देश की पहली महिला कुली, पति के जाने के बाद संभाली 3 बच्चों की ज़िम्मेदारी

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Meet Sandhya Marawi, India's 1st Woman Coolie Who's Breaking Stereotypes To Earn For Her Family. Sandhya Marawi, female Coolie from Madhya Pradesh.

File Photo

Jabalpur: अधिकतर लोगों से सुना है कि दुनिया में मां जैसा कोई रिश्ता नहीं होता है। अपने बच्चों के लिए मां कुर्बानियों की कोई बराबरी नहीं कर सकता। मां की जिम्मेदारियां तब और भी अधिक बढ़ जाती हैं जब उसके बच्चों के पिता और उसका पति दुनिया को अलविदा कह गए हो।

ऐसे में मां को ही बच्चों के लिए पिता की भी सभी जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती है। इसके लिए उसे समाज में रहकर कड़ी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है। ऐसी ही कहानी है 3 बच्चों की माँ की। जिसने अपने बच्चों को पालने के लिए कुली बनाना सही समझा।

एक महिला की जिंदगी हमेशा से संघर्षो का पिटारा होती है। लेकिन अगर वही कम समय में ही उसका उसके पति से साथ छूट जाए, पति दुनिया को अलविदा कह जाए तो उसपर बच्चों की जिम्मेदारी आ जाती है ये तो वही जानती है कि उस पर क्या गुजराती है, लेकिन उसके बावजूद भी एक महिला अपने घर और अपनी जिम्मेदारी को निभाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

एक ऐसी ही महिला के बारे में बात कर रहे, जिसके पति के निधन के बाद अपने बच्चों के परवरिश के लिए कड़ी मेहनत करके उनको अफसर बनाने का सपना लिए रोज कड़ी मेहनत करती है ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सके। संध्या बांह पर पहने पीतल के कुली नंबर-36 के बिल्ले को भी दिखाती है, मानो नाम और काम के 36 के आंकड़े को समझा रही हों। 65 पुरुष कुलियों के बीच वह अकेली महिला कुली है।

संध्या को घर से कटनी रेलवे स्टेशन तक आने के लिए जबलपुर से रोज 45 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। 2016 में बीमार पति की छोड़ जाने के बाद यह मजबूरी थी। अब लक्ष्य बन गया है। वह कहती है, कोई भी काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता, सोच और विचार छोटी होती है। संध्या की इक्षा है कि उसके बच्चे पढ़-लिखकर भारतीय सेना में शामिल हों।

30 वर्ष की संध्या अन्य महिलाओं की तरह ही पहले अब घर पर अपने बच्चों को संभाला करती थी लेकिन इस बीच उनके पति भोलाराम अचानक से बीमार हो गए और बीमारी के चलते इस दुनिया को 22 अक्टूबर 2016 अलविदा कह गए। लेकिन ऐसे में अपने पीछे छोड़ गए संध्या के कंधों पर घर और बच्चों की सारी जिम्मेदारी। अब अकेले ही संध्या को देखना था।

जिसके चलते संध्या को कटनी जंक्शन पर कुली का काम करना पड़ रहा है वैसे तो इनका पूरा नाम संध्या मरावी है। उन्होंने बताया है कि यह काम मजबूरी में करना पड़ता है, क्योंकि उनको अपनी बूढ़ी सास और तीन बच्चों का पालन पोषण के साथ उनको अच्छी शिक्षा भी देना है। पहले वह अपने पति के साथ कटनी में रहा करती थी और उनके तीन बच्चे हैं।

संध्या का कहना है कि वो अपने 11 साल के बेटे शाहिल जो चौथी कक्षा में पढ़ता है, कक्षा 3 में पढ़ने वाला 8 साल के हर्षित और 5 साल की बेटी जो केजी टू में पढ़ाई कर रही है, को अफसर बनाने के लिए इतनी कड़ी मेहनत कर रही है।

जानकारी के अनुसार संध्या हर रोज 45 किलोमीटर का रास्ता तय करके जबलपुर पहुंचती है और यहां वो शाम होने तक काम करती है। शाम होने के बाद वो घर वापस लौट जाती है जहां उसके बच्चे उसका इंतेजार कर रहे होते हैं। लेकिन संध्या कभी हार नही मानती ना कभी थकती गई। बच्चों को अफसर बनाने का सपना उसके हौसले को मजबूत बना देते है।

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