
Pathankot: हर विद्यार्थी निजी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नहीं होता है, इसीलिए सरकार द्वारा बच्चो की शिक्षा में रुकावट ना हो इसके लिए हर क्षेत्र फिर चाहे वह शहर हो या फिर गांव हर जगह सरकारी स्कूल बनाए है। परंतु सरकारी स्कूल भ्रष्टाचार का शिकार हो गए है।
सरकार के द्वारा स्कूल की शिक्षा से संबंधित और भवन निर्माण और अन्य जरूरी चीजों के लिए सरकार की तरफ से भरपूर पैसा दिया जाता है। परंतु अन्य व्यक्तियों द्वारा उन पैसों का सही इस्तेमाल नहीं होता, इस वजह से सरकार के द्वारा मिलने वाली सेवा बच्चों को अच्छी तरह से नहीं मिल पाती।
इस समय शिक्षा एक व्यवसाय बन गया है, बच्चे गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ने के बाद कोचिंग पर निर्भर होते है या फिर प्राइवेट स्कूल में एक बड़ी सी रकम शुक्ल के तौर पर देते है। इन सब के बीच हमें एक ऐसे प्रधान आचार्य से मिलने का मौका मिला, जिन्होंने अपने सरकारी स्कूल (Government School) को कुछ इस तरह बनाया की उस स्कूल के आगे प्राइवेट स्कूल भी नहीं लगते।
स्कूल की बिल्डिंग से लेकर खेलने का मैदान और कक्षाओं को भी काफी स्मार्ट (Smart School) बनाया गया। यह स्कूल करीब 3 वर्षों से एक स्मार्ट स्कूल को रिप्रेजेंट करता है। इस स्कूल की सारी जिम्मेदारी और उसे स्मार्ट बनाने में स्कूल की प्रधानाचार्य रघुवीर कौर है। आइए इस स्कूल के स्मार्ट लुक के बारे में बात करते हैं।
इस स्कूल को मिला है बेस्ट स्कूल का अवार्ड
पंजाब राज्य के पठानकोट जिले के अंतर्गत आने वाला गांव बधानी मैं स्थापित सरकारी स्कूल (Badhani Government School) आज कई निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा है, इस स्कूल की प्राचार्या ने समाज के व्यक्तियों और अपने सहकर्मियों के साथ मिलकर इस स्कूल की इमारत को एक स्मार्ट इमारत बनाया साथ ही स्कूल के छात्रों द्वारा खेल से लेकर शिक्षा के हर क्षेत्र में इस स्कूल का नाम रोशन किया।
इस स्कूल की प्राचार्या (Principal Raghuveer Kaur) ने एक इंटरव्यू में बताया कि करीब साढ़े 3 वर्षों से सरकार की तरफ से इस स्कूल के लिए कोई भी फंड नहीं मिला। जिसके कारण स्कूल लगभग समाप्त होने की कगार में था। परंतु समाज सेविकाओं और ग्राम वासियों ने मिलकर इस स्कूल की मरम्मत कराई और उसे एक नया जीवन दिया।
इस सुधार के बाद पंजाब (Punjab) का यह स्कूल मेरा पिंड मेरी शान योजना के अंतर्गत बेस्ट स्कूल का अवार्ड जीत चुका है। इस अवार्ड के साथ हीं 100000 Ru का इनाम भी प्राप्त हुआ है, साथ ही उस पिंड का नाम रोशन हुआ। उसके बाद शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार भी इस स्कूल का करीब 3 बार दौरा कर चुके हैं।
इस तरह बना बधानी स्कूल एक स्मार्ट स्कूल
पंजाब के बधानी गांव का यह स्कूल काफी पुराना और सरकारी स्कूल है। इस स्कूल को वर्ष 2001 में मिडिल स्कूल से सीनियर सेकेंडरी स्कूल में तब्दील किया गया। उस समय स्कूल बहुत पुराना और खंडहर की तरह दिखाई पड़ता था। उसके बाद वर्ष 2015 में प्रधानाचार्य रघुवीर कौर ने इस स्कूल के कार्यभार को अपने कंधों पर लिया।
वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2017 तक उन्होंने इस स्कूल को अपने स्टाफ और समाजसेवियों के खर्चे पर इस स्कूल में सुधार किया। वर्ष 2015 से लेकर अभी तक उस स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या डबल हो चुकी है।
सभी बच्चों के अभिभावक चाहते है के उनका बच्चा अच्छी तरह पढ़े लिखे और उनका नाम रोशन करें, इसलिए अभिभावकों की पहली पसंद प्राइवेट स्कूल होते हैं, परंतु पंजाब के बधानी गांव के इस स्कूल का एक विद्यार्थी जो साइंस स्ट्रीम से था। उसने प्राइवेट स्कूल के विद्यार्थियों को तक मात दे दी और संपूर्ण जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
इसी स्कूल के एनसीसी के एक क्रेडिट ने गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर दिल्ली परेड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए पायलटिंग कर चुका है। इतना ही नहीं खेल के क्षेत्र में भी इस स्कूल की छात्रा ने पूरे देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है।
परिवार से बढ़कर स्कूल को माना
प्रधानाचार्य रघुवीर कौर बताती है कि जब उन्होंने वर्ष 2015 में इस स्कूल को जॉइन किया था। उस वक्त इस स्कूल की हालत काफी ज्यादा खराब थी। स्कूल की पूरी बिल्डिंग लगभग ध्वस्त होने ही वाली थी। उस समय उन्होंने इस बिल्डिंग की मरम्मत करवाई।
वे बताती है कि उस समय इस स्कूल का हर कमरा बारिश के मौसम में टपकता था और जमीन में सीलन आती थी। ऐसी स्थिति में कई बार बच्चों को एक ही कमरे में बैठा कर शिक्षा देना पड़ता था जो काफी कठिन होता था।
उन्होंने स्कूल की इमारत की मरम्मत कराई जिससे आज की स्थित में कमरों की दीवार में थोड़ी सी भी सीलन तक दिखाई नहीं पड़ती। इस काम को करने के लिए उन्हें 2 वर्षों तक बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ी। उनकी गर्मी की छुट्टियां भी इन्हीं सब चीजों में निकल गई। उन्होंने और उनके स्टाफ ने गर्मियों की छुट्टियों में भी अपने परिवार को समय नहीं दिया उनके लिए परिवार से बढ़कर स्कूल की जिम्मेदारियां हुई।
स्कूल की मरम्मत के लिए सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली, इसीलिए ग्राम वासियों और स्टाफ के साथ-साथ एसएमसी से भी आर्थिक मदद ली और स्कूल को एक नया जीवन दिया।
5 कमरों के लिए मिले फंड को उपयोग किया 7 कमरों के लिए
प्रधानाचार्य रघुवीर कौर कहती है कि बीते 2 वर्षों पूर्व उन्हें विभाग की तरफ से 5 कमरों के निर्माण के लिए ग्रांड प्रदान की गई थी। हर कमरे को 755000 Ru का फंड आ गया था, परंतु उन्होंने अपने स्टाफ के साथ मिलकर योजना बनाई और 5 कमरों के फंड को 7 कमरे के निर्माण के लिए उपयोग किया गया।
इस निर्माण के लिए उन्होंने सरकार के द्वारा तय किया गया मापदंड और बचत का और बिल्डिंग निर्माण में उपयोग होने वाले मटेरियल का भी पूरा ध्यान रखते हुए निर्माण किया और प्रत्येक दोनों कमरे से थोड़ा-थोड़ा पैसे बचाकर अन्य दो कमरों का निर्माण किया गया। इस प्रकार पंजाब के बधानी गांव का स्कूल आज एक स्मार्ट स्कूल है।



