
Delhi: अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट अपना बहुप्रतीक्षित फैसला शनिवार सुबह साढ़े 10.30 बजे सुनाने वाला था जो अब सुना दिया गया है। शीर्ष न्यायालय की वेबसाइट पर एक नोटिस के ज़रिये शुक्रवार शाम को इस बाबत जानकारी दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 16 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी।
अब शनिवार 9 नवंबर की सुबह अयोध्या केस का फैसला आने का तीन था। पूरा देश अपना दिन थाम कर मीडिया रिपोर्ट्स पर टकटकी लगाए बैठ गया। अब आज का दिन भारत के इतिहास में दर्ज़ हो चूका है, क्योंकि अरोध्य कई का फैसला कोर्ट ने दे दिया। अब अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने से देश में ख़ुशी की लहार है सिवाए कुछ चरमपंथी लोगो और गुटों को छोड़ दिया जाये तो सभी इस फैसले से राज़ी दिखाई दे रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जज गोगई ने सिया बफ्फ बोर्ड की अर्ज़ी खारिज कर दी और कहा की सारे सबूतों और बहस के बाद यह पाया गया की उस स्थान पर राम मंदिर था और हिंदुयों की आस्था भी ऐसा कहती है। जज ने कहा की हिन्दू मान्यताओं के अनुसार अयोध्या भगवान् राम की जन्म भूमी है। अयोध्या में विवादित भूमी पर राम मंदिर बनेगा और कोर्ट ने अयोध्या में ही दूसरे स्थान पर 5 एकड़ जमील मस्जित बनाने भी दी है।
According to news agency ANI, Supreme Court Judge said, “Titles can’t be decided on faith and belief but on the claims. Historical accounts indicate the belief of Hindus that Ayodhya was the birthplace of Lord Ram. There is evidence that Ram Chabutra, Sita Rasoi was worshiped by the Hindus before the British came. Evidence in the records shows that Hindus were in the possession of outer court of the disputed land.
Supreme Court: There is evidence that Ram Chabutra, Sita Rasoi was worshipped by the Hindus before the British came. Evidence in the records shows that Hindus were in the possession of outer court of the disputed land. #AyodhyaJudgment https://t.co/7o15aF4PkA
— ANI (@ANI) November 9, 2019
सुप्रीम कोर्ट कहा की इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मुसलमानों ने मस्जिद को छोड़ दिया। हिंदुओं का मानना था कि भगवान राम की जन्मस्थली मस्जिद के भीतरी प्रांगण में थी। स्पष्ट रूप से पाया गया कि मुसलमानों ने आंतरिक आंगन के अंदर प्रार्थना की और हिंदुओं ने बाहरी आंगन में प्रार्थना की थी। इस बात के प्रमाण हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरा, सीता रसोई की पूजा हिंदुओं द्वारा की जाती थी। अभिलेखों में साक्ष्य से पता चलता है कि हिंदू विवादित भूमि के बाहरी लोगो के कब्जे में थी।
आपको बता दें की इससे पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने ऐलान किया था की कोर्ट जो भी निर्णय सुनाएगा, हम उसे मंजूर करेंगे। इसके साथ ही जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मुसलमानों और अन्य समुदाय के लोगो से कोर्ट के निर्णय का सम्मान करने की गुजारिश भी की थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश गोगोई पहले ही कह चुके थे कि वह रिटायर होने से पहले इस विवादित मामले में आखिरी निर्णय देना चाहते हैं। न्यायाधीश गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे है।
Supreme Court: Titles can’t be decided on faith and belief but on the claims. Historical accounts indicate the belief of Hindus that Ayodhya was the birthplace of Lord Ram. #AyodhyaJudgment
— ANI (@ANI) November 9, 2019
केंद्र सरकार ने इस निर्णय के को देखते हुए कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए केंद्रीय शस्त्र पुलिस बल के करीब चार हजार जवानों को उत्तर प्रदेश रवाना कर दिया था। यह पुलिस बल 18 नवंबर तक राज्य में ही तैनात रहेगा। जिसमें केंद्रीय मंत्रालय ने अयोध्या में पैरामिलिट्री फोर्स की पंद्रह कंपनियों को भेजने की रजामंदी दी थी। मंत्रालय के आदेश के अनुसार पैरा मिलिट्री फोर्स की 15 कंपनियों के अतिरिक्त BSF, RAF, CISF, ITBP और SSB की तीन-तीन कंपनियां भेजने को भी रजामंदी दी गई थी।
इस फैसले से कुछ लोगो का नाराज़ होना भी लाज़मी है। इसे देखते हूऐ निर्णय आने से पहले ही शिया वक्फ बोर्ड ने सभी वक्फ संपत्तियों पर होने वाले आयोजनों पर पाबंदी लगा दी थी। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने वक्फ बोर्ड की इमामबाड़ा मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाह, मजार, कार्यालय जैसे स्थनों पर अयोध्या मामले को लेकर किसी तरह का भटकाऊ भाषण नहीं करने का निर्देश पहले ही दे दिया था। इनका आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट किया गया था की यदि कोई आदेश का पालन नही करता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी। आदेश की प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पहुंचा दी गई थी।



