वह मैथ्स टीचर, जिसने 1 रुपये फीस लेकर 500 छात्रों को इंजीनियर बनाया, यह काम कर मिसाल पेश की

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Mathematics Guru Rk Shrivastava
Story Of R K Srivastava MatheMatics Guru From Bihar. He take only 1 Rupee free for teaching students. He made over 500 Engineers.

Photo Credits: Twitter(@RKShrivastava58)

Patna: बिहार के छोटे से गॉव का लड़का जिसके खुद का जीवन दक्‍कतों और परेशानियों से भरा पड़ा था। आज वह एक महान मैथेमेटिक्‍स गुरू (Mathematics Guru) बन गया है और विद्यार्थीयों को केवल एक रूपये किे गुरू दक्षिना में पढ़ाता है। वह लड़का जिसने अपने जीवन के कठिन दौर में ऑटो तक चलाया और अपने घर को सहारा दिया। आज एक ऐसे मुकाम पर पहुँच गया है, जहां पर लोगों के पहुँचने का सपना होता है।

आपका जीवन चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियों में गुजरा हो, लेकिन अगर आपके हौंसले बुलंद हो और आपके अंदर कुछ कर दिखाने की चाहत हो। तो आप एक दिन ऐसे मुकाम पर पहुँच जाते है, जहॉं पर आप करोड़ो लोगो के लिए एक उदाहरण बन जाते है।

ऐसा ही कार्य बिहार के रोहतास जिले में छोटे से गॉंव विक्रमगंज में रहने वाले आर के श्रीवास्‍तव (R K Srivastava) ने कर दिखाया है। उन्‍होंने अपने कार्य से इतिहास में हमेशा के लिए अपना दर्ज करवा लिये है। भले ही उनकी पहले कि जिंदगी केवल एक गॉंव तक ही सीमित थी। पर आज वह अपने टेलेंट के दम से पूरे विश्‍व में अपने नाम का परचम लहरा रहे है।

आर के श्रीवास्‍तक गणित के महान टीचर (R K Srivastava Mathematics Guru) है, जिन्‍होंने अब तक 540 बच्‍चों को केवल एक रूपये में इंजीनियर बना दिया है और उनका यह सफर अभी भी चल रहा है। आर के श्रीवास्‍तव जी को लोग मैथेमेटिक्‍स गुरू के नाम से पुकारते है। आइये जानते है उनके सफर के बारे में।

आर के श्रीवास्‍तव का प्रारंभिक जीवन

आर के श्रीवास्‍तव की शुरूआती जिंदगी के वारे में बात की जाये, तो उनका जीवन काफी गरीबी में गुजरा था। उन्‍होंनें अपने जीवन में कई उतार चढाव देखे है, जब वह छोटे थे, उस समय उनके पिता जी का देहांत हो गया था। जिस वजह से उनके बड़े भाई ने उनके घर को संभाला उनके बड़े भाई ऑटो चलाया करते थे। उस समय आर के जी कॉलेज में थे।

जब वह देखते थे, कि उनका भाई ऑटो चला कर थक गया है, तो वह भी उनकी मदद करने के लिए ऑटो चलाया करते थे। ताकि वह भी घर में मदद कर सके। आर के श्रीवास्‍तव बचपन से ही काफी होशियार थे और उनकी गणित बहुत अच्‍छी थी।

कॉलेज में जब क्‍लास हो जाती थी, तो वह अपने साथी दोस्‍तों को मैथ्‍स पढाया करते थे और इससे जो भी उनकी इनकम होती थी। वह घर में दे दिया करते थे। पिता जी के बाद उनकी जिंदगी अच्‍छी खासी चलने लगी थी, कि तब ही उनके भाई का भी देहांत हो गया और आर के ऊपर पूरे घर कि जिम्‍मेदारी आ गई।

जीवन के इस कठिन दौर में आरके श्रीवास्‍तव ने हार नहीं मानी और आगे बढ़ते गये। जीवन के सबसे कठिन सफर में उनकी पढ़ाई उनके लिए वरदान साबित हुई और वह बच्‍चों को मैथ्‍स पढाने लगे और इस तरह उनके मैथेमेटिक्‍स गुरू बनने का सफर शुरू हो गया।

आर के श्रीवास्‍तब बने मै‍थेमेटिक्‍स गुरू

लोग आर के को मैथेमेटिक्‍स गुरू कहकर पुकारने लगे। आर के श्रीवास्‍तव के मैथेमेटिक्‍स गुरू बनने के बाद वह इतने में ही नहीं रूके। बचपन से ही उनके मन में कुछ अलग करने की चाह थी। इस वजह से वह कुछ नया करने की कोशिश किया करते थे। आर के इतने इंटेलिजेंट है, कि उन्‍होंने पाइथागौरस थ्‍योरम को 52 अलग अलग तरीके से सिद्ध किया है। उनके इसी कार्य की वजह से ‘वर्ल्‍ड बुक ऑफ रिकॉर्डस’ में उनका नाम लिख चुका है।

आर के ने अपनी क्‍लास में पाइथागोरस थ्‍योरम को 52 अलग तरीके से बिना रूके प्रूफ किया है। जिसकी वजह से उनका नाम वर्ल्‍ड बुक और रिकॉर्डस में दर्ज हो गया है। उनके इस कार्य के लिए लोग उन्‍हें बधाई दे रहे है। आर के ने अपने इस कार्य से साबित कर दिया की वह वाकई में मैथेमेटिक्‍स गुरू कहलाने के लायक है।

कई रिकॉर्डस में है उनका नाम

केवल यह ही नहीं इसके पहले भी आर के ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस’ में अपना नाम लिखवा चुके हे। उन्‍होंने 182 बार पूरी रात 12 घंटे तक क्‍लास ली हे। उनके इस कार्य के लिए भी उनका नाम पहले इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में लिख चुका है। आर के जी की यह प्रतिभा तारीफ के काबिल है।

आरे के का जीवन भले ही गरीब परिस्थिति और दिक्‍कतों मे बीता हो। लेकिन वह यह नहीं चाहते थे। कि बिहार के ओर भी गरीब बच्‍चे उनकी तरह दिक्‍कतों का सामना करें।

इसलिए उन्‍होंने बच्‍चों को इंजीनियरिंग की शिक्षा देने का फैसला किया और आज वह केवल 8 रूपये प्रति माह से बच्‍चों को आईआईटी, वीसीईसीई, एनआईटी कि क्‍लास देते हे। और कई बच्‍चो का सेलेक्‍शन भी करवा चुके है। आर के ने अब तक 540 बच्‍चों को इंजीनियर बनाया है। वह यहीं नहीं रूके है, आगे भी उनका यह सफर चालू है।

आर के जेसे टीचर हमारे देश के लिए एक अनमोल रतन की तरह है, जो हर कदम पर देश को गर्वान्‍वित महसूस करवाते है। वर्ल्‍ड बुक ऑफ रिकॉर्डस और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में अपना नाम दर्ज करवा के उन्‍होंने करोड़ो देशवासियों का मन जीत लिया है।

उनका यह कार्य तारीफ के काबिल है और हम उनके आगे के जीवन के लिए उन्‍हें बधाईया देते है। ताकि वह इसी तरह से आगे बढ़ते रहे और देश का नाम रौशन करते रहे। हमें आर के श्रीवास्‍तव जी की इस उपलब्‍धि पर गर्व है।

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