
Delhi: हम सभी इस बात से परिचित है कि ईस्ट इंडिया कंपनी सन 1600 में स्थापित हुई थी। इस कंपनी के स्थापित होने के बाद से, हमारे देश की सत्ता ब्रिटिश के हाथो में जाने की शुरुआत हो गई थी। इस कंपनी ने भारत पर लगभग दो सौ साल तक राज किया। लाखों भारतीय कई सालों तक ईस्ट इंडिया कंपनी के बहुत से गलत फैसलों के शिकार हुए।
हमे अपने ही देश में कई सालों तक अंग्रेजों का दमन सहन करना पड़ा। लेकिन हमारे देश के वीर जवानों ने इस दमन की नीति को कभी स्वीकार नहीं किया। अंग्रेजों की दमन नीति के विरोध में ही 1857 में क्रांतिकारियों ने देश की स्वतंत्रता का बिगुल बजा दिया। 1857 की क्रांति को देश का पहला स्वतन्त्र संग्राम कहा जाता हैं।
ईस्ट इंडिया कंपनी जिसने 200 साल तक किया राज
कई सालों भले ही ब्रिटिश ने हम पर राज किया हो। लेकिन आज कि बात करे तो एक भारतीय ब्रिटिश कंपनी कि कमान अपने हाथ में लिया हुआ है। भले ही कंपनियां ने कई निर्दोष भारतीयों को नुकसान पहुंचाया हो।
आज ऐसा समय का चक्र घुमा है, कि एक इंडियन व्यापारी (Indian Businessman) ने भारत पर राज करने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) को खरीदा है। इससे अंग्रेजों को काफी घाव मिल गया हैं। वह भारतीय जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी को खरीदा है, उनका नाम संजीव मेहता (Sanjiv Mehta) है।
कंपनी का इतिहास
ईस्ट इंडिया कंपनी के इतिहास कि बात की जाए तो सन 1600 में शुरू होने वाली इस कंपनी का राज एक दिन पूरी दुनिया पर होगा इस बात की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। 16 वी शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में कदम रखा। व्यापारिक उद्देश्य से इस दौरान भारत ने इस कंपनी की सहायता से यूरोपीय देशों को मसाले चाय और साथ में अन्य वस्तुओं का भी निर्यात किया।
1857 की क्रांति ने ब्रिटिश शाशन की हिला दी थी नीव
इस व्यापार के दौरान ही ब्रिटिश सरकार (British Government) ने भारत और अन्य देश से ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा इतनी संपत्ति हासिल कर ली कि उसने भारत समेत कई अन्य देशों पर भी अपना कब्जा कर लिया।
ब्रिटिश कंपनी ने लगभग 200 सालों तक भारतीयों पर राज करता रहा। परंतु 1857 की क्रांति से ईस्ट इंडिया कंपनी की पूरी नींव हिल गई। बाद मे कई क्रांतिकारी आंदोलन हुए जिससे कंपनी को भारत छोड़ कर भागना पड़ा।
1947 में भारत ब्रिटिश शाशन से आजाद हुआ। ब्रिटिश के भारत मे अंत के साथ ही ईस्ट इंडिया कंपनी भी भारत से पतन हो गई। हालाकि पूरी तरह से यह कंपनी भारत से नहीं गई। लेकिन ब्रिटिश शाशन के अंत के कुछ साल बाद ही कंपनी की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से खराब हो गई। ईस्ट इंडिया कंपनी का नाम पूरी दुनिया में काफी फेमस था। इस वजह से ब्रिटिश सरकार ने इसको दुनिया मे पूरी तरह बंद नहीं किया।
आर्थिक स्थिति खराब देखकर संजीव ने कंपनी खरीदने का मन बनाया
