Jabalpur: हम सभी जानते हैं कि हमारा भारत देश कृषि के क्षेत्र में सबसे आगे है, यहां ज्यादतर लोग कृषि पर ही आश्रित रहते है। इसलिए हमारे भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। लेकिन फिर भी हम आपको बता दें कि यहा के किसान (Farmer) की हालत लगातार बहुत ही बिगड़ती जा रही हैं। सरकार की सभी योजनाओं की मदद मिलने के बाद भी यहां के किसानो को भारी नुकसान हो रहा है।
हम देखते है कि किसान जब भी कोई फसल लगाता है, तो कभी बारिश ज्यादा होने की वजह से तो कभी बारिश कम होने की वजह से उनकी सारी फसल नष्ट हो जाती हैं और यदि कभी फसल अच्छी भी रहीं और पैदावार ज्यादा हुई तो मंडी मे फसल का अच्छा भाव नहीं होता हैै।
किसानों की फसल हो जाती है बर्बाद
अक्सर हमे ऐसी खबर लगातर मिलती रहती है कि किसानो ने अपनी उगाई फसल पर ट्रेक्टर चला दिया या कभी ऐसी ख़बर आती हैं कि उन्होने सड़क पर अपने मेहनत से उगाये सारे टमाटरों को फेक दिए।
सभी किसानो का ऐसे करने का कारण सिर्फ यह है कि उन्हें अपनी उगाई फसलों का सही तरीके से दाम नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में आप सभी को यह समझना बहुत जरुरी है कि सब्जी मंडी (Sabji Mandi) किसानो की उगाई फसल के भाव पर काम कैसे करती है।
शेयर बाजार के ब्रोकर जैसे सब्जी मंडी में भी होते हैं एजेंट
आप सभी लोग जब भी सब्ज़ियों को सड़क पर फेकने जेसी यह खबर सुनते है, तो सोचते होगे की किसान पहले मंडी में फसल या सब्जी के भाव पता क्यों नहीं करते। हो सकता है कि आप कभी सब्जी मण्डी गए ही नहीं हो, अगर गए भी होगे तो आपने यह देखा ही होंगा कि किसानो कि फसल को कैसे वहा बेचा जाता है।

किसानो को मण्डी (Vegetable Mandi) में पहुंचते ही सबसे पहले बहुत सारे एजेंट मिलते है। ये एजेंट किसानों की सब्जी को बिकवाने का काम करते है। यहां एजेंट का काम जेसे शेयर बाजार के ब्रोकर होते हैं, उनके समान ही होता है।
आप सभी जानते ही होंगे कि शेयर बाजार में इन एजेंटों की मदद से शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। वैसे ही सब्जियों को इन एजेंटों के बिना नहीं बेची जा सकती हैं और सब्जियों कि बोली भी इन्हीं की मदद से लगाई जाती हैं।
शेयर मार्केट (Share Market) के भाव के जैसे ही सब्जियों के भाव (Vegetables Price) में भी लगती हैं, बोलीं आप सभी को पता होगा कि अगर शेयर की मांग शेयर बाजार में तेजी से बढ़ जाती है, तो लगातार उसके भाव ऊपर उठने लगते हैं। ठीक वैसे ही सब्जी मंडी में कोई भी सब्जी की माग लगातार बढने पर उसके भाव अचानक से ही बढ जाते हैं और मांग नहीं होने पर उसके भाव में गिरावट आ जाती हैं।

सब्जी मंडी में एजेंट सब्ज़ियों का कोई भी एक भाव फिक्स करते हैं और उनकी बोली लगाते है। अगर उस सब्जी की मार्केट में मांग ज्यादा होती हैं, तो लगातार उसकी बोली बढ़ती जाती है। परंतु मांग नहीं होने पर उसकी बोली में गिरावट आ जाती है।
