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Delhi: सफलता किसी की मोहताज नही होती। सफलता पाने के लिए जरूरी नही है कि परिवार शिक्षित हो। इस बात को सच सावित कर दिया बसंत चौधरी ने। चौधरी जी रहिस नहीं थे, मगर अपने परिवार को ‘काबिल’ बनाने में कसर नही छोड़ी। खुद महज चौथी कक्षा पास कर पाए।
फिर भी पढ़ाई का मोल अच्छे से समझा और अपने बच्चों को पढ़ने-लिखने व आगे बढ़ने में हमेशा उनका साथ दिया। उनके होसलो को उड़ान देते थे। उनकी मेहनत और लगन से आज परिवार सरकारी नौकरियों की खान बन गया। अकेले चौधरी बसंत सिंह के परिवार ने देश को दो आईएएस, एक IPS सहित वन क्लास के 11 असफर दिए हैं।
चौधरी बसंत सिंह श्योंकद का परिवार मूलरूप से हरियाणा के जींद जिले के गांव डूमरखां कलां के रहने वाला है। बसंत श्योंकद का मई 2020 में निधन हो गया। खास बात यह है कि कम पढ़े-लिखे बसंत सिंह की दोस्ती हमेशा बड़े लोगों और अफसरों से रही। उसी तरह के संस्कार और सांस्कृतिक इन्होंने अपने चार बेटे और तीन बेटियों को दिए।
जींद जिले के गांव डूमरखां कलां के स्व. बसंत सिंह चार बेटों व तीन बेटियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। चारों बेटे क्लास वन अफसर बने तो एक पुत्रवधू IAS, पोता भी IAS और पोती IPS। तीनों बेटी पोस्ट ग्रेजुएट और एक IRS। बसंत सिंह कहते थे कि वह बेशक कम पढ़े-लिखे थे, लेकिन दोस्ती हमेशा बड़े लोगों व अपने से ज्यादा पढ़े-लिखों से की। जैसे वे अपने बच्चों को पढ़ाते थे, उसी तरह उन्होंने भी अपने बेटे-बेटियों को शिक्षा देने में कोई कसर नही कम रखी।
उनके बच्चों ने मेहनत और कड़ी परिश्रम करके अफसर बन गए। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक चौधरी बसंत सिंह श्योंकद खुद चौथी क्लास तक ही पढ़ सकें थे। हाल ही में उनकी 99 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। उन्होंने अपने परिवार को जो बुलंदी पर पहुँचाया वो बहुत ही महत्वपूर्ण रहा। उनके परिवार का हर सदस्य स्वंय की सफलता के लिए उन्हें ही श्रेय देता है।
यह कहानी भारत में हरियाणा के जींद जिले के गांव डूमरखां कलां की है। यहां एक ऐसा परिवार रहता है जिसमें IAS और IPS समेत 11 ऑफिसर है। लेकिन इनके सफलता का श्रेय एक चौथे पास इंसान को जाता है जिनका नाम चौधरी बसंत सिंह श्योंकद है। शायद आपको यकीन नहीं होगा लेकिन यह सच है कि चौथी पास है pic.twitter.com/1ui2qZ5G2A
— Jat Samaj (@jat_kissan) August 10, 2020
बसंत सिंह का उठना-बैठना हमेशा से ही बड़े ऑफिसर्स के साथ रहा और इसकी शिक्षा ही उन्होंने अपने बच्चों को भी दी। बसंत सिंह ने अपने 4 बेटों और 3 बेटियों को भी पढ़ाई के लिए हमेशा समर्थन किया।कभी उनके हौसलों को कम नही होने दिया।
अपनी पढ़ाई के बलबूते पर ही बसंत सिंह के चारों बेटे फर्स्ट क्लास ऑफिसर भी बने और अपने पिता का नाम भी रोशन किया। जबकि उनकी एक पुत्रवधू ने भी आईएएस बनकर अपने ससुर का सम्मान बढ़ाया। इतना ही उनकी अब चौधरी बसंत सिंह के पोते भी आईएएस बन गए हैं और देश की सेवा कर रहे हैं।
ऑफिसर बनने का यह सिलसिला जो बेटों से शुरू हुआ वह चलता ही जा रहा है और रुकने के नाम भी नहीं ले रहा है। अपने पोते के IAS बनने के बाद उन्हें पोती के भी आईपीएस ऑफिसर बनने की खबर मिली जोकि गर्व की बात है।