जब 2003 में भारतीय व्यवसायी मिस्टर संजीव मेहता को इस बात का पता चला कि पूरी दुनिया पर एक समय में राज करने वाली ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी कि स्थिति बहुत खराब चल रही है। तो उन्होंने कंपनी के कार्यालय जाने का डिसिजन लिया। इसी सोच के साथ वह ईस्ट इंडिया कंपनी कार्यालय में जा पहुचे। संजीव मेहता जी कंपनी खरीद कर लाखों भारतीयों को एक तोहफा देना चाहते थे।
20 मिनिट में खरीदी 21 प्रतिशत हिस्सेदारी
संजीव मेहता बताते ही की जब वह ईस्ट इंडिया कंपनी कार्यालय में पहुचे तो वहां वह सिर्फ 20 मिनट ही थे। वह कहते है कि पहले 10 मिनट में उनको यह अहसास हो गया था ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) कि आर्थिक स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब है।
जब वह वहाँ गए तो उन्हें बेचने की एक उम्मीद मिली। संजीव जी ने बताया कि बातचीत के समय उन्होंने टेबल पर पड़े एक पेपर पर एक कीमत लिख कर उनको दे दी। जो कीमत संजीव ने लिखी थी, उसे देखकर कंपनी ने संजीव जी को 21 प्रतिशत शेयर बेच दिया। सिर्फ 20 मिनिट में ही कंपनी की काफी बड़ी हिस्सेदारी बिक गई।
आनंद महिंद्रा ने भी किया कंपनी पर निवेश
संजीव ने 15 मिलियन इंडियन रूपए में 1,11 करोड़ रुपये कंपनी में निवेश किये। इससे उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के 21 प्रतिशत शेयर खरीद लिये। सिर्फ एक साल के अंदर ही संजीव ने ईस्ट इंडिया कंपनी के और 38 प्रतिशत शेयर खरीदे और पूरी तरह से कंपनी को अपने हाथो में ले लिया।
Did you know that today East India Company is owned by @IIMAhmedabad alum Sanjiv Mehta?
Mr. Mehta acquired the company and turned it into a consumer brand.
That "pan-masala" ad was not wrong after all!
R̵e̵v̵e̵n̵g̵e̵ Corporate Acquisition is a dish best served coldA Thread🧵 pic.twitter.com/LzUkgpXg3r
— India Wants To Know – Panel Quiz Show (@IWTKQuiz) July 29, 2022
संजीव ने कई सालों तक ईस्ट इंडिया कंपनी को लॉन्च नहीं किया। कुछ समय बाद भारतीय व्यवसायी मिस्टर आनंद महिंद्रा जी ने भी संजीव जी की ईस्ट इंडिया कंपनी पर भारी निवेश कर दिया।
भारत मे भी खुलेगा कंपनी का स्टोर
इस ईस्ट इंडिया कंपनी अब भारतीयों के हाथो में आ गई है। अभी कि बात करे तो कंपनी विलासिता की वस्तुओं को नहीं, बल्कि अब ईस्ट इंडिया कंपनी चाय, मसाले, नमक, रेशम, चीनी इन सब का व्यवसाय करेगी।
Now, East India Company is owned by an Indian entrepreneur
Indian entrepreneur named Sanjiv Mehta
The East India Company, which once owned India, in one of the great ironies of history, is now owned by an Indian entrepreneur named Sanjiv Mehta. pic.twitter.com/b87SlRCyfI— vasigaran (@vasigaran20) October 9, 2021
अभी ही इस भारतीय कंपनी ने लंदन में भी 2 नए स्टोर खोल लिए हैं। अब इस कंपनी के भारत में एक स्टोर खुलने की तैयारी हो रही है। इन स्टोर्स में कपड़े, फर्नीचर, खाने-पीने का लगभग सभी सामान, घरेलू सामान यह सब मिलेगा।
ईस्ट इंडिया कंपनी को देश भारत मे दोबारा देखना काफी दिलचस्प रहेगा। लेकिन इस बार इसकी तस्वीर कुछ बदली हुई होगी। क्योंकि इस बार इस कंपनी का मालिक कोई अंग्रेज नहीं बल्कि एक भारतीय होगा।



