कभी स्कूल में हुई फेल, बिना कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC में 2nd रैंक पाकर बनी IAS अफसर

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Rukmani Riar IAS
Rukmani Riar IAS Topper Who Failed in Class 6th but never give up. Inspiring story of Rukmani Riar IAS who cleared UPSC Exam: Success Story

Delhi: जहाँ अधिकांश युवा फेल हो जाने पर निराश हो जाते हैं, वहीं पंजाब की रुक्मणि रियार (Rukmani Riar IAS) ने अपनी असफलता से हार नही मानी, अपनी असफलता को सफलता की सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ती चली गई। UPSC सिविल सेवा जैसी कठिन एग्जाम को पास इतना आसान नही है।

हर जीवन की कहानी एक सी नहीं होती, लेकिन किसी मोड़ पर कुछ ऐसा होता है जिससे पूरी कहानी बदल जाती है। बहुत से उम्मीदवार अपना ख्वाब पूरा करने के लिए वर्षों तैयारी करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो पहले ही प्रयास में और बेहद कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं।

संघ लोक सेवा आयोग यानी कि UPSC की परीक्षा में सफलता (Success) प्राप्त करना बहुत ही कठिन होता है। इसके लिए उम्मीदवारों को दिन-रात कठिन मेहनत करनी होती है और पूरी तरह से तल्लीन होकर इसकी तैयारी करनी पड़ती है। यूपीएससी में सफल होने वाले बहुत से ऐसे उम्मीदवार भी हैं, जिनकी संघर्ष की कहानी (Struggle Story) हैरान कर देती है।

इन्हीं होनहारों में से एक हैं, पंजाब के गुरुदासपुर जिले से रुक्मिणी रियार (Rukmani Riar) की। जिन्हें वर्ष 2011 में यूपीएससी की परीक्षा में कामयाबी मिली थी। इसके बाद तो वे बहुतों के लिए मिसाल ही बन गईं। यह कहानी एक लड़की की है, जो कक्षा 6वीं में फेल हो जाती है और पढ़ाई में आगे भी एवरेज रहती है।

उसने यूपीएससी की तैयारी के लिए कैसे हौसला जुटाया होगा? यूपीएससी सिविल सेवा में दूसरा स्थान हासिल कर लोगों को आश्चर्य चकित कर दिया। रुक्मिणी रियार की कहानी (IAS Rukmani Riar Story) मुश्किलों से जूझते नौजवानों के लिए एक प्रेरणा है। आइये जानते हैं उनके परिश्रम और कामयाबी की राज।

कौन है रुक्मिणी

रुक्मिणी रियार का जन्म पंजाब के गुरुदासपुर जिले में हुआ था, उनकी माता तकदीर कौर एक गृहणी थी और उनके पिता बलजिंदर सिंह रियार एक सेवानिवृत उप जिला अटॉर्नी हैं। रुक्मिणी रियार अपनी प्रारंभिक पढ़ाई के कुछ वर्ष गुरुदासपुर में बिताये परन्तु कक्षा 4 में उनका एडमिशन एक बोर्डिंग स्कूल में करा दिया गया।

कक्षा 6 में हुई थी फेल

अचानक बोर्डिंग स्कूल में जाने से रुक्मिणी रियार काफी प्रभावित हुई उन्हें इस नए वातावरण में खुद को ढालने में कुछ वक्त लग। आये इस बदलाव के कारण ही रुक्मिणी रियार कक्षा 6 में फेल हो गईं। वह बताती है कि फेल होने से वह इतनी शर्मिंदगी महसूस करने लगी कि उन्होंने अपने टीचर्स एंव पैरेंट्स से बात करना काफी कम कर दिया, लेकिन वे इस असफलता से निराश होकर नहीं बैठी बल्कि सबक लेकर आगे बढ़ी।

डिप्रेशन में रहने लगीं थी फेल होने के बाद परिवार के लोग और शिक्षकों के सामने जाने की उनकी हिम्मत नहीं होती थी। यह सोचकर शर्म आती कि बाकी लोग इसके बारे में क्या सोचेंगे। महीनों इस टेंशन में रहने के बाद उन्होंने सोचा कि इस समस्या से उन्हें खुद ही बाहर निकलना है। इसी डर को उन्होंने अपनी प्रेरणा बना लिया। उन्होंने यह तय कर लिया कि बहाने बनाना या दूसरों को दोष देने का कोई फायदा नहीं।

