
Jhunjhunu: हमारे देश में लड़कियों की शिक्षा एक ऐसा विषय है। जिस पर आज भी सरकार के द्वारा काम किया जा रहा है। पहले लड़किेयों को अधिक पढ़ने की इजाजत नहीं थी। उन्हें घर तक ही सीमित रखा जाता था। परन्तु आज लड़कियां लड़को से ज्यादा पढती है। पढ़ाई के क्षेत्र में वह लड़को की बराबरी कर रही है, इस बात पर कोई शक नही है। परन्तु आज भी ऐसी जगह है। जहॉं लड़किेयों को पढ़ने लिखने पर रोका जाता है।
लडकिेयों कि शिक्षा के लिए एक व्यक्ति ने की अपनी संपत्ति दान
लडकियों की इच्छाओं पर समाज के लोग ही बाधा बनकर खड़े रहते है। इसे खत्म करने के लिए बहुत से समाजसेवी व समाजसेवी संगठन सराहनीय काम करते है। इन्ही समाजसेवी में राजस्थान (Rajasthan) के एक करोड़पति का नाम भी आता है। हम जिसकी बात कर रहे है, इन करोड़पति व्यक्ति को करोड़पति फकीर नाम से लोग पुकारते है। आखिर क्यों कहॉं जाता है उन्हें ऐसा आइये जानते है विस्तार से।
उस शख्स को लोग कहते है करोड़पति फकीर
राजस्थान के हरने वाले घासीराम वर्मा (Ghasi Ram Verma) आज 95 वर्ष के है। लड़कियॉं शिक्षित हो और वह आगे बढ़े यह उनका सपना प्रारंभ से ही था। लड़कियों किे शिक्षा में उन्होंने हमेशा ही सराहनीय योगदान दिया है। लड़की शिक्षित हो सके इसलिए घसीराम जी ने अपनी संपत्ति दान में दे दी है। आज भी वह पैसे दान में देते है। इस वजह से ही लोग उनको करोड़पति फकीर कहते है।
अब तक 10 करोड़ दान कर चुके है घासीराम वर्मा
राजस्थान राज्य के झुंझनू (Jhunjhunu) के डॉ. घासीराम वर्मा जी (Dr Ghasi Ram Verma) गणित के प्रोफेसर (Mathematician) रह चुके है। वह लड़कियों को प्रोत्साहित हमेशा से ही करते थे। लड़कियॉं आगे बढ़े व शिक्षा हासिल करें यही उनका सपना था। इसलिए वह इस क्षेत्र में प्रयास भी किया करते थे।
उन्होंने लड़की पढ़ सके व वह आगे बढ़े इसलिए पैसा दान करके बहुत से स्कूलों की स्थापना करवाई व उनका संचालन भी सही तरीके से करवाया। उन्होंने जो प्रयास किया इस कारण हजारों लड़कियों की शिक्षा हो पाई है। आपको बता दे डॉ. घासीदास ने अब तक लड़कियों की शिक्षा में 10 करोड़ का दान कर चुके है।
कई स्कूल व कॉलेज की हुई स्थापना
घासीदास जी बताते है, उन्होंने अब तक जितना पैसा दान दिया है। उसमें राजस्थान राज्य में 21 स्कूल, 28 हॉस्टल व कई कॉलेज की स्थापना व संचालन में मदद हुई है। वह कहते है एक जागरूक और आत्मनिर्भर समाज बनाने के लिए लड़कियों का शिक्षित होना बहुत ही जरूरी है। इसलिए वह चाहते है कि समाज की लड़कियॉं अधिक से अधिक शिक्षा हासिल करें।
अपनी पेंशन का 50 लाख करते है दान
आज के निजी जीवन की बात करें तो घासीराम वर्मा जी अमेरिका में निवास करते है। वह हर 2 महीने मे इंडिया आते है और अपने सभी क्षेत्र का दौरा करते है। आज घासीदास जी रिटायर हो चुके है ओर वह इस शिक्षा मिशन के लिए अपनी पेंशन से 50 लाख रूपये का खर्चा करते है। इन पैसों को घासीदास जी डायरेक्ट स्कूल व कॉलेज में दान करते है।
घासीदास जी की शिक्षा
डॉ. वर्मा जी की शुरूआती जीवन की बात करें तो जब वह शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। तब उनके परिवार मे आर्थिक तंगी हआ करती थी। वर्मा जी ने अपनी स्कॉलरशिप की राशि का उपयोग करके ही अपनी पूरी पढ़ाई कंपलीट की है।
झुंझुनू जिले कि शान करोड़पति फ़कीर के नाम से मशहूर अमरीका प्रवासी प्रसिद्ध गणितज्ञ डॉ. घासीराम जी वर्मा साहब के 95 वें जन्मदिन के अवसर पर शाल ओढ़ा कर एवं डैडी पर जारी हुई डाक टिकट का फोल्डर भेंट कर अभिनन्दन किया। pic.twitter.com/SCIR624i2g
— MD Chopdar (@mdchopdarinc) August 1, 2022
वह मेथ्स मे काफी होशियार थे। गणित मे रूचि की वजह से ही उन्होंने अपना स्नातक गणित से कंपलीट किया। जिसके बाद उन्हें एक टीचर की नौकरी मिल गई। शिक्षक का काम करते करते ही वर्मा जी ने अपनी पीएचडी की पढ़ाई भी कंपलीट की थी।
न्यूयॉर्क के आइलैंड कॉलेज में थे प्रोफेसर
1958 में डॉ. वर्मा जी को न्यूयॉर्क (New York) में आइलैंड कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर काम करने का चांस मिला। इस मौके को वर्मा ने नहीं छोडा़ और आइलैंड कॉलेज में वह प्रोफेसर के पद पर कार्य करने लगे।
इस समय वर्मा को सैलरी के तौर पर 400 डॉलर मिला करता था। यह एक ऐसा विश्वविद्यालय था, जहॉं वर्मा जी के पहले किसी भी भारतीय ने नही पढा़या था। यह बात डॉ. वर्मा के लिए बहुत बड़ी थी।
आज बालिका शिक्षा के मसीहा डॉ घासीराम जी वर्मा के जन्मदिन समारोह में भाग लेकर उन्हें दीर्घायु जीवन हेतु शुभकामनाएं बधाई दी । pic.twitter.com/9tM4bGzy3W
— Rajendra Bhamboo (@rajendrabhamboo) August 1, 2022
आज डॉ. वर्मा जी प्रोफेसर के पद से रिटायर हो चुके है। उन्हें पेंशन के तौर पर 65 लाख रूपये हर साल मिलता है। इन पैसों मे से 50 लाख डॉ. वर्मा लडकियों कि शिक्षा बढ़ाने के लिए दान में दे देते है।
आज उनके द्वारा जो पैसा दान मे दिया जाता है, उसकी वजह से बहुत सी लड़कियॉ पढा़ई कर रही है। डॉ. वर्मा के इस सराहनीय कार्य के लिए हम उनका धन्यवाद करते है।



