
Photo Credits: Nitya Budhraja on Social Media
Delhi: पहाड़ों में घूमना फिरना किसे पसंद नहीं आता। पहाड़ों की ताजी हवा एवं जंगलों की हरियाली को देखना सभी के मन को भाता है। पहाड़ों के आसपास की मिट्टी की सुगंध मन को भाती है। नित्या (Nitya Budhraja) दिल्ली शहर की एक बहुत ही मन मौजी लड़की है। जो दिल्ली (Delhi) की इवेंट कंपनी में वर्क करती थी।
इवेंट की सजावट सामग्री का कूड़ा एकत्रित हो जाता था। यह कूड़ा कचरा ना तो नष्ट होने वाला था, ना ही उसका पुनः निर्माण हो सकता था। पर्यावरण के प्रति होती लापरवाही नित्या को बर्दाश्त ना हुई और इवेंट कंपनी की जॉब नित्या ने छोड़ दी।
नित्या पहाड़ों में कॉटेज चलाने लगी
नित्या उत्तराखंड के पहाड़ों (Uttarakhand Mountains) में एक छोटे से गांव में सात ताल (Sattal or Sat Tal) में निवास करती है। नित्या वहां कॉटेज (Cottage) भी चलाने लगी। कॉटेज का नाम अपने पिता के नाम पर नवीन ग्लेन (Naveen Glen) रखा है एवं कैफे का नाम मां के नाम बॉब्स (Bobs) रखा।
नित्या और उनके परिवार ने गांव के सरकारी स्कूल को भी चलाने का बीड़ा उठाया और वहां अनेक पेड़ लगाकर जंगल को हरा भरा कर दिया। प्रकृति से जुड़े रहने के लिए नित्या ने दिल्ली की स्टार्ट अप कंपनी में वर्क करना प्रारंभ किया।
नित्या को पहाड़ों एवं वनों से संबंधित कार्य मिला। नित्या को वनों से संबंधित एवं पहाड़ियों से संबंधित काम को करना पसंद आ गया था। रुपयों की कमी के चलते ट्रैकिंग कंपनी ठप हो गई। उन्होंने हिम्मत नही हारी और नित्या को उत्तराखंड प्रॉपर्टी को सुरक्षित एवं उसकी देखभाल करने का काम मिला।
पिता ने वर्षों पहले सात ताल में जमीन खरीदी थी
इस प्लाट में पानी बिजली की सुविधा नहीं थी। प्लाट तक जाने वाला रास्ता भी कच्चा था। इन सभी परेशानियों को सहन करके भी नित्या वहां रहने लगी। लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उनके पिता का देहांत हो गया। उनके पिता ने कई वर्षों पहले सात ताल में जमीन खरीदी थी। जंहा नित्या और उनकी मां रहने लगी।
Nitya Budhraja at Uttarakhand Mountains who is owner of Naveen Glen Cottage in Sat Tal.
Photo Credits: Nitya Budhraja pic.twitter.com/eiSrTJ6GE2— Ek Number News (@EkNumberNews) May 7, 2022
जीवन यापन करने के लिए पहाड़ियों में पिता द्वारा दी गई जमीन में नित्या ने कॉटेज बनवाए। लेकिन उस जगह पर कोई भी सुविधा नहीं थी। तो नित्या ने वहां पर बिजली की सुविधा के लिए सोलर पैनल लगवाए एवं पानी की सुविधा के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग करवाई एवं कॉटेज को रेंट में देने का काम भी स्टार्ट किया।
कॉटेज में 50 से भी ज्यादा लोगों को रोजगार
नित्या के कॉटेज में 50 से भी ज्यादा लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। आज कॉटेज में अनेक प्रकार की सब्जी भी उगाई जा रही हैं। कैफे (Cafe) मैं बनने वाली डिशेज इन सब्जियों से ही बनाई जाती है। इन सब बहादुरी के काम करने के कारण नित्या का नाम नित्या बुधराजा पड़ गया है।
कुछ काम कामयाबी और पैसों के लिए नहीं, बल्कि जीवन मे सुकून के लिए करे
नित्या का मानना है कि इस क्षेत्र में यहां के व्यकियों के बीच, अपने पिता द्वारा विकसित किए इस इलाके में रहना और यहां के लोगों के साथ कार्य करना उनके लिए अब तक का सबसे सुखदमय काम है। यहां वो पैसे कमाने के लिए नहीं बल्कि सुकून से काम करती हैं। पैसा तो इंसान बहुत कमा लेता है, लेकिन जिंदगी में सुकून कमाना आज के समय मे सबसे बड़ी बात है।