IAS बनने की मिली प्रेरणा

रुक्मिणी रियार ने अपनी असफलता से सबक लिया और आगे बढ़ती रहीं। उन्होंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस से मास्टर्स डिग्री हासिल की। रुक्मिणी ने मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने यह परीक्षा दी थी और पहले ही प्रयास में उन्होंने इसमें सफलता अर्जित कर ली। एक साक्षात्कार के दौरान रुक्मिणी ने बताया था की छठी में वे फेल हो गई थीं।

दरअसल, उन्हें डलहौजी के एक सेक्रेड हार्ट स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया गया था। बोर्डिंग स्कूल के दबाव को वे झेल नहीं पा रही थीं। रुक्मिणी के अनुसार उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी। इसके बाद कई NGO में काम करके देश की और समाज की सेवा की। इसी बीच उन्होंने यह महसूस किया कि समाज में कुछ बदलाव लाने के लिए ग्राउंड लेवल पर कुछ परिवर्तन लाने आवश्यक हैं। यहीं से उन्हें IAS बनकर देश की सेवा करने की प्रेरणा मिली।

बिना कोचिंग के पहले प्रयास में हासिल की दूसरी रैंक

आप किसी भी उंचाई को छू सकते हैं। रुक्मिणी रियार राजस्थान में बूंदी जिले के जिला अधिकारी (DM) और उनके पति सिद्धार्थ सिहाग राजस्थान के झालावार जिले में DM हैं। जिस परीक्षा को क्लियर करने के लिए परीक्षार्थी सालों-साल कठिन मेहनत करते हैं और अच्छी से अच्छी कोचिंग की मदद लेते हैं।

उस परीक्षा को रुक्मिणी रियार ने बिना कोचिंग की मदद लिए ही अपने पहले ही प्रयास में क्लियर ही नहीं किया बल्कि UPSC (IAS) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल किया। रुक्मिणी रियार ने वर्ष 2011 की यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) में यह रैंक हासिल किया था। रुक्मिणी रियार ने अपनी लगन और मेहनत से यह सिद्ध कर दिया है कि यदि आप में टैलेंट और दृढ इच्छाशक्ति है, तो आप सफलता हासिल कर ही लेंगे।

मनवाया अपना लोहा

रुक्मिणी ने अब अपने मन में यह विचार पक्का कर लिया था कि वे रुकने वाली नहीं हैं। उनके अनुसार यदि आपमें धैर्य है और आप पूरा दिल लगा कर तैयारी करते हैं, तो दुनिया की किसी भी परीक्षा में आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता।

छठी में फेल होने के बावजूद इससे प्रेरणा पाकर आगे बढ़ते हुए रूक्मिणी रायर ने न केवल अपने कॉलेज में हमेशा टॉप किया, बल्कि सिविल सेवा परीक्षा में भी दूसरा स्थान हासिल करके उन्होंने अपनी प्रतिभा, अपनी मेहनत और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का लोहा मनवा लिया।

अभ्यर्थियों को दिया संदेश

वे कहती हैं, यदि मन में ठान लें तो असफलताएं हमारा रास्ता कभी नहीं रोक सकतीं। धैर्य और योजना के साथ तैयारी की जाए तो दुनिया की किसी भी परीक्षा में पास होना संभव है। असफलता ने उन्हें इतना मजबूत बना दिया कि वे हर काम पूरी रणनीति के साथ करने लगी।

आईएएस परीक्षा में शामिल होने से पहले उन्होंने कई एनजीओ के साथ काम किया, ताकि देश की स्थिति को बेहतर समझ सकें। उन्होंने कभी पढ़ाई छोड़ने या कोई गलत कदम उठाने के बारे में नहीं सोचा। अपने काम और बधाई के बीच की सारी दिक्कतें वे मेहनत से सॉल्व करती गई और सफलता की आखिरी सीढ़ी तक पहुँच गई।

सफल होने की जिद

स्कूल-कॉलेज या किसी कॉम्पिटीटिव एग्जाम में फेल होने का असर करियर पर नहीं होता। देश और दुनिया में ऐसे कई लोग है जो फेल होने के बाद भी सफल हुए। इन्हीं में से एक नाम रुक्मिणी रायर का भी है। जिन्होंने कभी हार नही मानी।

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