पहली नजर में ‘मिस इंडिया’ स्वरुप पर हार बैठे थे दिल, परेश रावल की लव स्टोरी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं

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Paresh Rawal wife Swaroop Sampat
Meet Paresh Rawal wife Swaroop Sampat Who was Miss India. Paresh Rawal Marriage after Love At First Sight with Swaroop Sampat. Success Love Story.

File Photo Credits: Twitter

Mumbai: पहली नज़र का प्यार बहुत कम लोगों की ज़िन्दगी में होता है। पहली ही नज़र में जिसे चाहो वो आपका हमसफ़र बन जाए। उससे ज़्यादा नसीबवाला भला कहां मिलेगा। स्वरूप संपत और परेश रावल की रंगमंच की यह जोड़ी असल ज़िंदगी में भी उतनी ही कामयाब है। जितनी रुपहले परदे पर।

बॉलीवुड के मशहूर कलाकार परेश रावल (Paresh Rawal) की लव स्टोरी (Love Story) हर युवा जोड़े के लिए एक प्रेरणादायक है। जहां एक ओर मिस इंडिया (Miss India) रह चुकी स्वरूप संपत (Swaroop Sampat) बॉलीवुड एक्ट्रेस, टीवी एक्ट्रेस और साथ ही एक बेहतरीन थियेटर पर्सनालिटी हैं। फ़िल्म नाखुदा से बॉलीवुड में डेब्यू करनेवाली स्वरूप संपत ने सवाल, लोरी, हिम्मतवाला जैसी कई सुपरहिट फ़िल्में कीं। उन्होंने कई मराठी और गुजराती प्ले में एक्टिंग और और डायरेक्शन दोनों साथ किया है।

हाल ही में वो करीना कपूर की फ़िल्म की फिल्म और फिर उरी द सर्जिकल स्ट्राइक में भी नज़र आई थीं। वहीं दूसरी ओर परेश रावल ने शुरुआती दौर में ही Negative किरदार निभाने के बाद, जो कॉमेडी की बरसात अचानक शुरू की तो अंदाज़ अपना अपना, तेजा या हेरा फेरी के बाबू भइया (Babu Bhaiya Paresh Rawal) की कॉमेडी के बाद हंगामा, गोलमाल और मालामाल वीकली जैसी फिल्मों में दर्शकों को हंसा हंसाकर लोट पोट कर दिया था।

परेश रावल ने अपने किरदार के साथ ही 2014 से लेकर 2019 तक राजनीतिक पारी भी खेली। वो गुजरात से बीजेपी के लोकसभा सांसद चुने गए थे। साल 2014 में ही उन्हें अपने अभिनय के लिए भारत सरकार की तरफ़ से पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।

जब परेश को हुआ पहली नज़र का प्रेम

ये उन दिनों की बात है। जब परेश रावल और स्वरूप संपत कॉलेज में पढ़ाई करते थे। कॉलेज के मस्तीभरे दिनों में से ही एक ख़ुशगवार दिन था। जब परेश रावल ने गुलाबी साड़ी पहने एक बेहद ख़ूबसूरत लड़की को कॉलेज में ब्रोशर बांटते हुए देखा।

गुलाबी साड़ी में उस लड़की (Swaroop Sampat) की गुलाबी रंगत ने परेश रावल को ऐसा दीवाना बनाया कि उसी वक्त उन्होंने अपने मित्र को कहा कि मैं इसी लड़की से एक दिन सादी ज़रूर करूंगा। यह लड़की कोई और नहीं बल्कि स्वरूप संपत ही थीं।

शादी के बाद दिए एक इंटरव्यू में स्वरूप संपत ने बताया था कि, उस दिन जब परेश रावल ने पहली बार मुझे देखा और अपने दोस्त से ऐसा कहा। तो मैंने उनकी बात सुनकर भी अनसुनी की थी। वो ब्रोशर लेने के बहाने काउंटर पर आए और फिर थोड़ी देर में चले गए। लेकिन सबसे मजेदार बात यह रही कि करीब सालभर तक इन्होंने मुझसे दोस्ती करने की कोई कोशिश भी नहीं की।

