पिता का सपना था की बेटा IAS अफसर बने, बेटे ने UPSC में टॉप करके अपने पापा को हैरान कर दिया

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Shubham Gupta IAS
Shubham Gupta secured the 6th rank in the UPSC exam 2018. Shubham Gupta cleared IAS Exam in his 4th attempt and got 6th Rank (AIR).

Jaipur: खुद पर विश्‍वास और लगन बस यही दो चीज जीवन मे सफलता दिलाने के लिये पर्याप्‍त है। इनकी सहायता से ही जीवन में बड़ी से बड़ी सफलता प्राप्‍त कि जा सकती है। यूपीएससी केंडिडेट कि जब बात कि जाती है तो इन दोनों चीजों का जिक्र हमेशा ही होता है। आज कि हमारी स्‍टोरी एक ऐसे लड़के कि है, जिसने इन्‍ही दो शब्‍दों से देश कि कठिन परीक्षा में सक्‍सेस प्राप्‍त कर ली।

आज कि हमारी स्‍टोरी है, एक गरीब साधारण परिवार के बेटे कि जिसका नाम शुभम गुप्‍ता (Shubham Gupta) है। आज शुभम गुप्‍ता इतने सफल हो गया है कि उसकी चर्चा हर जगह हो रही है। आखिर कैसे शुभम ने आम से खास का सफर तय किया आइये इस पोस्‍ट कि सहायता से जानते है।

शुभम गुप्‍ता का प्रारंभिक जीवन

हम जिस शुभम कि बात कर रहे है। वह राजस्‍थान (Rajasthan) राज्‍य के जयपुर (Jaipur) से ताल्‍लुक रखते है। शुभम के पिताजी कि एक जूते कि दुकान थी। शुभम के परिवार में उनके अलावा तीन भाई बहन और थे। जोकि उनके साथ में रहते थे।

जयपुर में दुकान ना चलने के कारण घर का गुजारा सही ढंग से ना चहने के कारण शुभम के पिताजी ने महाराष्‍ट्र आकर शॉप खोलने का डिसिजन लिया। महाराष्‍ट्र आकर शुभम के पिताजी ने जूते कि शॉप (Shoe Shop) डाली। उस समय शुभम और उनकी सिस्‍टर स्‍कूल जाने के लिये ट्रेन का उपयोग करते थे।

वही शुभम के बड़े भाई आईआईटी कि प्रेपरेशन कर रहे थे। चूँकि शुभम के भाई बाहर रहा करते थे। तो पास में रहने कि वजह से शुभम को अपने पापा जी के साथ में दुकान में हाथ बटाना पड़ता था।

पिता का सपना पूरा करने के लिये कि यूपीएससी कि तैयारी

शुभम ने प्रारंभ में पढ़ाई राजस्‍थान में की। महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में आने के बाद उन्‍होंने महाराष्‍ट्र से ही आगे कि पढ़ाई की। जब वह कक्षा आठवी में थे। तब वह अपने पिताजी के साथ महाराष्‍ट्र आ गये थे। कॉमर्स विषय से शुभम ने आगे कि पढ़ाई की।

हाईस्‍कूल तथा इंटरमीडिएट दोनो मे ही शुभम ने अच्‍छे अंक प्राप्‍त किये। अपनी शुरूआती शिक्षा खत्‍म करने के बाद शुभम ने आगे कि पढ़ाई के लिये दिल्‍ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में एडमिशन लिया।

यहॉं से उन्‍होंने ग्रेजुएशन और पोस्‍ट ग्रेजुएशन कंपलीट किया। चूँकिे शुभम के पिता हमेशा से ही चाहते थे, कि उनका बेटा बड़ा होकर बड़ा अधिकारी बने इसलिए शुभम ने पढ़ाई के दोरान ही यूपीएससी (UPSC) कि तैयारी शुरू कर दी थी।

तीन बार प्रयास करने पर भी नही मिली सफलता

अपने पिताजी का सपना पूरा करने के उद्देश्‍य से शुभम ने यूपीएससी कि प्रेपरेशन प्रारंभ कि। 2015 में उन्‍होंने पहली बार यूनियन पब्‍लिक सर्विस कमीशन कि परीक्षा दी। जिसमें वह प्री तक नहीं निकाल पाये।

2015 के बाद उन्‍होंने 2016 में यूपीएससी कि परीक्षा दी। जिसमें वह सिर्फ प्री ही नही बल्‍कि मेन्‍स ओर इंटरव्‍यू तक निकालने में सफल हुये। इसमें शुभम ने 366 रैंक प्राप्‍त कि। उन्‍हें ऑडिट एंड एकाउंट के विभाग में पद मिला।

UPSC HQ
Union Public Service Commission

शुभम चाहते थे कि उन्‍हें और भी अधिक बड़ा पद मिले। इसलिए वह इसे छोड़कर आगे और अच्‍छे से तैयारी में लग गये। 2017 में शुभम ने फिर से यूपीएससी परीक्षा दी। इसमें उन्‍होंने बहुत ही खराब प्रदर्शन किया। वह प्री तक नहीं निकाल पाये। इस प्रकार शुभम के तीन साल अच्‍छी रेंक ना मिलने के कारण खराब हो गये।

2018 में पाई छटवी रैंक मिला आईएएस का पद

तीन बार मन चाही सफलता ना मिलने पर भी शुभम ने अपना हौंसला नीचे नहीं होने दिया। 2018 मे वह फिर से अपने पिताजी का सपना पूरा करने के लिये निकल पड़े। इस बार परीक्षा में उन्‍होंनें बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया।

वह इस बार ऑल इंडिया में छटवा (UPSC IAS Rank 6) स्‍थान प्राप्‍त करने में सफल हुये। इस रैंक (UPSC AIR-6) के साथ उनको उनका मनचाहा पद मिला। जोकि आईएएस अधिकारी का था। अभी शुभम महाराष्‍ट्र कैडर में अपनी सेवा दे प्रदान कर रहे है। उन्‍हें असिस्‍टेंट कलेक्‍टर का पद गढ़चिरौली मे मिला है।

स्‍टूडेंट को दी यह सलाह

शुभम (IAS Shubham Gupta) कि सफलता से उनसे ज्‍यादा उनके पिता बहुत ही खुश है। क्‍योंकि यह सपना उनका था। शुभम कहते है कि उनकी सफलता उनकी लगन और आत्‍मविश्‍वास का परिणाम है। वह कहते है कि असफलता पर कभी निराश नहीं होना चाहिए। बल्‍कि पहले से भी ज्‍यादा मेहनत करके सफलता हासिल करने में लग जाना चाहिए।

यूपीएससी में सफलता के लिये उन्‍होंने युवाओं को एनसीआरटी पढ़ने कि सलाह दी व सोशल मीडिया, इंटरनेट और न्‍यूज चैनल, अखबार से भी जुडे रहने कि सलाह दी है। वह कहते है इससे यूपीएससी कैंडिडेट हर चीज को लेकर अपडेट रहते है, जोकि उनके लिये सबसे ज्‍यादा आवश्‍यक होता है।

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