इस जगह स्टूडेंट्स रेलवे स्टेशन की रोशनी में पढ़ने को मजबूर, हर छात्र सफलता के झंडे गाड़ रहा है।

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Railway Station Study
The Railway junction coaching centre at Sasaram. Students studying under street lights at Sasaram Railway Station. Railway Junction in Bihar That Doubles Up As a Coaching Centre.

Image Credits: Twitter Post

देश के हर कोने में बच्चों की पढ़ाई की हुनार की कहानी सुनने को मिलती है। बिहार एक ऐसा देश बनता जा रहा है जंहा के बच्चे अपनी पढ़ाई को लेकर सुर्खियों में छाये हुये रहते है। भारत के हर कोने में स्टूडेंट्स पढ़ाई के बारे में बातचीत करते है, लेकिन मुख्य टॉपिक बिहार के स्टूडेंट्स होते है। हर एक कोने में बिहार के टॉपर मिलेंगे। हर एक प्रतियोगिता हो या एग्जाम हो सभी मे इनका टेलेंट देखने को मिलेगा।

जब देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की बात होती है, तो सामने आती है कि उन्होंने लैंप पोस्ट के उजाले में पढ़ाई की थी। कुछ ऐसी ही Story सासाराम के स्टूडेंट्स की। सासाराम में स्टूडेंट्स का एक ऐसा ग्रुप है, जो प्रतिदिन रेलवे स्टेशन की रोशनी में पढाई कर अपनी शिक्षा को नई दिशा की ओर ले जा रहे है।

प्रतियोगी परीक्षा के नतीजों में सबसे ज्यादा इनके नाम सामने आते है। जो सभी को चकित कर देता है। देश की सभी प्रतियोगी एग्जाम में सासाराम रेलवे स्टेशन की रोशनी में पड़ने वाले स्टूडेंट्स अपनी कामयाबी का परचम लहराते हुए नजर आते है।

सासाराम रेलवे स्टेशन पर पढाई में मशगुल ये स्टूडेंट्स अलग अलग प्रतियोगी एग्जाम के स्टूडेंट्स हैं। इसमे कुछ वो स्टूडेंट्स भी मिलेंगे जिन्होंने अपनी सफलता के झंडे गाड़े है। सासाराम रेलवे स्टेशन की रोशनी में पढ़ाई कर बहुत सारे स्टूडेंट्स ने रेलवे से लेकर SSC और संघ लोक सेवा की परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है।

जानकारी के मुताबिक पहले सासाराम में पर्याप्त मात्रा में बिजली उपलब्ध नही होती थी। जिसके कारण स्टूडेंट्स को पढ़ने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। सासाराम के बहुत सारे स्टूडेंट्स रेलवे स्टेशन की रोशनी में पढ़ाई करते हुए मिलते थे, लेकिन आज बिहार में बिजली की परेशानी ना के बराबर है।

आज भी स्टूडेंट्स के लिए स्टेशन की रोशनी पर आ कर पढ़ाई करना एक परंपरा बनती नजर आ रही है। समूह में मिलकर ग्रुप डिस्कशन से स्टूडेंट्स में प्रतियोगिता की भावना का जुजुन बढ़ता जा रहा है। समय बलवान होता है, देखते ही देखते आज ये रेलवे स्टेशन प्रतियोगी स्टूडेंट्स के लिये शिक्षा का अड्डा बन गया।

स्टूडेंट्स से बात करने पर उन्होंने बताया कि कभी कभी रेलवे प्रशासन स्टूडेंट्स को यहाँ से जाने के लिए बोलते हैं। लेकिन फिर बोलने पर वो मान जाते है। इन स्टूडेंट्स में अधिकतर वो छात्र मिलते है जो गरीबी के कारण पर्याप्त सुविधा ना होने के कारण रेलवे स्टेशन की रोशनी में पढ़ने के लिए मजबूर होते है। पैसा न होने के कारण ये स्टूडेंट्स ग्रुप में पढ़ाई करते है जिससे इनकी पढ़ाई में हेल्प मिलती है।

अगर कोई छात्र कोचिंग पढ़ता है, तो वो अपने नोट्स लाकर सभी के साथ ग्रुप में मिलकर Study करता है। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के आने जाने का सिलसिला लगातार बना रहता है इस सबके बीच ट्रेन की तेज आवाज में हॉर्न भी बजता रहता है लेकिन स्टूडेंट्स का ध्यान अपनी पढ़ाई में ही लगा रहता है।

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