेंडली है। हमें उम्मीद है कि इससे स्वच्छ भारत के मिशन को सहायता मिलेगी और हमारे पृथ्वी की प्राकृतिक धरोहरो को नुक्सान भी नहीं होगा।



