देश की पहली महिला IAS अफ़सर की कहानी आपको प्रेरित कर देगी, इतिहास रचकर मिसाल बन गईं

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Anna Rajam Malhotra story
India's first woman IAS officer Anna Rajam Malhotra story in Hindi. Motivational Story of 1st Indian Female IAS officer Anna Rajam Malhotra.

Photo Credits: Twitter

Delhi: कुछ लोगो का मानना है की सिविल सेवाओं में पुरुषो के मुकाबले महिलाओं को कम आंका जाता है। एक रएपॉपर्ट के मुताबिक़ प्रत्येक 20 पुरुष IAS अधिकारियों में केवल 1 महिला IAS अधिकारी है। हालाँकि कई महिला सिविल सेवक अधिकारी ऐसी हैं, जिन पर पूरे देश को गर्व है। हम ऐसी कई महिला अधिकारियों की कहानी कवर कर चुके हैं, जो आज लोगो के सामने मिसाल है।

आपको बता दें की देश की आजादी के बाद भारत में महिलाओं को सिविल सेवा (IAS) और पुलिस सेवा (IPS) सहित किसी भी अन्न सरकारी नौकरी का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं थी। हालाँकि देश में योग्य और प्रतिभाशाली महिलाओं की कोई कमी नहीं थी और इस सेवा से उन्हें दूर रखना उस वक़्त की देश की व्यवस्था की एक बहुत बड़ी गलती थी।

फिर आजादी के एक साल बाद महिलाओं को सिविल सेवा (Civil Service) में पात्र बना दिया गया था। उस वक़्त देश में हर तरफ पितृसत्ता का ही बोलबाला था और महिलाओं को हर राह पर पितृसत्ता और परिवारवाद को झेलना पड़ रहा था। उस वक़्त एक महिला को आईएएस ऑफ़िसर के रूप में देखने के लिए कोई राज़ी नहीं था।

किसी ने कभी भारत में महिला अधिकारी देखा भी नहीं था। फिर केरल की अन्ना जॉर्ज (Anna George) नाम की एक सामान्य लड़की ऐसा करने के सपने देख रही थी। वह लड़की एक सिविल सेवक बनकर जनता की सेवा करना चाहती थी। उनके इरादे नेक थे।

अन्ना 1951 के उस दौर में सिविल सेवा के लिए सेलेक्ट हुई जिस समय औरतों को शिक्षा और नौकरी के लिए रोका जाता था। अन्ना का जन्म जुलाई 1927 में केरल (Kerala) के एर्नाकुलम (Ernakulam) जिले में हुआ था और उनका नाम अन्ना रजम जॉर्ज (Anna Rajam George) था। कोझिकोड में स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद उंहोने मद्रास विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

साल 1951 में जब यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) के रिजल्ट सामने आये, तब सफल होने वाले छात्रों की सूची में एक महिला का नाम भी था। वह महिला इतिहास के पन्नों में अपना नाम गोल्डन अक्षरों में लिख चुकी थी। लेकिन उनके सामने अभी बहुत चैलेंज आने वाले थे।

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित आर एन बनर्जी और चार आईसीएस अधिकारियों (IAS Officers) के साक्षात्कार बोर्ड में उन्हें काफी डिप्रेस किया गया। उस वक़्त उन्हें विदेश सेवा और केन्द्रीय सेवा में से किसी एक को चुनने का ऑप्शन दिया गया। ऐसे में अन्ना ने मद्रास कैडर को चुना।

अब वे अपने पहले ही प्रयास में UPSC में सेलेक्ट होकर एक आईएएस ऑफ़िसर बन गई थी। बल्कि देश की पहली महिला IAS अफसर (India’s first female IAS officer)। अन्ना ने किसी मामले में अपने आप को किसी भी पुरुष के मुकाबले कम नहीं माना और घुड़सवारी और शूटिंग की ट्रेनिंग पूरी की।

उन्होंने हर मुश्किल परिस्थितियों में भी एक बेस्ट सरकारी अफ़सर (Government Officer) के रूप में ख़ुद को प्रूफ किया। उस वक़्त उनके किसी भी फ़ैसले को सही नहीं माना जाता था और लोगों को लगता था कि सही से काम नहीं कर पाएंगी। इनके उलट वे अपने हर काम और फैसले में सफल रहीं थी।

जानकारी हो की 1982 एशियाड परियोजना में उन्होंने राजीव गांधी की मदत की थी। उन्होंने अपने पैर में चोट होने के बाद भी वो खाद्य उत्पादन पैटर्न की जानकारी जुटाने के लिए आठ राज्यों की यात्रा पर इंदिरा गांधी के साथ रहीं थी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान में 7 अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के साथ बेहतरीन काम किया और बड़ी तारीफ पाई।

इस महिला अधिकारी को साल 1979 में भारत सरकार द्वारा प्रशासकीय सेवा के क्षेत्र में शानदार कार्य के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनका निधन 92 साल की उम्र में 28 सितम्बर 2018 को हुआ। आज अन्ना (Anna Rajam Malhotra) भला ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने मिसाल और उदहारण पेश किया, वह हमेशा देश की कई बेटियों के लिए प्रेरणादाई बन गया है।

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