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Meerut: दोस्तों जिन्हे सफल होना होता है उनकी सफलता की राह में कभी कोई भी मुसीबत रोड़ा बनकर नहीं आती। बल्कि हर सफल व्यक्ति ने अपनी परेशानियों को सॉल्व कर सलूशन में कन्वर्ट किया है। या फिर उन्हें एक चैलेंज की तरह लेकर के आगे बढ़े, कहते हैं बिना जुनून के सफलता हासिल हो नहीं सकती है।
ऐसे ही आज की कहानी है, जो आपको आपकी सफलता के लिए अच्छी खासी प्रेरणा देगी। क्योंकि हम बात करने वाले हैं ऐसी छात्रा की जिसकी एक आंख की रोशनी नहीं थी।
परिवार की आर्थिक परिस्थिति बहुत ही कमजोर होने के बावजूद अपने विषय में गोल्ड मेडल (Gold Medal) हासिल किया। पिताजी रिक्शा (Rickshaw Puller) चलाते हैं। सारी विपरीत परिस्थितियां भी इन्हे रोक ना सकी। आइए जानते हैं डिटेल्स से कॉलेज छात्रा कहां से हैं और कैसे हासिल की उन्होंने यह सफलता।
बुलंदशहर से है हमारी आज की स्टोरी
जानकारी के अनुसार दोस्तों उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के जिला बुलंदशहर के गुलावटी ग्राम के अंतर्गत रहने वाली शमा परवीन ने अपने बीएससी के दौरान गणित सब्जेक्ट में गोल्ड मेडल हासिल किया। उनके पारिवारिक बैक ग्राउंड की बात करें, तो शमा परवीन बताती है कि, उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर है, क्योंकि उनके पिता परिवार को पालने के लिए फेरी लगाने का व्यापार करते हैं जिसमें आमदनी बहुत ही कम होती है।
वहीं दूसरी तरफ उनकी एक आंख ही काम करती है, एक अक्षय को नेत्रहीन है, इसलिए उन्हें जल्दी समझ में आ गया की सफलता के लिए उनके पास एकमात्र विकल्प है और वो है उच्च शिक्षा इसलिए इन सभी समस्याओं के बावजूद उन्होंने अपना पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर रखा। स्कूल से लेकर कॉलेज तक उन्होंने सभी क्लास की पढ़ाई में मेरिट अंक हासिल किए थे, जिससे उन्हें आगे बढ़ने में लगातार मिलती रही।
इस कॉलेज को स्टूडेंट है ये प्रतिभावान छात्रा
शमा की एजुकेशन कि हम बात करें तो पहले उन्होंने स्कूल के दौरान जिला में टॉपर रहकर डिस्ट्रिक्ट टॉप किया था और यहीं से उनकी सफलता की जर्नी शुरू हुई। बाद में मैथ सब्जेक्ट (Maths Subject) से बीएससी करने के लिए उन्होंने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।
लगातार अथक प्रयास करते हुए शमा परवीन (Shama Parveen) ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (Chaudhary Charan Singh University) से मैथ्स में बीएससी कंप्लीट कर गोल्ड मेडल हासिल किया। यह स्वर्ण पदक शमा परवीन को राज्यपाल के हाथों से पुरस्कार स्वरूप सम्मानित किया गया।
जिस दौरान उन्हें यह सम्मान मिला उनके पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। सम्मान का ये पल उनके परिवार एवं उन सभी रिश्तेदारों के लिए बहुत ही भावुक था, जो समा के तरक्की के लिए दिन बाद दुआ करते थे।
आंख की कमी भी आड़े नहीं आई, बनाया उसे ताकत
शमा परवीन ने बातचीत के दौरान बताया कि वह एक आंख से देखने में सक्षम नहीं है अर्थात व नेत्रहीन है, सिर्फ एक आंख ही उनकी काम करती है। इसके चलते उन्हें शुरू से ही बच्चों और समाज के कुछ लोगों के द्वारा तानों का सामना करना पड़ा।
जिसमें उसे सुनना पड़ता था की नेत्रहीन व्यक्ति इस दुनिया में जिंदगी में कुछ नहीं कर सकता। परंतु समाज के द्वारा मिलने वाले तानों को ताकत में बदला यह निर्णय लिया कि कुछ भी हो जाए, वह अपनी इस कमी के चलते कभी हार नहीं मानेगी बल्कि इसे ताकत के रूप में इस्तेमाल करेगी।
शमा की सफलता के पीछे उनके पिता का भी अहम रोल है
शमा परवीन के पिता यूनुस खान ने बताया कि जब उनकी पुत्री की उम्र महज 1 साल की थी, तब किसी वजह से उसकी एक आंख के देखने की शक्ति चली गई तब शुरू में तो वह बहुत चिंतित थे की ऐसी परिस्थिति में बेटी का भविष्य क्या होगा। परंतु उन्होंने हिम्मत नहीं हारी स्वयं रिक्शा चलाते हैं।
अपनी आमदनी का आधे से अधिक पैसा उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में खर्च किया और उसे हमेशा सपोर्ट दिया की बाहरी सुंदरता से कुछ नहीं होता। यदि आप अपने अंदर के टैलेंट को डिवेलप करते हैं, तो दुनिया आपको सलाम करेगी और इसी प्रेरणा के चलते शमा ने सारी परेशानियों से लड़ते हुए यह गोल्ड मेडल हासिल किया। हम उसके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।



