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Delhi: पढ़ने की लगन, चाह और ज़िन्दगी में कुछ कर दिखाने की तम्मना ने शख्स को उस सफलता तक पहुंचाया जिसकी कामना भारत के अनेक स्टूडेंट्स करते हैं। इरादे मजबूत हों तो कामयाबी कदम जरूर चूमती है। इस बात को सच कर दिखाया है, महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर बोइसार के रहने वाले वरुण बरनवाल (IAS Varun Baranwal) ने।
वरुण के पिताजी की साइकिल रिपेयर की शॉप थी। उससे वे इतना कमा लेते थे कि वरुण और उनकी बहन की पढ़ाई साथ ही घर का खर्च चल जाता था। कहानी ने दुखद मोड़ तब लिया जब साल 2006 में वरुण की दसवीं की परीक्षा खत्म होने के चार दिन बाद ही उनके पिताजी का देहांत हो गया। वरुण की जिंदगी ने मानो करवट ले ली हो। दुखो का पहाड़ टूट गया था।
कमाने वाला एक ही इंसान था घर पर वो भी चला गया। पहले ही गरीबी थी उस पर अस्पताल के बड़े से बिल ने परिवार की कमर तोड़ दी। वरुण की बहन ट्यूशन पढ़ाती थी। दसवीं के बाद वरुण ने पढ़ाई छोड़कर, दुकान संभालने का फैसला ले लिया। वरुण ने अपने होसलो को हारने नही दिया। कठिन परिस्थितियों को उन्होंने अपनी कामयाबी की सीढ़ी समझ आगे बढ़ने लगे।
तभी उनका परीक्षा परिणाम आ गया और उन्हें पता चला कि उन्होंने स्कूल में TOP किया है। वरुण (Varun Baranwal) की पढ़ाई जारी रखने की इच्छा और तीव्र हो गयी। उनके होसलो को जान मिल गई। अगली कक्षा में एडमीशन के लिये फॉर्म भरने का सोचा। जब फॉर्म भरने की फीस पता कि तो वो 10,000 रुपये थी। तब उनके पास इतना पैसा नही था। तभी उनके पिताजी का इलाज करने वाले डॉ कांपली ने वरुण की हेल्प करी और फीस के पैसे दे दिये।
गरीबी के जीवन को एक सीख की तरह देखने वाले वरुण बरनवाल ने UPSC IAS 2016 की परीक्षा में 32वी रैंक हासिल की। परन्तु उनका यह सफर बेहद ही कठिन और संघर्षपूर्ण रहा। बचपन में साइकिल का पंचर ठीक करने वाले वरुण आज एक IAS ऑफिसर है। ये उनकी अटूट मेहनत का परिणाम है कि उन्होंने साल 2013 में यूपीएससी की परीक्षा में 32वां स्थान हासिल किया। पिता के देहांत और आर्थिक तंगी के इन हालातों में वरुण ने हार नही मानी।
वरुण ने अपने संघर्ष की कहानी बताते हुए कहा, जीवन बहुत ही गरीबी में बीता। पढ़ने का मन था, लेकिन पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। 10वीं की पढ़ाई करने के बाद मन बना लिया था, अब साइकिल की दुकान पर काम ही करूंगा। क्योंकि आगे की पढ़ाई के लिए पैसे जुटा पाना कठिन था। पर तकदीर को कुछ और ही मंजूर था।
फ्रेंडशिप डे: पंक्चर की दुकान पर करते थे काम, दोस्तों ने भरी फीस, बन गए IAS
IAS ऑफिसर वरुण बरनवाल , जो कभी साइकिल पंक्चर की दुकान में काम करते थे. वरुण महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर बोइसार के रहने वाले हैं. pic.twitter.com/TBqlkOBDbM— Rupali Tripathi (@RupaliTripathi6) August 2, 2020
उन्होंने बताया मेरे परिवार वालो ने कभी मेरा हौसला टूटने नही दिया। हमेशा आगे बढ़ने के लिए हौसला दिया। हाफ पल होसलो को मजबूत बनये रखने की ताकत दी। मां ने कहा ‘हम सब काम करेंगे, तू पढ़ाई कर’। उन्होंने बताया 11वीं-12वीं मेरे जीवन के सबसे कठिन साल रहे हैं। मैं सुबह 6 बजे उठकर स्कूल जाता था, जिसके बाद 2 से रात 10 बजे तक ट्यूशन लेता था और उसके बाद दुकान की देख-रेख करता था।
वरुण ने बताया 10वीं में एडमिशन के लिए हमारे घर के पास एक ही अच्छा स्कूल था, लेकिन उसमें एडमिशन लेने के लिए 10 हजार रुपये डोनेशन लगता है। जिसके बाद मैंने मां से कहा कि रहने दो पैसे नहीं हैं। मैं एक साल रुक जाता हूं। अगले साल एडमिशन ले लूंगा। लेकिन उन्होंने बताया मेरे पिता का जो इलाज करते थे, वह डॉक्टर हमारी दुकान के बाहर से जा रहे थे। जिसके बाद उन्होंने मुझसे सारी बात पूछी और फिर तुरंत 10 हजार रुपये निकाल कर दिए और कहा जाओ एडमिशन करवा लो।
वरुण बताते हैं कि, इन हालातों में मैंने और ज्यादा मेनहत करनी शुरू की। मैंने जिद बना ली थी कि इतनी अच्छी तरह पढ़ाई करनी है कि स्कूल प्रिसिंपल मेरी फीस माफ कर दें। आखिरकार हुआ भी वही मेरे अंक अच्छे आए और प्रिसिंपल से रिक्वेस्ट की और उन्होंने फीस माफ कर दी। इस तरह से स्कूल की पढ़ाई पूरी हुई।
पढ़ने की लगन, ज़िन्दगी में कुछ कर दिखाने की चाह और इस्पाती इरादे ने वरुण को उस कामयाबी तक पहुंचाया जिसकी कामना भारत के अनेक युवा करते हैं | साइकिल का पंचर ठीक करने वाले वरुण बरनवाल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2013 में 32वी रैंक हासिल की और बने IAS अफसर।#IspatiIrada @BaranwalVarun pic.twitter.com/8UTLA1zcbO
— Ministry of Steel (@SteelMinIndia) November 17, 2020
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने इंजीनियरिंग की प्रवेश एग्जाम पास कर लिया था, तब इसकी फीस भरने की बारी आई तो मेरे परिवार, दोस्त, पिता के दोस्त सबने मिलकर मेरी हेल्प की। इंजीनियरिंग पास करते ही यूपीएससी (UPSC) की परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। बड़ी लगन से परीक्षा की तैयारी की और दिन रात बधाई की। सभी जानकारी जुटाई।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक वरुण ने बताया, जब यूपीएससी प्रिलिम्स का परिणाम आया तो ‘मैंने भइया से पूछा कि मेरी रैंक कितनी आई है, जिसके बाद उन्होंने कहा 32। ये सुनकर वरुण की आंखों में आंसू आ गए हैं। उन्हें विश्वास था, अगर मेहनत और लगन सच्ची हो बिना पैसों के भी आप दुनिया का हर मुकाम हासिल कर सकते हैं। वरुण ने उन युवाओं को सीख दी है, जिनके पास पढ़ने की ललक तोहि लेकिन पैसा नही है।



