कहानी अफगानिस्‍तान की पहली महिला पायलट की, जिसने तालिबान के खिलाफ उड़ाया विमान

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Niloofar Rahmani Story
Story of First Woman Pilot Of Afghanistan Niloofar Rahmani. In 2018 Afghanistan's First Female Pilot Granted Asylum in US. Niloofar Rahmani is living in America now and working as translator in Florida.

Photo Credits: Twitter(@Nilofar_Rahmani)

Delhi: आज पूरी दुनिया एक ही सवाल कर रही है की अब अफ़ग़निस्तान का भविष्य क्या होने वाला है। तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया है। ऐसे में अफगानिस्तान से लगातार महिलाओं से गलत व्यव्हार की खबरें आ रही। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबानी लोग अफगानी महिलाओं (Afghan Women) को उठाकर जबरन उनसे शादी कर रहे हैं।

तालिबान को महिलाओं का विरोधी माना जाता है और अफगानिस्‍तान की महिलाओं (Afghan Females) के लिए तालिबानी राज को नरक बताया जा रहा है। ऐसे में आज हम आपको उस महिला के बारे में बताते हैं, जो अफगानिस्‍तान की पहली महिला पायलट (First Woman Pilot Of Afghanistan) रही हैं। दो दिन पहले एक विदेशी चैनल को दिए इंटरव्‍यू में अपने देश के हालातों पर चिंता जताते हुए अपने फ्यूचर के बारे में बताया।

तालिबान राज हो जाने के चलते अब अफगानिस्‍तान में महिलाओं की स्थिति पर अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय ने चिंता ज़ाहिर की है। बीते दो दशकों में यहां पर कई ऐसी हस्तियां सामने आईं, जिन्‍होंने अपने-अपने तरीकों से देश के इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया है।

निलोफर रहमानी ने भरी सपनो की उड़ान

इसी लिस्ट में एक नाम निलोफर रहमानी (Niloofar Rahmani) है, जिन्‍होंने अफगानिस्‍तान एयरफोर्स (Afghanistan Air force) की यूनिफॉर्म पहनकर एक नया इतिहास रचा था। निलोफर ने तालिबान की हर ध-मकी को दरकिनार किया और अपने मकसद को हासिल किया, जो आज अफगानिस्‍तान की हर लड़की चाह रही है। जाज अफगानिस्‍तान की हर लड़की पंख लगाकर उड़ जाना चाहती है।

आज 29 साल की निलोफर रहमानी (Niloofar Rahmani) अफगानिस्‍तान एयरफोर्स के इतिहास में पहली महिला फिक्‍स्‍ड विंग पायलट बनने का नाम दर्ज़ करवा चुकी है। साल 1992 में अफगानिस्‍तान में जन्‍मीं निलोफर का सपना बचपन से ही एक फाइटर पायलट बनने का था।

साल 2011 में जब निलोफर अफगान एयरफोर्स एकेडमी से सेंकेड लेफ्टिनेंट बनकर आई, तो उन्‍हें और उनके परिवार को तालिबान की ओर से धम-कियां मिलीं। उनके परिवार और निलोफर ने हिम्‍मत नहीं हारी और निलोफर अपनी पायलेट की ड्यूटी पूरी करती रहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स बताती है की उनके पिता भी अफगान एयरफोर्स का हिस्‍सा रह चुके हैं। अपने पिता को देखकर उन्हें भी यही काम करने का विचार आता था। निलोफर ने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए सब कुछ दाव पर लगा दिया और करीब एक वर्ष तक अंग्रेजी की पढ़ाई की। निलोफर किसी भी कीमत पर फ्लाइट स्‍कूल में एडमिशन का मौका हाँथ से नहीं जाने देना चाहती थीं।

तालिबान को निलोफर की उड़ान रास नहीं आई

कुछ समय बाद तालिबान की तरफ से इन्हे आगाह किया जाने लगा, लेकिन इसके बाद भी वह अपनी उड़ान भर्ती रहीं। साल 2015 में उन्‍हें अमेरिकी विदेश विभाग के तहत आने वाले इंटरनेशनल वीमेन ऑफ करेज अवॉर्ड से नवाजा गया था।

जब निलोफर 18 वर्ष की थी तो अफगान एयरफोर्स ने महिलाओं की भर्ती के लिए प्रोग्राम शुरू किया। 2011 में निलोफर ने अपने परिवार की मदद से इस प्रोग्राम को ज्‍वॉइन कर लिया। जिस समय निलोफर ट्रेनिंग कर रही थी उन्‍होंने वॉल स्‍ट्रीट जनरल को दिए अपने इंटरव्‍यू में कहा था कि अफगानिस्‍तान में महिलाओं को यह अधिकार होना चाहिए।

अफगानिस्‍तान एयरफोर्स को छोड़ना पड़ा

सभी मुश्किलों और Taliban की वजह से निलोफर का यह सपना टूट गया और उन्‍हें अफगानिस्‍तान एयरफोर्स को छोड़ना पड़ गया। उनके परिवार को एक जगह से दूसरी जगह पर जाना पड़ रहा था। उनके पिता से कहा गया कि बेटी का मिलिट्री करियर देश की बाकी महिलाओं के लिए खतरा बन गया है। इसके बाद उनके पिता को नौकरी से हटा दिया गया। फिलहाल निलोफर अमेरिका के फ्लोरिडा (Florida) के टैंपा में रह रही हैं।

आपको बता दे की साल 2018 में अमेरिका (America) की तरफ से उन्‍हें शरण दी गई थी। फिलहाल उनकी बहन अफसून शरण के लिए कोशिश कर रही हैं। रहमानी ने कहा की वह अमेरिका में सुरक्षित हैं। सुरक्षा की इस भावना के बाद भी निलोफर अपने उस सपने के टूट जाने की वजह से दुखी हैं,जिसने उन्‍हें आसमान में उड़ना सिखाया।

फिलहाल वह फ्लोरिडा में एक ट्रांसलेटर की जॉब (Translator Job) करती हैं। तीन भाषाओं फारसी, दारी और इंग्लिश बोलने में माहिर निलोफर आज एक ट्रांसलेटर (Niloofar Rahmani is Translator now) है। अब भी निलोफर को वायु सेना का विमान उड़ाने की तमन्ना है और वे ऐसा दोबारा करना चाहती है।

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