
Budgam, Kashmir: आज के समय में अगर सही तरीके से नई तकनीको का उपयोग करके खेती की जाये, तो अच्छा खासा मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। हमने बहुत सी ऐसी सक्सेस स्टोरी पढ़ी है, जिसमें लोग अपने गॉंव में विदेशों से आकर अपनी जमीन पर खेती करते है और कई गुना प्रॉफिट प्राप्त कर लेते है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि आज के समय में तकनीकों का इतना विकास हो चुका है कि ज्यादा मेहनत किए बिना लोग पारंपरिक खेती की जगह आधुनिक खेती करके अपने प्रॉफिट को बढ़ा लेते है।
जैविक खेती (Organic Farming) का नाम तो हम सभी ने सुना है, आज का दौर जैविक खेती का दौर है। लोग फायदा देखने के साथ साथ जमीन की गुणवत्ता का भी ध्यान रखते है। रासायनिक खाद की अपेक्षा देशी खाद का उपयोग करना ज्यादा पसंद करते है। लंबे समय तक अधिक मुनाफा प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक भी हो गया है।
पीएचडी की पढ़ाई छोड़ भारत आकर की खेती
आज की कहानी एक ऐसी महिला की है। जो पीएचडी करने दक्षिण कोरिया (South Korea) गई थी। लेकिन वहा उन्होंने कुछ ऐसा अनुभव किया कि उनका मन खेती की तरफ झुक गया और वह अपनी पीएचडी की पढ़ाई छोड़ कर अपने देश भारत वापस आ गई और यहां पर खेती करनी शुरू कर दी।
अपने वतन वापस आने के बाद महिला ने जो काम किया, उससे उन्हें एक अलग पहचान मिली। इसके साथ ही वह मुनाफा कमाने में भी सफल रही। आखिर कौन है वह महिला जिसने पीएचडी छोड़ खेती का सफलता प्राप्त की आइये विस्तारपूर्वक जानते है।
मेहनत से लिख दिया नया इतिहास
मेहनत कर फल की चिंता मत कर यह लाइन तो हम सभी ने सुनी है। इसी के आधार मानकर लोग प्रतिदिन परिश्रम करते है। सब्र का फल मीठा होता है, यह बात तब सच हो जाती है। जब हमें हमारे परिश्रम का परिणाम मिलता है। इसी बात को एक महिला ने सच कर दिखाया है। हम जिस महिला की बात कर रहे है, उनका इंशा रसूल (Insha Rasool) है।
इंशा रसूल जिन्होंने पीएचडी (PhD) की पढा़ई छोड़ कर अपने वतन आने का फैसला किया। उन्होंने यह फैसला 2018 में लिया। यह डिसिजन लेने के बाद उनकी पूरी जिंदगी ही बदल गई। भारत आकर अनोखे तरीके से खेती करने की वजह से उन्हें इतनी उपलब्धि मिली कि आज वह खेती करने के क्षेत्र में प्रसिद्ध हो चुकी है।
बचपन से ही खेती करने की थी इच्छा
इंशा रसूल को यह उपलब्धि उनके कड़े परिश्रम और लगन की वजह से मिली है। इंशा देश दक्षिण कोरिया में पीएचडी कर रही थी। वह मॉलिक्यूलर सिग्नलिंग की पढ़ाई करती थी। लेकिन उनका मन वहॉं पर पढ़ाई के दौरान जैविक खेती करने का हुआ और वह अपने देश वापस आ गई। इंशा का परिवार खेती किसानी करता है। जब वह छोटी थी, तो स्कूलिंग के समय उन्होंने स्ट्रोबेरी के फॉर्म को देखा था।
स्ट्रोबेरी के फॉर्म को देखने के बाद ही इंशा की इच्छा फॉर्मिग करने की थी। अपने देश वापस आने के बाद इंशा ने जैविक खेती करने की बात अपने पति को बताई। उनके पति ने इंशा की बात सुनी और कहा कि इस प्लानिेंग पर हमें अभी से लग जाना चाहिए। हमारे पास जब जमीन खुद की है, तो हम ज्यादा वेट क्यूँ करे। इसके बाद इंशा ओर उनके पति ने कश्मीर में ही जैविक खेती करने की शुरूआत कर दी।
पुरे साल होती है लाखो की कमाई
इंशा रसूल ने खेती की शुरूआत में मटर, स्वीच कॉर्न और टमाटर लगाया। लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्हें प्रारंभ में ही मुनाफा प्राप्त होने लगा। वह बताती है, कि वह इस कार्य में जितनी ज्यादा सफल हुई है। उससे ज्यादा वह इसमें असफल भी हुई है।
वह बताती है, कि शुरूआत में कभी कभी उनके खेत मे फसल नहीं उगती थी। कभी खाद सही से काम नहीं कर पाती थी तो कभी पानी कम और कभी पानी ज्यादा हो जाता था। इस तरह का किस्सा उनके साथ में लगभग 6 महीने तक चला। लेकिन उसके बाद उन्हें फायदा मिलने लगा।
इंशा बताती है कि वह बैंगलुरू में स्थित विज्ञान संस्थान की छात्रा रह चुकी है। नुकसान को देखते हुए उन्होंने अकेले खेती करने की जगह 10-20 किसानों को अपने साथ जोड़ने का सोचा। फिर क्या था, उन्होंने किसानो से बात की और उन्हें अपने साथ मिला लिया।
Insha Rasool, a 33-year-old lady from Sholipora village in central Kashmir's #Budgam district started organic farming in 2018 on her family-owned land and named the initiative HomeGreens. She brought the idea from Korea and turned it into reality in #Kashmir #NayaKashmir pic.twitter.com/NmCLL9oa9D
— Heena Dar (@heena_dar) June 5, 2022
आगे उन्होंने बताया की अब उन्हे इसी खेती से इतनी फसल मिलती है कि अब वह मटर की विभिन्न किस्मों के साथ ब्लैंच किए हुए स्वीट कॉर्न (Sweet corns) और साथ में टमाटर (Tomato) को पुरे साल भर बेचती है। वह कहती है, अब हर साल उनका खेती में फायदा बढ़ता ही जा रहा है। वह हर साल आगे बढ़ती जा रही है।
कई प्रयोग करने के बाद मेहनत करके मिली सफलता
इंशा बताती है कि अभी के समय में उनके सभी उत्पाद सिर्फ एक दिन में ही बिक जाते है। इंशा ने खेती में सफलता प्राप्त करने के लिए विभिन्न मौसमों में कई प्रकार के बीजों के साथ प्रयोग किये है। इन प्रयोगो के लिए इंशा ने कई महीनें बिताए है। तब जाकर वह आज सफल हो पाई है।
Insha Rasool from Kashmir quit her PhD in South Korea to return to farming, and launched Homegreens, a brand that sells organic vegetables across India.#JammuKashmir#GoGreen#OrganicVegetables#WomenPower#entrepreneur pic.twitter.com/EfAdwZIoVh
— Shah Imtiyaz (@ShahImtiyaz90) February 4, 2022
आज वह जो कुछ भी हासिल कर पाई है, वह अपनी मेहनत के बल पर ही हासिल कर पाई है। इंशा पेशे से एक साइंटिस्ट (Scientist) भी है। वह बहुत अच्छे से जानती थी कि अगर फसल उगानी है, तो सिर्फ शोध करने से काम नहीं चलेगा। उन्हें शोध करने के साथ साथ मेहनत भी करनी पडेगी, इसलिए उन्होंने भारत आकर खेती करने का डिसिजन लिया और आज वह इसमे सफल भी हो गई है।



