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अब सैनिक स्कूल में पढ़ाई करना सम्भव हुआ लड़कियां का। शैक्षणिक,शारीरिक और मानसिक रूप से ताकतबर और जाबांज सैनिक तैयार करने वाली नर्सरी के तौर पर संचालित देश के सैनिक स्कूलों में अब लड़कियो का भी लड़कों के साथ पढ़ाई करना हुआ सम्भव। ये निर्णय केंद्र सरकार ने मिजोरम में प्रारम्भ हुए पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत लिया है।
पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 30 छात्राओं को छठी कक्षा में प्रवेश दिलाया गया था। पायलट प्रोजेक्ट की कामयाबी के चलते केंद्र सरकार अब शैक्षणिक सत्र 2020 में देश के सभी 26 सैनिक स्कूलों में लड़कियों को प्रवेश दिलाने के लिए नियमों में बदलाव की प्लाइनिंग बना रही है।
इस स्कीम के अंतर्गत पहले सालों में सैनिक स्कूल में लड़कियों की संख्या भी IIT की जैसे गर्ल्स सुपर न्यूमेरी कोटे के रूप में बढ़ाई जाएगी, जैसे पहले साल 10 फीसदी, अगले साल 15 और फिर 20 फीसदी होगी। सरकार की इस योजना से जो लड़कियां भारतीय सेना में भविष्य बनाना चाहती हैं, उनको इस कदम से बहुत कामयाबी मिलेगी।
वो अपने सपने को सच कर पायेगी। सैनिक स्कूल में शिक्षा के दौरान स्कूली छात्रों में देश सेवा की भावना पैदा होती है, क्योंकि शिक्षा के साथ-साथ मजबूत अनुशासन सेना में नौकरी के लिहाज से बिल्कुल सही बैठता है। ऐसे में लड़कियों को इस रास्ते मे बहुत फायदा मिलेगा।
वर्तमान में सैनिक स्कूलों में 6वी से 12वीं कक्षा तक आवासीय स्कूल में लड़के ही पढ़ाई कर सकते थे। लड़कियों को इसमें एडमिशन नहीं मिलता था। लगभग तीन सालों से लड़कियों को भी सैनिक स्कूलों में भी एडमिशन दिलवाने की अपील उठ रही थी।
सूत्रों की खबरो के अनुसार केंद्र सरकार ने सैनिक स्कूलों में लड़कियों को दाखिला दिलाने के लिए राज्य सरकारों को अपने-अपने सैनिक स्कूल में व्यवस्था तैयार करने को कहा था। इसमें गर्ल्स हॉस्टल, महिला शिक्षक, नर्स व डॉक्टरों की सुविधा देने जैसी व्यवस्था बनाने कहा गया था।




