
Delhi: वैसे तो प्रदूषण को मिट्टी में हानिकारक रसायनों की मौजूदगी के तौर पर परिभाषित किया जाता है, जो मानव स्वास्थ्य या पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए खतरा पैदा करने के लिए पर्याप्त उच्च सांद्रता में होता है।
मिट्टी में कुदरती रूप से पाए जाने वाले दूषित पदार्थों के मामले में, भले ही उनका स्तर हानि पैदा करने के लिए पर्याप्त न हो, लेकिन मिट्टी में प्रदूषण का स्तर साधारण रूप से मौजूद स्तर से ज्यादा होने पर भी मृदा प्रदूषण होता है।
भारत में अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) कई सालों से एक अवश्यक मुद्दा रहा है। इनमें से अधिकांश अपशिष्ट (Waste) या तो जैविक या ठोस होते हैं, जैसे प्लास्टिक कचरा। जैविक कचरे को अभी भी प्रबंधित किया जा सकता है और उनकी व्यवस्था की जा सकती है, परंतु प्लास्टिक कचरा फिर भी एक बहुत बड़ी परेशानी है, जिससे निरंतर निपटने की जरूरत है।
दिल्ली के निकट स्थित शायना इकोनाइफाइड इंडिया (Shaina Iconified India) एक ऐसा संगठन है, जिसने अपनी स्थापना के पश्चात से 11 लाख रंगीन टाइलें के निर्माण हेतु 340 टन प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया है।
द लॉजिकल इंडियन से साक्षात्कार कहा पारस सलूजा ने अपनी टाईल्स के बारे में बताया, “हमारी सभी टाइलें एंटी-स्टैटिक, रोगाणुरोधी, जीवाणुरोधी हैं, जिनकी तापन क्षमता 140 डिग्री सेल्सियस तक होती है और इन्हें -25 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जा सकता है।” इसके सिवाय, हर एक टाइल में 20 और 40 टन असर की क्षमता है और 50 वर्षो तक रह सकती है।
Recently the Municipal corporations of Gurugram converted 45 Tonnes of plastic waste into 1.5 lakhs of Eco-friendly tiles. Possibility is endless for Recycling. pic.twitter.com/TiTfWCH8Bj
— Recycle India (@recycleindia) June 23, 2020
यह सब 2015 में प्रारंभ हुआ, जब पारस एवरेस्ट में मौजूद कैंप में गए थे और उन्होने देखा था कि किस तरह प्लास्टिक कचरे ने निकट के वातावरण को खराब कर दिया था। यहीं से पारस ने कुछ कर दिखाने का विचार बनाया। पारस ने अपनी वियतनाम की यात्रा के समय एक निवारण खोजा है, जहां उन्होंने देखा कि शहरों का रखरखाव किस प्रकार किया जाता है।
Tiles 10 times stronger than cement tiles made out of recycled plastic waste – SMC’s next goal. This will help us re-use plastic waste, reduce stress on landfills and reduce costs of street pavements. pic.twitter.com/JkRyY9zx1c
— Office of Mayor of Srinagar (@MayorofS) June 4, 2019
जब पारस भारत लौट आए, तो उन्होने रसायनों के विषय में बड़े स्तर पर अध्ययन किया और प्लास्टिक प्रदूषण की परेशानी का निवारण करने में सहायता करने के लिए विशेषज्ञों से सहल की।
These guys make tiles out of plastic waste. Watch how they do it. pic.twitter.com/rl42NmE8IK
— Brut India (@BrutIndia) January 20, 2019
पारस ने उसी वर्ष अपने दोस्त, संदीप नागपाल के साथ 80 लाख रुपये की प्रारंभिक राशि के साथ शायना इकोनाइफ़ाइड इंडिया का प्रारंभ कीया। शुरुआत के तुरंत बाद, स्टार्टअप ने स्क्रैप डीलरों और गैर सरकारी संगठनों के साथ विभिन्न विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक कचरे की खरीद के लिए भागीदारी भी की।