जब दिल दे बैठीं पत्नी

एक इंटर कॉलेज ड्रामा कॉम्प्टीशन के दौरान जब उन्होंने परेश रावल को स्टेज पर अभिनय करते हुए देखा। तो बस देखती ही रह गयीं थी। उनकी बेहतरीन अदाकारी ने स्वरूप का मन पूरी तरह मोह लिया था। बकौल स्वरूप संपत सिर्फ़ मैं ही नहीं, हॉल में बैठे लगभग सभी लोगों का यही हाल था।

ड्रामा थोड़ा हिंसक तो था। लेकिन परेश की अदाकारी ने सबको अपना मंत्रमुग्ध कर दिया था। उस समय जब ड्रामा ख़त्म हुआ, तो पूरे हॉल में सन्नाटा था। स्वरूप (Swaroop Sampat) बैकस्टेज जाने से ख़ुद को रोक नहीं पायीं। परेश रावल को उन्होंने बेहतरीन अभिनय के लिए बधाई दी। उसके बाद इस कपल को किसी बहाने की ज़रूरत नहीं पड़ी।

मिस इंडिया का खिताब

कॉलेज के साथ-साथ थियेटर भी चल ही रहा था। उसी दौरान स्वरूप संपत के पिता ने उन्हें मिस इंडिया ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया, पर स्वरूप का इस कोई इरादा नहीं था। उन्होंने यह बात अपने भाई और परेश रावल को बताई। दोनों ने ही उनकी बात का समर्थन किया। ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लेने की सलाह दी। परेश रावल के सपोर्ट से उन्होंने कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया और नसीब देखिए प्रतियोगिता जीतकर उन्होंने साथ ही1979 में मिस इंडिया का ताज अपने सर पर सजाया।

कहानी में आया एक अजीब मोड़

लेकिन कॉन्टेस्ट जीतने के ही साथ हमेशा खड़े रहनेवाले परेश रावल के मन में कहीं कुछ खटकने लगा। स्वरूप संपत ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके मन में न जाने कहां से यह बात आ गई कि अब पहले जैसा कुछ नहीं रहेगा। सबकुछ बदल जायेगा।

उनके मन में यह डर समा गया था कि मैं बदल जाऊंगी। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। मैंने उनका डर दूर किया। उन्हें पापा से अपना हाथ मांगने के लिए कहा। ज़िंदगी में किसी और चीज़ की बजाय यह मेरे लिए यह सबसे ज़्यादा मयबे रखता था। इसलिए जैसा मैंने चाहा था। वैसा ही हुआ। परेश ने पापा से शादी की बात की और हमारी शादी पक्की भी हो गयी।

पेड़ के नीचे लिए सात फेरे

दोनों ही बेहद शानदार शादी चाहते थे। वो भी सिर्फ़ घरवालों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में। वो सबको अपनी शादी के बारे में नहीं बताना चाहते थे। मुंबई के लक्ष्मी नारायण मंदिर में शादी का कार्यक्रम रखा गया। स्वरूप संपत ने बताया, कि हमारे परिवार वाले 129 साल बाद बेटी की शादी देख रहे थे।

इसलिए मैंने सबसे पहले ही कह दिया था, कि कोई बहुत ज़्यादा इमोशनल मत होना। मैंने अपनी शादी ख़ूब एंजॉय की। हमने शादी की विधि के लिए 9 पंडित बुलाए थे। जो मंत्र जाप कर रहे थे। बाकी दुल्हनों की तरह बिना शरमाये मैंने अपनी शादी का खाना ख़ूब एंजॉय किया। शादी में बहुत ज़्यादा तामझाम नहीं था। बल्कि एक बहुत बड़ा पेड़ था। जिसके नीचे हमने सात फेरे लिए थे।

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