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Dharamshala: हाल ही में जो Commonwealth Games संपन्न हुए। जिसमें भारत ने काफी शानदार प्रदर्शन किया और तालिका में चौथे स्थान पर रहे। उसमें हमारे देश की भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ऐसा प्रदर्शन किया कि हर कोई उन्हें साराह रहा है। भले ही हमारी भारतीय महिला क्रिकेट टीम फाइनल ना जीत पाई हो।
भले ही हमारी भारतीय महिला क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया से फाइनल में हार गई हो। परंतु देश की इन बेटियों ने अपनी जगह लोगों के दिलों में हमेशा के लिए अवश्य बना ली है। हर व्यक्ति देश की इन बेटियों पर गर्व कर रहा।
वहीं बात करे टीम की बहुत ही अहम भूमिका में रही रेणुका सिंह (Renuka Singh) की, तो उन्होंने अपने प्रदर्शन के चलते खूब सुर्खियां हासिल की। रेणुका ने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 11 विकेट लिए। आज हम इस पोस्ट में रेणुका के विषय मे जानेंगे। आइए जानते है देश की इस बेटी के जीवन से जुड़े अहम किस्सों को।
बारबाडोस टीम के खिलाफ लिए 10 रन में 4 विकेट
आपको बता दे कि रेणुका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बारबाडोस टीम के खिलाफ में जो मैच खेला उसमें उन्होंने 4 ओवर में सिर्फ 10 रन दिए और 10 रन देकर उन्होंने बारबाडोस टीम के 4 विकेट झटक लिए। आपको बता दे कि रेणुका को क्रिकेट प्रति जुनून तथा क्रिकेट के प्रति समर्पण की भावना विरासत में प्राप्त हुई है। आपको बता दे कि रेणुका सिंह ठाकुर एक राइट आर्म फ़ास्ट गेंदबाज हैं।
पिताजी थे क्रिकेट के बहुत बड़े फेन
रेणुका हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू गाव की रहने वाली है। रेणुका के क्रिकेट कैरियर की बात करे तो उन्हें अपने परिवार की पसंद की वज़ह से यह करिअर मिला है। दरअसल रेणुका के परिवार वालों को पहले से ही क्रिकेट बहुत ज्यादा पसंद था।
रेणुका के पिता केहर सिंह भी क्रिकेट के बहुत दीवाने थे। इसी कारण रेणुका के मन मे भी क्रिकेट के प्रति समर्पण और जुनून की भावना आई। रेणुका के पिताजी क्रिकेट से इतने प्रभावित थे कि अपने बड़े बेटे का नाम भी उन्होंने क्रिकेटर विनोद कांबली के नाम पर रखा था।
बेटी की कामयाबी नहीं देख पाए पिता केहर सिंह
परंतु रेणुका के पिता अपनी बेटी का क्रिकेट में नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखने से पहले ही चल बसे। वह अपनी बेटी की कामयाबी नहीं देख पाए। रेणुका सिंह सिर्फ तीन साल की थी। जब उनके पिता जी केहर सिंह का देहांत हो गया। पिता की मृत्यु तो हो गई, लेकिन क्रिकेट के प्रति रेणुका के पिता का वह जुनून रेणुका में आ गया।
चाचा ने आगे बढ़ने में की मदद
रेणुका जब बहुत छोटी थी, स्कूल में थी। तब से ही उन्होंने टेनिस बॉल द्वारा क्रिकेट खेलना प्रारंभ कर दिया था। रेणुका के क्रिकेट के प्रति जो जुनून था। वह किसी से छुपा नहीं था। रेणुका के चाचा जी ने जब यह देखा कि रेणुका का जुनून क्रिकेट के प्रति औरों से अलग है।
उनके चाचा जिनका नाम भूपिंदर सिंह ठाकुर है, उन्होंने परिवार को रेणुका को हिमाचल (Himachal Pradesh) की ही धर्मशाला क्रिकेट एसोसिएशन महिला अकादमी जाने के लिए राजी करवाया। यही से रेणुका के अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट में कदम रखने की शुरुआत हुई।
पिता का सपना रेणुका ने किया पूरा
रेणुका के पिता का बचपन से ही यह सपना था कि वह एक दिन बड़े होकर क्रिकेटर बनेंगे। लेकिन पिताजी का यह सपना पूरा ना हो पाया। ऐसे मे अपने पिता का क्रिकेटर बनने सपना रेणुका ने पूरा करने के लिए मैदान में लड़कों संग क्रिकेट खेलना प्रारंभ कर दिया।
With 9 Wickets, Renuka Singh Thakur is now the leading wicket taker of the tournament!🔥#CWG2022 pic.twitter.com/ErtIBHiGjk
— The Bridge (@the_bridge_in) August 3, 2022
जब वह सिर्फ 13 साल की थी, उस समय उन्होंने सिर्फ और सिर्फ अपने जुनून क्रिकेट के लिए अपना घर छोड़ा था। रेणुका (Renuka Singh Thakur) को दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज डेल स्टेन बहुत ही पसंद है। वह उनकी बहुत बड़ी फैन भी हैं।
Renuka Singh Thakur is now the leading wicket-taker of the tournament with 10 wickets💪🏻#CWG22 l #INDvsAUS pic.twitter.com/GDMKsn2puc
— The Bridge (@the_bridge_in) August 7, 2022
रेणुका ने सिर्फ कामनवेल्थ गेम्स में ही नहीं 2019 में रेणुका सिंह ने बीसीसीआई महिला के एक दिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया था। रेणुका ने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी गेंदबाजी से 23 विकेट चटकाए थे।
Another four-wicket haul for Renuka Singh Thakur at #B2022 🔥
Relive her sensational 4/10 against Barbados 📽️ pic.twitter.com/mvXJzanvqm
— ICC (@ICC) August 4, 2022
कमाल की बात तो यह है कि रेणुका हिमाचल की ऐसी पहली महिला है, जिन्होंने गेंदबाजी में नेशनल टूर्नामेंट में हैट्रिक ली है। सिर्फ यही नहीं रेणुका सिंह ने अंडर-19 टूर्नामेंट में भी कर्नाटक के खिलाफ हैट्रिक लगाते हुए पांच विकेट लिए थे। इसी तरह उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से क्रिकेट के क्षेत्र मे अपना नाम हमेशा के लिए अमर करवा लिया।