उसके बाद फिर हम देखते है कि समान बेचने के लिए उन्हे जिस भाव से कस्टमर मिल जाते है, उन्हीं भाव से उसे बेच दिए जाते है। यहीं कारण है कि कोई भी सब्जी या फलो का क्या भाव या दाम है, मंडी में इसका पहले से पता नहीं लगाया जा सकता हैैं।
सब्जियों में भी होती हैं शेयर बाजार के समान इनसाइडर ट्रेंडिग
आपको सबसे पहले तो यह जानना जरूरी हैं कि क्या होती हैं इनसाइडर ट्रेंडिग। आज हम आपको इस इनसाइडर ट्रेंडिग के बारे में बताते हैं। जब कुछ लोग शेयरों को आपस में साठ-गाठ करके खरीदते है एवं बेचते है तथा ग़लत तरीके से उनके भाव में उतार चढ़ाव करते हैं, तो इस प्रकार की लेन देन को इनसाइडर ट्रेडिंग कहते हैं।
कई बार आपने देखा होगा की सब्जी मंडी में भी ऐसा ही होता है, जिसमे व्यापारी और एजेंट आपस में मिलकर या फ़िर एक या एक से अधिक व्यापारी आपस में मिलकर इस प्रकार की इंसाइडर ट्रेडिंग करते हैं और सब व्यापारी मिलकर किसानों के माल की कम दाम में बोलीं लगाकर उसे बिकवाने का काम करते हैं।
फिर वह किसानों से माल खरीदकर उसे बेचने में अधिक मुनाफा कमाते हैं। अक्सर हमें कुछ ऐसे व्यापारी भी देखने को मिलते हैं, जो कि मार्केट में बोली लगने के पहले ही किसानों से उनकी सारी फसल खरीद लेते हैं।
सब्जी मंडी में भी कई चार्ज लगते है आइए उदहारण की सहायता से समझते हैं
हम इस चीज को उदाहरण से आसानी से समझ सकते हैं। यदि मान लीजिए कोई किसान किसी भी सब्जी मंडी में 1 टन टमाटर को लेकर उसे बेचने जाता है। तो उस किसान की सामान की बोली उस मंडी में जो एजेंट है वह लगाएंगे। एजेंट उनके सामान को बिकवाने में हेल्प करते हैं।
मान लेते हैं किसान के द्वारा लाए गए टमाटर की बोली एजेंट ने 10 रुपए किलो यानी 10 हजार रूपए टन से शुरू किया हैं। यदि टमाटर की मंडी मे मांग अधिक होती है, तो टमाटरों की बोली और बढ़ती जाती हैं। परंतु माग नहीं हैं, तो उसकी बोली नहीं बढ़ती। चलो हम यह समझ भी लेते है कि टमाटर 10 हजार रूपए टन से बिक जाता है।
अब अगर जिस व्यापारी ने इन किसानो के टमाटर खरीद भी लिया, तो उसे वह वहीं नहीं बेचेंगा। वह दिल्ली या फिर गाज़ियाबाद जेसी बड़ी मंडियो में जाकर बेचेगा। जिससे उस व्यापारी उस व्यक्ति को और ज्यादा से ज्यादा मुनाफा हो।
अब यदि किसान कि फसल 10 हजार रुपए में बिक तो जरूर गई है, पर उन्हे पूरे 10 हजार रुपए नहीं मिलते। क्योंकि उस किसान को सबसे पहले तो मण्डी का किराया चुकाना पड़ता है। फिर सामान को उतारने चढाने के लिए काम मे लगे मजदूरों का किराया।
उसके बाद अंत मे एजेंटों का कमीशन। इन सब के किरायों का खर्चा हो जाने के बाद जो भी बचा पेसा है, वहीं किसान को मिलता है। जिस तरह शेयर बाजार में भी ब्रोकरेज चार्ज, ट्रांजेक्शन टैक्स इत्यादि जैसे बहुत सारे टैक्स या चार्ज लगते है। वैसे ही सब्जी मंडी में कई प्रकार के चार्ज लगते हैं।





